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लिपि:
॥ श्री ॥

ललिता सहस्रनाम

सहस्रनाम · माँ दुर्गा

पाठ

॥ ध्यानम् ॥ अरुणां करुणातरङ्गिताक्षीं धृतपाशाङ्कुशपुष्पबाणचापाम्। अणिमादिभिरावृतां मयूखैरहमित्येव विभावये भवानीम्॥

प्रथम शतक (नाम 1–100)

  1. श्रीमाता — समस्त सृष्टि की पावन माता
  2. श्रीमहाराज्ञी — ब्रह्मांड की महारानी
  3. श्रीमत्सिंहासनेश्वरी — दिव्य सिंहासन की स्वामिनी
  4. चिदग्निकुण्डसम्भूता — चित् रूपी अग्निकुंड से प्रकट
  5. देवकार्यसमुद्यता — देवों के कार्य हेतु उद्यत
  6. उद्यद्भानुसहस्राभा — सहस्र उदित सूर्यों-सी आभा वाली
  7. चतुर्बाहुसमन्विता — चार भुजाओं से युक्त
  8. रागस्वरूपपाशाढ्या — राग रूपी पाश धारण करने वाली
  9. क्रोधाकाराङ्कुशोज्ज्वला — क्रोध रूपी अंकुश से उज्ज्वल
  10. मनोरूपेक्षुकोदण्डा — मन रूपी इक्षु-धनुष धारण करने वाली
  11. पञ्चतन्मात्रसायका — पंच तन्मात्र रूपी बाण वाली
  12. निजारुणप्रभापूरमज्जद्ब्रह्माण्डमण्डला — अपनी अरुण प्रभा में ब्रह्मांड डुबो देने वाली
  13. चम्पकाशोकपुन्नागसौगन्धिकलसत्कचा — चंपा-अशोक-पुन्नाग-सौगंधिक पुष्पों से सुशोभित केश वाली
  14. कुरुविन्दमणिश्रेणीकनत्कोटीरमण्डिता — कुरुविंद मणियों के मुकुट से मंडित
  15. अष्टमीचन्द्रविभ्राजदलिकस्थलशोभिता — अष्टमी-चंद्र सम भाल-स्थल से शोभित
  16. मुखचन्द्रकलङ्काभमृगनाभिविशेषका — मुख-चंद्र पर कस्तूरी-तिलक वाली
  17. वदनस्मरमाङ्गल्यगृहतोरणचिल्लिका — मुख रूपी मंगल-गृह के तोरण सदृश भौंहों वाली
  18. वक्त्रलक्ष्मीपरीवाहचलन्मीनाभलोचना — मुख-शोभा में चंचल मीन सदृश नेत्रों वाली
  19. नवचम्पकपुष्पाभनासादण्डविराजिता — नवचंपा-पुष्प सम नासिका वाली
  20. ताराकान्तितिरस्कारिनासाभरणभासुरा — तारों की कांति को मात देते नासा-आभरण वाली
  21. कदम्बमञ्जरीक्लृप्तकर्णपूरमनोहरा — कदंब-मंजरी के कर्णफूल से मनोहर
  22. ताटङ्कयुगलीभूततपनोडुपमण्डला — सूर्य-चंद्र रूपी कर्णभूषण-युगल वाली
  23. पद्मरागशिलादर्शपरिभाविकपोलभूः — पद्मराग-दर्पण सम कपोलों वाली
  24. नवविद्रुमबिम्बश्रीन्यक्कारिरदनच्छदा — मूँगा-बिंब को मात देते अधरों वाली
  25. शुद्धविद्याङ्कुराकारद्विजपङ्क्तिद्वयोज्ज्वला — शुद्ध विद्या-अंकुर सम दंत-पंक्तियों वाली
  26. कर्पूरवीटिकामोदसमाकर्षद्दिगन्तरा — कर्पूर-ताम्बूल सुगंध से दिशाओं को आकर्षित करने वाली
