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लिपि:
॥ श्री ॥

श्री पार्वती माता आरती

आरती · माँ दुर्गा

पाठ

1

जय पार्वती माता, मैया जय पार्वती माता। ब्रह्मा सनातन देवी, शुभ फल की दाता॥

2

अरिकुल-पद्म-विनाशिनि, जय सेवक त्राता। जग-जीवन-जग-जननी, हर-अर्द्धांगी माता॥

3

गौरी उमा शिवानी, नाम अनेक धरे। हिमगिरि की तुम बेटी, शिव संग शोभा भरे॥

4

सुहाग-सौभाग्य देती, व्रत से तुम रीझो। भक्तन के दुख हरती, मनोरथ सब सीझो॥

5

पार्वती माँ की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। सुख-सौभाग्य बढ़ावे, मनवांछित फल पावे॥

अर्थ (हिन्दी)

  1. हे पार्वती माता, आपकी जय हो! आप सनातन देवी तथा शुभ फल प्रदान करने वाली हैं।
  2. शत्रुओं के समूह का नाश करने वाली, सेवकों की रक्षिका; आप जगत की जीवनदायिनी जननी तथा शिव (हर) की अर्द्धांगिनी हैं।
  3. आप गौरी, उमा, शिवानी आदि अनेक नाम धारण करती हैं; आप हिमालय की पुत्री हैं और शिव के संग शोभा बढ़ाती हैं।
  4. आप सुहाग व सौभाग्य देती हैं तथा व्रत से प्रसन्न होती हैं; आप भक्तों के दुःख हरती हैं और उनके सब मनोरथ पूर्ण करती हैं।
  5. जो भक्त श्रद्धा से पार्वती माँ की यह आरती गाता है, उसका सुख-सौभाग्य बढ़ता है और वह मनोवांछित फल पाता है।

लाभ

  • सौभाग्य, दाम्पत्य-सुख व सुहाग की रक्षा होती है।
  • मनोकामना पूर्ण होकर घर में सुख-शांति आती है।
  • भक्ति, धैर्य व आध्यात्मिक उन्नति बढ़ती है।

कब करें पाठ

सोमवार व मंगलवार को · नवरात्रि में · हरतालिका तीज व गणगौर पर

स्रोत

रचयिता: पारंपरिक. पारंपरिक हिन्दू आरती संग्रह

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