समय
40 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
नवरात्रि व मंगलवार-शुक्रवार
उद्देश्य:रक्षा (Protection)शक्ति (Power)आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual Growth)
✓ संपूर्ण गायत्री मंत्र
दुर्गा गायत्री मंत्र — पारंपरिक दुर्गा गायत्री (गायत्री छंद)। हम कात्यायनी को जानते हैं और कन्याकुमारी का ध्यान करते हैं; वे दुर्गा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें। परंपरा में इसे मुख्यतः रक्षा, शक्ति, आध्यात्मिक उन्नति के भाव से जपा जाता है, प्रायः 108 बार अर्थात एक माला।
FAQ
दुर्गा गायत्री मंत्र — सामान्य प्रश्न
यह भय से रक्षा करता है, साहस व शक्ति बढ़ाता है और आध्यात्मिक उन्नति में सहायक है।
नवरात्रि, मंगलवार व शुक्रवार को तथा नित्य प्रातः-संध्या में इसका जप विशेष लाभकारी है।
परंपरा में इस मंत्र का जप 108 बार — अर्थात एक माला — करने का विधान कहा जाता है, और इसके लिए रुद्राक्ष या स्फटिक माला का प्रयोग बताया जाता है। जप का सुझाया गया समय प्रातः, संध्या व नवरात्रि है। संख्या से अधिक महत्व नियमितता तथा शुद्ध उच्चारण का माना गया है।
मंत्र के पदों का अर्थ इस प्रकार है — कात्यायन्यै — देवी कात्यायनी को; विद्महे — हम जानते हैं; कन्याकुमारि — कन्याकुमारी (दुर्गा) का; धीमहि — हम ध्यान करते हैं; तन्नो दुर्गिः प्रचोदयात् — वे दुर्गा हमें प्रेरित करें। पूरे मंत्र का भाव यह है: हम कात्यायनी को जानते हैं और कन्याकुमारी का ध्यान करते हैं; वे दुर्गा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें।
यह गायत्री मंत्र है, जिसमें स्वर तथा छंद का भी विधान होता है। परंपरा में ऐसे मंत्रों को गुरु के मुख से शुद्ध उच्चारण सहित सीखना श्रेष्ठ कहा जाता है। श्रद्धापूर्वक श्रवण तथा भावपूर्ण पाठ पर रोक नहीं बताई जाती।
"कात्यायन्यै", "विद्-म-हे", "कन्या-कुमारि", "धी-म-हि" स्पष्ट बोलें। "धीमहि" में "धी" दीर्घ; "प्रचोदयात्" का "त्" हल्का हलन्त। परंपरा में मंत्र-जप में शुद्ध उच्चारण का विशेष महत्व कहा जाता है, इसलिए आरंभ में धीरे-धीरे व स्पष्ट बोलकर अभ्यास करें और गति बाद में बढ़ाएँ।
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