  27. निजसल्लापमाधुर्यविनिर्भर्त्सितकच्छपी — अपनी मधुर वाणी से वीणा को लज्जित करने वाली
  28. मन्दस्मितप्रभापूरमज्जत्कामेशमानसा — मंद-स्मित प्रभा में कामेश्वर का मन डुबो देने वाली
  29. अनाकलितसादृश्यचिबुकश्रीविराजिता — अनुपम चिबुक-शोभा से विराजित
  30. कामेशबद्धमाङ्गल्यसूत्रशोभितकन्धरा — कामेश्वर द्वारा बँधे मंगल-सूत्र से शोभित ग्रीवा वाली
  31. कनकाङ्गदकेयूरकमनीयभुजान्विता — स्वर्ण-बाजूबंद से सुंदर भुजाओं वाली
  32. रत्नग्रैवेयचिन्ताकलोलमुक्ताफलान्विता — रत्न-हार व मुक्ता-फलों से युक्त
  33. कामेश्वरप्रेमरत्नमणिप्रतिपणस्तनी — कामेश्वर-प्रेम-रत्न के बदले स्तन देने वाली
  34. नाभ्यालवालरोमालिलताफलकुचद्वयी — नाभि-वाटिका की रोमावली-लता व कुच-फल वाली
  35. लक्ष्यरोमलताधारतासमुन्नेयमध्यमा — सूक्ष्म रोम-लता से अनुमेय मध्यभाग वाली
  36. स्तनभारदलन्मध्यपट्टबन्धवलित्रया — स्तन-भार से क्षीण मध्य की त्रिवली वाली
  37. अरुणारुणकौसुम्भवस्त्रभास्वत्कटीतटी — अरुण कुसुंभी वस्त्र से दीप्त कटि-प्रदेश वाली
  38. रत्नकिङ्किणिकारम्यरशनादामभूषिता — रत्न-घुँघरूदार करधनी से भूषित
  39. कामेशज्ञातसौभाग्यमार्दवोरुद्वयान्विता — कामेश्वर-ज्ञात कोमल ऊरु-युगल वाली
  40. माणिक्यमुकुटाकारजानुद्वयविराजिता — माणिक्य-मुकुट सम जानुओं वाली
  41. इन्द्रगोपपरिक्षिप्तस्मरतूणाभजङ्घिका — इंद्रगोप-जटित काम-तूणीर सम जंघाओं वाली
  42. गूढगुल्फा — गूढ़ (अप्रकट) गुल्फों वाली
  43. कूर्मपृष्ठजयिष्णुप्रपदान्विता — कच्छप-पृष्ठ को जीतते चरण-अग्र वाली
  44. नखदीधितिसञ्छन्ननमज्जनतमोगुणा — नख-कांति से नत भक्तों का तमोगुण हरने वाली
  45. पदद्वयप्रभाजालपराकृतसरोरुहा — चरण-कांति से कमलों को मात देने वाली
  46. शिञ्जानमणिमञ्जीरमण्डितश्रीपदाम्बुजा — मणि-नूपुर से मंडित श्रीचरण-कमल वाली
  47. मरालीमन्दगमना — हंसिनी सम मंद गति वाली
  48. महालावण्यशेवधिः — महान लावण्य के कोश रूप
  49. सर्वारुणा — सर्वथा अरुण वर्ण वाली
  50. अनवद्याङ्गी — निर्दोष अंगों वाली
  51. सर्वाभरणभूषिता — समस्त आभूषणों से भूषित
  52. शिवकामेश्वराङ्कस्था — शिव-कामेश्वर की गोद में स्थित
  53. शिवा — कल्याणकारिणी
  54. स्वाधीनवल्लभा — जिनके वल्लभ (शिव) स्वाधीन हैं
  55. सुमेरुमध्यशृङ्गस्था — सुमेरु के मध्य शिखर पर स्थित
  56. श्रीमन्नगरनायिका — श्रीनगर (श्रीचक्र) की नायिका
  57. चिन्तामणिगृहान्तस्था — चिंतामणि-गृह में स्थित
  58. पञ्चब्रह्मासनस्थिता — पंच-ब्रह्म रूपी आसन पर स्थित
