दुर्गा गायत्री मंत्र

durgā gāyatrī mantra

Durga Gayatri Mantra

समय
40 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
नवरात्रि व मंगलवार-शुक्रवार
उद्देश्य:रक्षा (Protection)शक्ति (Power)आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual Growth)
✓ संपूर्ण गायत्री मंत्र

दुर्गा गायत्री मंत्र — पारंपरिक दुर्गा गायत्री (गायत्री छंद)। हम कात्यायनी को जानते हैं और कन्याकुमारी का ध्यान करते हैं; वे दुर्गा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें। परंपरा में इसे मुख्यतः रक्षा, शक्ति, आध्यात्मिक उन्नति के भाव से जपा जाता है, प्रायः 108 बार अर्थात एक माला।

परिचय

माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।

स्रोत: पारंपरिक दुर्गा गायत्री (गायत्री छंद)

एक नज़र में

मंत्र / पाठदुर्गा गायत्री मंत्र
IASTdurgā gāyatrī mantra
प्रकारगायत्री मंत्र
देवतामाँ दुर्गा
मूल स्रोतपारंपरिक दुर्गा गायत्री (गायत्री छंद)
जप संख्या108
मालारुद्राक्ष या स्फटिक माला
शुभ दिननवरात्रि व मंगलवार-शुक्रवार
पाठ समय40 सेकंड
कठिनाईमध्यम

उद्भव / पृष्ठभूमि

दुर्गा गायत्री मंत्र पारंपरिक दुर्गा गायत्री (गायत्री छंद) के रूप में जाना जाता है। हम कात्यायनी को जानते हैं और कन्याकुमारी का ध्यान करते हैं; वे दुर्गा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें।

मंत्र के प्रत्येक पद का अपना अर्थ है: कात्यायन्यै — देवी कात्यायनी को; विद्महे — हम जानते हैं; कन्याकुमारि — कन्याकुमारी (दुर्गा) का; धीमहि — हम ध्यान करते हैं; तन्नो दुर्गिः प्रचोदयात् — वे दुर्गा हमें प्रेरित करें। इन्हीं पदों के मेल से पूरे मंत्र का भाव बनता है, इसलिए जप करते समय इनका स्मरण रखना उपयोगी कहा जाता है।

यह गायत्री छंद में रचा मंत्र है। गायत्री-वर्ग के मंत्रों में स्वर तथा छंद का विशेष विधान होता है, इसलिए परंपरा में इन्हें शुद्ध उच्चारण सहित सीखने पर बल दिया जाता है।

परंपरा में इसका जप 108 बार — एक माला — कहा जाता है, और इसके लिए रुद्राक्ष या स्फटिक माला बताई जाती है। इसके लिए नवरात्रि व मंगलवार-शुक्रवार विशेष कहे जाते हैं। परंपरा में यह भी कहा जाता है कि संख्या से अधिक महत्व नियमितता का है।

मंत्र

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ॐ कात्यायन्यै च विद्महे कन्याकुमारि च धीमहि। तन्नो दुर्गिः प्रचोदयात्॥

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उच्चारण (Pronunciation)

ॐ कात्यायन्यै च विद्महे कन्याकुमारि च धीमहि। तन्नो दुर्गिः प्रचोदयात्॥

oṃ kātyāyanyai ca vidmahe kanyākumāri ca dhīmahi | tanno durgiḥ pracodayāt ||

Om Katyayanyai Cha Vidmahe Kanyakumari Cha Dhimahi, Tanno Durgih Prachodayat.

उच्चारण मार्गदर्शन: "कात्यायन्यै", "विद्-म-हे", "कन्या-कुमारि", "धी-म-हि" स्पष्ट बोलें। "धीमहि" में "धी" दीर्घ; "प्रचोदयात्" का "त्" हल्का हलन्त।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

कात्यायन्यैदेवी कात्यायनी को
विद्महेहम जानते हैं
कन्याकुमारिकन्याकुमारी (दुर्गा) का
धीमहिहम ध्यान करते हैं
तन्नो दुर्गिः प्रचोदयात्वे दुर्गा हमें प्रेरित करें

अर्थ (हिन्दी)

  1. हम कात्यायनी को जानते हैं और कन्याकुमारी का ध्यान करते हैं; वे दुर्गा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें।

लाभ

  • भय व नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है।
  • साहस, शक्ति व आत्मबल बढ़ता है।
  • मन शांत होकर आध्यात्मिक उन्नति होती है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: रुद्राक्ष या स्फटिक माला

उत्तम समय: प्रातः, संध्या व नवरात्रि

जप का उत्तम समय

नवरात्रि मेंमंगलवार व शुक्रवार कोप्रातः व संध्या पूजा में

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

देवी दुर्गा का ध्यान करते हुए रुद्राक्ष या स्फटिक माला से 108 बार जप करें। नवरात्रि में जप विशेष फलदायी होता है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराblog.shlokmantra.com — 108 देवताओं के गायत्री मंत्र · hindi.webdunia.com — हर देवी-देवता का गायत्री मंत्र · पाठ-भेद: ये प्रकाशक "कन्याकुमारी च धीमहि तन्नो दुर्गा प्रचोदयात्" छापते हैं; यहाँ "तन्नो दुर्गिः" रखा गया है
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

माँ दुर्गा

Goddess Durga

माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।

देवता वर्गशक्ति · रक्षा · विजय · साहस
वाहनसिंह
मुख्य मंत्रॐ दुं दुर्गायै नमः
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दुर्गा गायत्री मंत्र — सामान्य प्रश्न

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