श्री वैष्णो देवी आरती

śrī vaiṣṇo devī āratī

Vaishno Devi Aarti (Jai Vaishnavi Mata)

समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
8
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
नवरात्रि; वैष्णो देवी यात्रा के समय
उद्देश्य:रक्षा (Protection)मनोकामना (Wish fulfilment)भक्ति (Devotion)
✓ संपूर्ण

"जय वैष्णवी माता, मैया जय वैष्णवी माता, हाथ जोड़ तेरे आगे आरती मैं गाता" वैष्णो देवी की प्रचलित आरती है। इसके आठ पद हैं, जो माँ के भवन का दृश्य रचते हैं — सुंदर गुफा, भवन पर झूलते झंडे, ऊँचा पर्वत — और अंत में छाप है: "कहते सेवक ध्यानू, सुख सम्पत्ति पावे"।

परिचय

माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।

स्रोत: "जय वैष्णवी माता, मैया जय वैष्णवी माता" — परंपरागत आरती; छाप "सेवक ध्यानू"

एक नज़र में

मंत्र / पाठश्री वैष्णो देवी आरती
IASTśrī vaiṣṇo devī āratī
देवतामाँ दुर्गा
मूल स्रोत"जय वैष्णवी माता, मैया जय वैष्णवी माता" — परंपरागत आरती; छाप "सेवक ध्यानू"
शुभ दिननवरात्रि; वैष्णो देवी यात्रा के समय
पाठ समय3 मिनट
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

यह आरती वैष्णो देवी के भवन की यात्रा जैसी है — पर्वत, गुफा, झंडे, घंटे और भेंट।

माँ का रूप (पद 2–3). सिर पर छत्र, प्यारी मूरत, चरणों में बहती गंगा और न्यारी ज्योति; ब्रह्मा द्वार पर वेद पढ़ते हैं, शंकर ध्यान धरते हैं, सेवक चँवर डुलाते हैं और नारद नृत्य करते हैं।

गुफा और भवन (पद 4–5). "सुन्दर गुफा तुम्हारी, मन को अति भावे; बार-बार देखन को, ऐ माँ मन चावे" — गुफा को बार-बार देखने को मन करता है; भवन पर झंडे झूलते हैं, घंटे बजते हैं, और ऊँचा पर्वत माँ को प्रिय है।

भेंट और फल (पद 6–7). पान, सुपारी, ध्वजा, नारियल, फूल और मेवा की भेंट; और "जो जन निश्चय करके, द्वार तेरे आवे; उसकी इच्छा पूरण, माता हो जावे"।

छाप (पद 8). "कहते सेवक ध्यानू, सुख सम्पत्ति पावे"।

आरती (लिरिक्स)

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जय वैष्णवी माता, मैया जय वैष्णवी माता। हाथ जोड़ तेरे आगे, आरती मैं गाता॥

हे वैष्णवी माता, हे मैया, तेरी जय हो! मैं हाथ जोड़कर तेरे आगे आरती गाता हूँ।

शीश पे छत्र विराजे, मूरतिया प्यारी। गंगा बहती चरनन, ज्योति जगे न्यारी॥

सिर पर छत्र विराजता है, तेरी मूरत प्यारी है; चरणों में गंगा बहती है और अनोखी ज्योति जगती है।

ब्रह्मा वेद पढ़े नित द्वारे, शंकर ध्यान धरे। सेवक चंवर डुलावत, नारद नृत्य करे॥

ब्रह्मा नित्य तेरे द्वार पर वेद पढ़ते हैं, शंकर ध्यान धरते हैं; सेवक चँवर डुलाते हैं और नारद नृत्य करते हैं।

सुन्दर गुफा तुम्हारी, मन को अति भावे। बार-बार देखन को, ऐ माँ मन चावे॥

हे माँ, तेरी सुंदर गुफा मन को बहुत भाती है; उसे बार-बार देखने को मन चाहता है।

भवन पे झण्डे झूलें, घंटा ध्वनि बाजे। ऊँचा पर्वत तेरा, माता प्रिय लागे॥

भवन पर झंडे झूलते हैं, घंटों की ध्वनि बजती है; हे माता, तेरा ऊँचा पर्वत बहुत प्रिय लगता है।

