sarvamaṅgalamāṅgalye
Sarva Mangala Mantra
माँ दुर्गा आदिशक्ति का स्वरूप हैं — दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक।
स्रोत: दुर्गा सप्तशती (देवी स्तुति श्लोक)
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
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sarvamaṅgalamāṅgalye śive sarvārthasādhike | śaraṇye tryambake gauri nārāyaṇi namo'stu te ||
Sarva-mangala-mangalye Shive Sarvartha-sadhike, Sharanye Tryambake Gauri Narayani Namostu Te.
उच्चारण मार्गदर्शन: "सर्व-मङ्गल-माङ्गल्ये", "शिवे", "सर्वार्थ-साधिके", "त्र्यम्बके", "गौरि", "नारायणि" को स्पष्ट रुककर बोलें। भक्तिभाव से पढ़ें।
जप संख्या: प्रतिदिन 11 बार (एक माला)।
माला: आवश्यक नहीं (स्तुति पाठ)
उत्तम समय: प्रातः, संध्या व नवरात्रि
देवी दुर्गा के समक्ष यह स्तुति श्रद्धापूर्वक पढ़ें; प्रायः दुर्गा पूजा/सप्तशती पाठ के समापन में इसका पाठ किया जाता है। नवरात्रि में विशेष फलदायी।
Goddess Durga
मंत्र
आरती
चालीसा
प्रतिपदा–नवमी
आरती, चालीसा, मंत्र, स्तोत्र, अष्टकम, सहस्रनाम और अन्य भक्ति पाठ