दुर्गा सप्तश्लोकी

durgā saptaślokī

Durga Saptashloki

समय
3–4 मिनट
श्लोक
7
कठिनाई
मध्यम (Intermediate)
शुभ दिन
शुक्रवार व अष्टमी; नवरात्रि
उद्देश्य:रक्षा (Protection)शक्ति (Strength)दुःख नाश (Relief)
✓ संपूर्ण (7/7 श्लोक)

परिचय

माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।

स्रोत: दुर्गा सप्तशती (मार्कण्डेय पुराण) से संकलित संपूर्ण सात श्लोक

उद्भव / पृष्ठभूमि

दुर्गा सप्तश्लोकी "दुर्गा सप्तशती" (देवी महात्म्य) से संकलित सात चुने हुए श्लोकों का संक्षिप्त स्तोत्र है। जिनके पास सम्पूर्ण सप्तशती (700 श्लोक) के पाठ का समय नहीं होता, उनके लिए यह सात श्लोक सम्पूर्ण देवी-स्तुति का सार माने जाते हैं। इसे "अमंत्र-दुर्गा" भी कहा जाता है।

संपूर्ण स्तोत्र

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ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा। बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति॥

वह भगवती देवी (महामाया) ज्ञानियों के भी चित्त को बलपूर्वक खींचकर मोह की ओर प्रेरित कर देती हैं — ऐसी उनकी अपार शक्ति है।

दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि। दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता॥

हे दुर्गे, स्मरण करने पर आप समस्त प्राणियों का भय हर लेती हैं; स्वस्थचित्त मनुष्यों द्वारा स्मरण किए जाने पर अत्यंत शुभ बुद्धि देती हैं। हे दरिद्रता, दुःख व भय हरने वाली, सदा करुणार्द्रचित्त रहकर सबका उपकार करने वाली आपके अतिरिक्त और कौन है?

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

हे समस्त मंगलों की मंगल, कल्याणी, सब प्रयोजनों को सिद्ध करने वाली, शरण देने वाली, त्रिनेत्रा गौरी नारायणी, आपको नमस्कार है।

शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे। सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

हे शरणागत, दीन व पीड़ितों की रक्षा में तत्पर रहने वाली, सबकी पीड़ा हरने वाली देवी नारायणी, आपको नमस्कार है।

सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते। भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते॥

हे सर्वस्वरूपा, सबकी ईश्वरी, समस्त शक्तियों से युक्त देवी! हे दुर्गे, हमें सब भयों से बचाइए; देवी, आपको नमस्कार है।

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्। त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति॥

प्रसन्न होने पर आप समस्त रोगों का नाश करती हैं और रुष्ट होने पर समस्त अभीष्ट कामनाओं को (नष्ट कर देती हैं)। जो आपकी शरण में आते हैं उन पर विपत्ति नहीं आती, बल्कि वे दूसरों के आश्रयदाता बन जाते हैं।

सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि। एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम्॥

हे तीनों लोकों की अधीश्वरी! आप ही समस्त बाधाओं का शमन करती हैं; इसी प्रकार आप हमारे शत्रुओं का भी विनाश कीजिए।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. वह भगवती देवी (महामाया) ज्ञानियों के भी चित्त को बलपूर्वक खींचकर मोह की ओर प्रेरित कर देती हैं — ऐसी उनकी अपार शक्ति है।
  2. हे दुर्गे, स्मरण करने पर आप समस्त प्राणियों का भय हर लेती हैं; स्वस्थचित्त मनुष्यों द्वारा स्मरण किए जाने पर अत्यंत शुभ बुद्धि देती हैं। हे दरिद्रता, दुःख व भय हरने वाली, सदा करुणार्द्रचित्त रहकर सबका उपकार करने वाली आपके अतिरिक्त और कौन है?
  3. हे समस्त मंगलों की मंगल, कल्याणी, सब प्रयोजनों को सिद्ध करने वाली, शरण देने वाली, त्रिनेत्रा गौरी नारायणी, आपको नमस्कार है।
  4. हे शरणागत, दीन व पीड़ितों की रक्षा में तत्पर रहने वाली, सबकी पीड़ा हरने वाली देवी नारायणी, आपको नमस्कार है।
  5. हे सर्वस्वरूपा, सबकी ईश्वरी, समस्त शक्तियों से युक्त देवी! हे दुर्गे, हमें सब भयों से बचाइए; देवी, आपको नमस्कार है।
  6. प्रसन्न होने पर आप समस्त रोगों का नाश करती हैं और रुष्ट होने पर समस्त अभीष्ट कामनाओं को (नष्ट कर देती हैं)। जो आपकी शरण में आते हैं उन पर विपत्ति नहीं आती, बल्कि वे दूसरों के आश्रयदाता बन जाते हैं।
  7. हे तीनों लोकों की अधीश्वरी! आप ही समस्त बाधाओं का शमन करती हैं; इसी प्रकार आप हमारे शत्रुओं का भी विनाश कीजिए।

लाभ

  • भय, शत्रु-बाधा व संकट से रक्षा होती है।
  • दरिद्रता व दुःख का नाश होकर शुभ बुद्धि मिलती है।
  • कम समय में सम्पूर्ण देवी-स्तुति का फल प्राप्त होता है।

कब करें पाठ

नवरात्रि में नित्यशुक्रवार व अष्टमी कोप्रातः व संध्या पूजा में

पाठ विधि

माँ दुर्गा के समक्ष लाल पुष्प व सिंदूर अर्पित कर सातों श्लोकों का शुद्ध पाठ करें। नवरात्रि में नित्य पाठ विशेष फलदायी होता है; समयाभाव में यह सम्पूर्ण सप्तशती का सार है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण (7/7 श्लोक)
स्रोत परंपरादुर्गा सप्तशती (मार्कण्डेय पुराण) — सप्तश्लोकी
रचयितामार्कण्डेय पुराण परंपरा
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

माँ दुर्गा

Goddess Durga

माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।

देवता वर्गशक्ति · रक्षा · विजय · साहस
वाहनसिंह
मुख्य मंत्रॐ दुं दुर्गायै नमः
माँ दुर्गा के पाठ
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दुर्गा सप्तश्लोकी — सामान्य प्रश्न

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