पान सुपारी ध्वजा नारियल, भेंट पुष्प मेवा। दास खड़े चरणों में, दर्शन दो देवा॥

पान, सुपारी, ध्वजा, नारियल, फूल और मेवा की भेंट है; दास तेरे चरणों में खड़े हैं — हे देवी, दर्शन दो।

जो जन निश्चय करके, द्वार तेरे आवे। उसकी इच्छा पूरण, माता हो जावे॥

जो जन निश्चय करके तेरे द्वार आता है, हे माता, उसकी इच्छा पूरी हो जाती है।

इतनी स्तुति निश-दिन, जो नर भी गावे। कहते सेवक ध्यानू, सुख सम्पत्ति पावे॥

जो मनुष्य दिन-रात यह स्तुति गाता है — सेवक ध्यानू कहते हैं — वह सुख और संपत्ति पाता है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे वैष्णवी माता, हे मैया, तेरी जय हो! मैं हाथ जोड़कर तेरे आगे आरती गाता हूँ।
  2. सिर पर छत्र विराजता है, तेरी मूरत प्यारी है; चरणों में गंगा बहती है और अनोखी ज्योति जगती है।
  3. ब्रह्मा नित्य तेरे द्वार पर वेद पढ़ते हैं, शंकर ध्यान धरते हैं; सेवक चँवर डुलाते हैं और नारद नृत्य करते हैं।
  4. हे माँ, तेरी सुंदर गुफा मन को बहुत भाती है; उसे बार-बार देखने को मन चाहता है।
  5. भवन पर झंडे झूलते हैं, घंटों की ध्वनि बजती है; हे माता, तेरा ऊँचा पर्वत बहुत प्रिय लगता है।
  6. पान, सुपारी, ध्वजा, नारियल, फूल और मेवा की भेंट है; दास तेरे चरणों में खड़े हैं — हे देवी, दर्शन दो।
  7. जो जन निश्चय करके तेरे द्वार आता है, हे माता, उसकी इच्छा पूरी हो जाती है।
  8. जो मनुष्य दिन-रात यह स्तुति गाता है — सेवक ध्यानू कहते हैं — वह सुख और संपत्ति पाता है।

लाभ

  • मनोकामना-पूर्ति — "जो जन निश्चय करके, द्वार तेरे आवे, उसकी इच्छा पूरण"।
  • वैष्णो देवी भवन और गुफा का ध्यान — आरती भवन का पूरा दृश्य रचती है।
  • फलश्रुति: सुख और संपत्ति।

कब करें पाठ

नवरात्रि मेंवैष्णो देवी यात्रा के समयमंगलवार और शुक्रवार को

पाठ विधि

माँ के समक्ष दीपक जलाएँ और पान, सुपारी, ध्वजा, नारियल, फूल और मेवा अर्पित करें — छठा पद यही भेंट गिनाता है। टेक "जय वैष्णवी माता, मैया जय वैष्णवी माता" हर पद के बाद दोहराएँ।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराdrikpanchang.com — आरती श्री वैष्णो देवी (आधार-पाठ) · bhaktibharat.com — आरती: माता वैष्णो देवी · dharmsaar.com — वैष्णो माता आरती
रचयितासेवक ध्यानू (अंतिम पद की छाप)
अंतिम अद्यतनसितंबर 2026

यह भी देखें

देव परिचय

माँ दुर्गा

Goddess Durga

माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।

देवता वर्गशक्ति · रक्षा · विजय · साहस
वाहनसिंह
मुख्य मंत्रॐ दुं दुर्गायै नमः
सभी पाठ देखें

श्री वैष्णो देवी आरती — सामान्य प्रश्न

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