उद्देश्य:रक्षा (Protection)शक्ति (Strength)दुःख नाश (Relief)
✓ संपूर्ण (7/7 श्लोक)
परिचय
माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।
स्रोत: दुर्गा सप्तशती (मार्कण्डेय पुराण) से संकलित संपूर्ण सात श्लोक
उद्भव / पृष्ठभूमि
दुर्गा सप्तश्लोकी "दुर्गा सप्तशती" (देवी महात्म्य) से संकलित सात चुने हुए श्लोकों का संक्षिप्त स्तोत्र है। जिनके पास सम्पूर्ण सप्तशती (700 श्लोक) के पाठ का समय नहीं होता, उनके लिए यह सात श्लोक सम्पूर्ण देवी-स्तुति का सार माने जाते हैं। इसे "अमंत्र-दुर्गा" भी कहा जाता है।
हे दुर्गे, स्मरण करने पर आप समस्त प्राणियों का भय हर लेती हैं; स्वस्थचित्त मनुष्यों द्वारा स्मरण किए जाने पर अत्यंत शुभ बुद्धि देती हैं। हे दरिद्रता, दुःख व भय हरने वाली, सदा करुणार्द्रचित्त रहकर सबका उपकार करने वाली आपके अतिरिक्त और कौन है?
प्रसन्न होने पर आप समस्त रोगों का नाश करती हैं और रुष्ट होने पर समस्त अभीष्ट कामनाओं को (नष्ट कर देती हैं)। जो आपकी शरण में आते हैं उन पर विपत्ति नहीं आती, बल्कि वे दूसरों के आश्रयदाता बन जाते हैं।
हे तीनों लोकों की अधीश्वरी! आप ही समस्त बाधाओं का शमन करती हैं; इसी प्रकार आप हमारे शत्रुओं का भी विनाश कीजिए।
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अर्थ (हिन्दी)
वह भगवती देवी (महामाया) ज्ञानियों के भी चित्त को बलपूर्वक खींचकर मोह की ओर प्रेरित कर देती हैं — ऐसी उनकी अपार शक्ति है।
हे दुर्गे, स्मरण करने पर आप समस्त प्राणियों का भय हर लेती हैं; स्वस्थचित्त मनुष्यों द्वारा स्मरण किए जाने पर अत्यंत शुभ बुद्धि देती हैं। हे दरिद्रता, दुःख व भय हरने वाली, सदा करुणार्द्रचित्त रहकर सबका उपकार करने वाली आपके अतिरिक्त और कौन है?
हे समस्त मंगलों की मंगल, कल्याणी, सब प्रयोजनों को सिद्ध करने वाली, शरण देने वाली, त्रिनेत्रा गौरी नारायणी, आपको नमस्कार है।
हे शरणागत, दीन व पीड़ितों की रक्षा में तत्पर रहने वाली, सबकी पीड़ा हरने वाली देवी नारायणी, आपको नमस्कार है।
हे सर्वस्वरूपा, सबकी ईश्वरी, समस्त शक्तियों से युक्त देवी! हे दुर्गे, हमें सब भयों से बचाइए; देवी, आपको नमस्कार है।
प्रसन्न होने पर आप समस्त रोगों का नाश करती हैं और रुष्ट होने पर समस्त अभीष्ट कामनाओं को (नष्ट कर देती हैं)। जो आपकी शरण में आते हैं उन पर विपत्ति नहीं आती, बल्कि वे दूसरों के आश्रयदाता बन जाते हैं।
हे तीनों लोकों की अधीश्वरी! आप ही समस्त बाधाओं का शमन करती हैं; इसी प्रकार आप हमारे शत्रुओं का भी विनाश कीजिए।
लाभ
भय, शत्रु-बाधा व संकट से रक्षा होती है।
दरिद्रता व दुःख का नाश होकर शुभ बुद्धि मिलती है।
कम समय में सम्पूर्ण देवी-स्तुति का फल प्राप्त होता है।
कब करें पाठ
नवरात्रि में नित्यशुक्रवार व अष्टमी कोप्रातः व संध्या पूजा में
पाठ विधि
माँ दुर्गा के समक्ष लाल पुष्प व सिंदूर अर्पित कर सातों श्लोकों का शुद्ध पाठ करें। नवरात्रि में नित्य पाठ विशेष फलदायी होता है; समयाभाव में यह सम्पूर्ण सप्तशती का सार है।