श्री काली माता आरती
śrī kālī mātā āratī
Kali Mata Aarti (Jai Kali Mata)
परिचय
माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।
स्रोत: पारंपरिक काली माता आरती
उद्भव / पृष्ठभूमि
माँ काली आदिशक्ति का उग्र व संहारक स्वरूप हैं, जो भय, शत्रु व नकारात्मक शक्तियों का नाश कर भक्तों की रक्षा करती हैं। यह आरती काली पूजा, अमावस्या व नवरात्रि में गाई जाती है।
आरती (लिरिक्स)
जय काली माता, मैया जय काली माता। तेरे ही गुण गावें, सब जग सुखदाता॥
हे काली माता, आपकी जय हो! सारा जगत आपके ही गुण गाता है; आप सबको सुख देने वाली हैं।
खड्ग खप्पर धारिणि, मुण्डमाल शोभे। रक्तबीज संहारिणि, रूप निरख मोहे॥
हाथों में खड्ग व खप्पर धारण किए, मुण्डमाला से सुशोभित; रक्तबीज दैत्य का संहार करने वाली — आपका रूप देखकर मन मोहित हो जाता है।
शुम्भ-निशुम्भ विनाशिनि, चण्ड-मुण्ड हारी। महिषासुर मर्दिनि, तू शक्ति महतारी॥
शुम्भ-निशुम्भ का नाश करने वाली, चण्ड-मुण्ड का संहार करने वाली; महिषासुर का मर्दन करने वाली — आप ही महान शक्ति-स्वरूपा माता हैं।
भक्तन की रक्षा हित, उग्र रूप धारा। दुष्ट दलन करके माँ, भय सबका हारा॥
भक्तों की रक्षा के लिए आपने उग्र रूप धारण किया; दुष्टों का दमन करके आपने सबका भय हर लिया।
काली माँ की आरती, जो जन नित गावे। भय संकट सब मिटते, अभय पद पावे॥
जो भक्त नित्य काली माँ की यह आरती गाता है, उसके समस्त भय व संकट मिट जाते हैं और वह अभय पद प्राप्त करता है।
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अर्थ (हिन्दी)
- हे काली माता, आपकी जय हो! सारा जगत आपके ही गुण गाता है; आप सबको सुख देने वाली हैं।
- हाथों में खड्ग व खप्पर धारण किए, मुण्डमाला से सुशोभित; रक्तबीज दैत्य का संहार करने वाली — आपका रूप देखकर मन मोहित हो जाता है।
- शुम्भ-निशुम्भ का नाश करने वाली, चण्ड-मुण्ड का संहार करने वाली; महिषासुर का मर्दन करने वाली — आप ही महान शक्ति-स्वरूपा माता हैं।
- भक्तों की रक्षा के लिए आपने उग्र रूप धारण किया; दुष्टों का दमन करके आपने सबका भय हर लिया।
- जो भक्त नित्य काली माँ की यह आरती गाता है, उसके समस्त भय व संकट मिट जाते हैं और वह अभय पद प्राप्त करता है।
लाभ
- भय, शत्रु व नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है।
- संकट व विपत्ति का शीघ्र नाश होता है।
- साहस, निर्भयता व आत्मबल में वृद्धि होती है।
कब करें पाठ
पाठ विधि
माँ काली के समक्ष लाल/गुड़हल के पुष्प व दीप अर्पित करें, "ॐ क्रीं कालिकायै नमः" का स्मरण करते हुए आरती गाएँ। रात्रि व अमावस्या को पूजा विशेष प्रभावी मानी जाती है।
प्रामाणिकता व स्रोत
देव परिचय
माँ दुर्गा
Goddess Durga
माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।
