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लिपि:
॥ श्री ॥

श्री वैष्णो देवी आरती

आरती · माँ दुर्गा

पाठ

1

जय वैष्णवी माता, मैया जय वैष्णवी माता। हाथ जोड़ तेरे आगे, आरती मैं गाता॥

2

शीश पे छत्र विराजे, मूरतिया प्यारी। गंगा बहती चरनन, ज्योति जगे न्यारी॥

3

ब्रह्मा वेद पढ़े नित द्वारे, शंकर ध्यान धरे। सेवक चंवर डुलावत, नारद नृत्य करे॥

4

सुन्दर गुफा तुम्हारी, मन को अति भावे। बार-बार देखन को, ऐ माँ मन चावे॥

5

भवन पे झण्डे झूलें, घंटा ध्वनि बाजे। ऊँचा पर्वत तेरा, माता प्रिय लागे॥

6

पान सुपारी ध्वजा नारियल, भेंट पुष्प मेवा। दास खड़े चरणों में, दर्शन दो देवा॥

7

जो जन निश्चय करके, द्वार तेरे आवे। उसकी इच्छा पूरण, माता हो जावे॥

8

इतनी स्तुति निश-दिन, जो नर भी गावे। कहते सेवक ध्यानू, सुख सम्पत्ति पावे॥

अर्थ (हिन्दी)

  1. हे वैष्णवी माता, हे मैया, तेरी जय हो! मैं हाथ जोड़कर तेरे आगे आरती गाता हूँ।
  2. सिर पर छत्र विराजता है, तेरी मूरत प्यारी है; चरणों में गंगा बहती है और अनोखी ज्योति जगती है।
  3. ब्रह्मा नित्य तेरे द्वार पर वेद पढ़ते हैं, शंकर ध्यान धरते हैं; सेवक चँवर डुलाते हैं और नारद नृत्य करते हैं।
  4. हे माँ, तेरी सुंदर गुफा मन को बहुत भाती है; उसे बार-बार देखने को मन चाहता है।
  5. भवन पर झंडे झूलते हैं, घंटों की ध्वनि बजती है; हे माता, तेरा ऊँचा पर्वत बहुत प्रिय लगता है।
  6. पान, सुपारी, ध्वजा, नारियल, फूल और मेवा की भेंट है; दास तेरे चरणों में खड़े हैं — हे देवी, दर्शन दो।
  7. जो जन निश्चय करके तेरे द्वार आता है, हे माता, उसकी इच्छा पूरी हो जाती है।
  8. जो मनुष्य दिन-रात यह स्तुति गाता है — सेवक ध्यानू कहते हैं — वह सुख और संपत्ति पाता है।

लाभ

  • मनोकामना-पूर्ति — "जो जन निश्चय करके, द्वार तेरे आवे, उसकी इच्छा पूरण"।
  • वैष्णो देवी भवन और गुफा का ध्यान — आरती भवन का पूरा दृश्य रचती है।
  • फलश्रुति: सुख और संपत्ति।

कब करें पाठ

नवरात्रि में · वैष्णो देवी यात्रा के समय · मंगलवार और शुक्रवार को

स्रोत

रचयिता: सेवक ध्यानू (अंतिम पद की छाप). drikpanchang.com — आरती श्री वैष्णो देवी (आधार-पाठ) · bhaktibharat.com — आरती: माता वैष्णो देवी · dharmsaar.com — वैष्णो माता आरती

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