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लिपि:
॥ श्री ॥

श्री पार्वती माता आरती

आरती · माँ दुर्गा

पाठ

1

जय पार्वती माता, जय पार्वती माता। ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता॥

2

अरिकुल पद्म विनाशिनि, जय सेवक त्राता। जग जीवन जगदम्बा, हरिहर गुण गाता॥

3

सिंह को वाहन साजे, कुण्डल हैं साथा। देव वधू जस गावत, नृत्य करत ताथा॥

4

सतयुग रूपशील अतिसुन्दर, नाम सती कहलाता। हेमांचल घर जन्मी, सखियन संग राता॥

5

शुम्भ निशुम्भ विदारे, हेमांचल स्थाता। सहस्र भुजा तनु धरि के, चक्र लियो हाथा॥

6

सृष्टि रूप तुही है जननी शिवसंग रंगराता। नन्दी भृंगी बीन लही सारा जग मदमाता॥

7

देवन अरज करत हम चित को लाता। गावत दे दे ताली, मन में रंगराता॥

8

श्री प्रताप आरती मैया की, जो कोई गाता। सदासुखी नित रहता सुख सम्पत्ति पाता॥

अर्थ (हिन्दी)

  1. हे पार्वती माता, आपकी जय हो, जय हो! आप सनातन ब्रह्म-स्वरूपा देवी हैं और शुभ फल देने वाली हैं।
  2. आप शत्रुओं के कुल का नाश करने वाली और सेवकों की रक्षा करने वाली हैं, आपकी जय हो; आप जगत का जीवन हैं, जगदम्बा हैं — हरि और हर आपके गुण गाते हैं।
  3. सिंह आपके वाहन के रूप में सजा है, कानों में कुंडल हैं; देवताओं की पत्नियाँ आपका यश गाती हैं और ताल पर नृत्य करती हैं।
  4. सतयुग में आप रूप और शील से अत्यंत सुंदर थीं, और आपका नाम सती कहलाया; (फिर) आपने हेमांचल (हिमालय) के घर जन्म लिया और सखियों के संग खेलीं।
  5. आपने शुम्भ और निशुम्भ को चीर डाला, आप हिमालय पर निवास करती हैं; हज़ार भुजाओं वाला शरीर धारण करके आपने हाथ में चक्र लिया।
  6. हे जननी, सृष्टि का रूप आप ही हैं, और आप शिव के संग (प्रेम के) रंग में रंगी हैं; नंदी और भृंगी ने वीणा ली है, और सारा जगत आनंद में मग्न है।
  7. देवता विनती करते हैं, और हम अपना चित्त (आपमें) लगाते हैं; ताली दे-देकर गाते हैं, और मन आपके रंग में रँग जाता है।
  8. मैया की यह प्रतापमयी आरती जो कोई गाता है, वह सदा सुखी रहता है और सुख-संपत्ति पाता है।

लाभ

  • सौभाग्य और गृहस्थ-सुख की कामना — पार्वती शिव की अर्धांगिनी के रूप में पूजी जाती हैं (पद 6)।
  • शत्रु और संकट से रक्षा — "अरिकुल पद्म विनाशिनि, जय सेवक त्राता"।
  • फलश्रुति: आरती गाने वाला सदा सुखी रहता है और सुख-संपत्ति पाता है।

कब करें पाठ

हरतालिका तीज और गणगौर पर · सोमवार को शिव-पार्वती पूजन में · नवरात्रि में

स्रोत

रचयिता: अज्ञात (किसी प्रति में नाम नहीं). drikpanchang.com — श्री पार्वती माता की आरती (आधार-पाठ) · bhaktitak.com — श्री पार्वती जी की आरती · aartisandhya.com — पार्वती माता की आरती

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