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लिपि:
॥ श्री ॥

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये

मंत्र · माँ दुर्गा

पाठ

1

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

अर्थ (हिन्दी)

  1. हे समस्त मंगलों की मंगल-स्वरूपा, कल्याणी, सब प्रयोजन सिद्ध करने वाली, शरण देने वाली, त्रिनेत्रा गौरी, नारायणी देवी! आपको नमस्कार है।

लाभ

  • जीवन में मंगल व शुभता का संचार होता है।
  • भय व बाधाओं से रक्षा होकर कार्य सिद्ध होते हैं।
  • मन को शांति व देवी-कृपा प्राप्त होती है।

कब करें पाठ

नवरात्रि में · मंगलवार व शुक्रवार को · पूजा के समापन व शुभ कार्य में

स्रोत

दुर्गा सप्तशती — देवी स्तुति

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