durgā gāyatrī mantra
Durga Gayatri Mantra
माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।
स्रोत: पारंपरिक दुर्गा गायत्री (गायत्री छंद)
ॐ कात्यायन्यै च विद्महे कन्याकुमारि च धीमहि। तन्नो दुर्गिः प्रचोदयात्॥
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oṃ kātyāyanyai ca vidmahe kanyākumāri ca dhīmahi | tanno durgiḥ pracodayāt ||
Om Katyayanyai Cha Vidmahe Kanyakumari Cha Dhimahi, Tanno Durgih Prachodayat.
उच्चारण मार्गदर्शन: "कात्यायन्यै", "विद्-म-हे", "कन्या-कुमारि", "धी-म-हि" स्पष्ट बोलें। "धीमहि" में "धी" दीर्घ; "प्रचोदयात्" का "त्" हल्का हलन्त।
जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।
माला: रुद्राक्ष या स्फटिक माला
उत्तम समय: प्रातः, संध्या व नवरात्रि
देवी दुर्गा का ध्यान करते हुए रुद्राक्ष या स्फटिक माला से 108 बार जप करें। नवरात्रि में जप विशेष फलदायी होता है।
Goddess Durga
मंत्र
आरती
चालीसा
प्रतिपदा–नवमी
आरती, चालीसा, मंत्र, स्तोत्र, अष्टकम, सहस्रनाम और अन्य भक्ति पाठ