  59. महापद्माटवीसंस्था — महापद्म-वन में स्थित
  60. कदम्बवनवासिनी — कदंब-वन में निवास करने वाली
  61. सुधासागरमध्यस्था — अमृत-सागर के मध्य स्थित
  62. कामाक्षी — काम (इच्छा) पूर्ण करने वाले नेत्रों वाली
  63. कामदायिनी — कामनाएँ पूर्ण करने वाली
  64. देवर्षिगणसङ्घातस्तूयमानात्मवैभवा — देव-ऋषिगणों द्वारा स्तुत वैभव वाली
  65. भण्डासुरवधोद्युक्तशक्तिसेनासमन्विता — भण्डासुर-वध हेतु शक्ति-सेना से युक्त
  66. सम्पत्करीसमारूढसिन्धुरव्रजसेविता — संपत्करी पर आरूढ़ गज-समूह से सेवित
  67. अश्वारूढाधिष्ठिताश्वकोटिकोटिभिरावृता — अश्वारूढा सहित करोड़ों अश्वों से घिरी
  68. चक्रराजरथारूढसर्वायुधपरिष्कृता — चक्रराज-रथ पर आरूढ़ व सर्वायुध सज्जित
  69. गेयचक्ररथारूढमन्त्रिणीपरिसेविता — गेयचक्र-रथ पर मंत्रिणी (श्यामला) से सेवित
  70. किरिचक्ररथारूढदण्डनाथापुरस्कृता — किरिचक्र-रथ पर दण्डनाथा (वाराही) से युक्त
  71. ज्वालामालिनिकाक्षिप्तवह्निप्राकारमध्यगा — ज्वालामालिनी रचित अग्नि-प्राकार के मध्य स्थित
  72. भण्डसैन्यवधोद्युक्तशक्तिविक्रमहर्षिता — भण्ड-सैन्य वध में शक्तियों के पराक्रम से हर्षित
  73. नित्यापराक्रमाटोपनिरीक्षणसमुत्सुका — नित्या-शक्तियों के पराक्रम देखने को उत्सुक
  74. भण्डपुत्रवधोद्युक्तबालाविक्रमनन्दिता — भण्ड-पुत्रों के वध में बाला के पराक्रम से प्रसन्न
  75. मन्त्रिण्यम्बाविरचितविषङ्गवधतोषिता — मंत्रिणी-अम्बा द्वारा विषंग-वध से संतुष्ट
  76. विशुक्रप्राणहरणवाराहीवीर्यनन्दिता — वाराही द्वारा विशुक्र-वध से प्रसन्न
  77. कामेश्वरमुखालोककल्पितश्रीगणेश्वरा — कामेश्वर के मुख-दर्शन से गणेश को प्रकट करने वाली
  78. महागणेशनिर्भिन्नविघ्नयन्त्रप्रहर्षिता — महागणेश द्वारा विघ्न-यंत्र भंजन से हर्षित
  79. भण्डासुरेन्द्रनिर्मुक्तशस्त्रप्रत्यस्त्रवर्षिणी — भण्डासुर के शस्त्रों पर प्रत्यस्त्र बरसाने वाली
  80. कराङ्गुलिनखोत्पन्ननारायणदशाकृतिः — कर-अंगुलि-नखों से दश नारायण-अवतार प्रकट करने वाली
  81. महापाशुपतास्त्राग्निनिर्दग्धासुरसैनिका — महापाशुपतास्त्र-अग्नि से असुर-सैन्य भस्म करने वाली
  82. कामेश्वरास्त्रनिर्दग्धसभण्डासुरशून्यका — कामेश्वरास्त्र से भण्डासुर-सहित नगर शून्य करने वाली
  83. ब्रह्मोपेन्द्रमहेन्द्रादिदेवसंस्तुतवैभवा — ब्रह्मा-विष्णु-इंद्र आदि देवों से स्तुत वैभव वाली
  84. हरनेत्राग्निसन्दग्धकामसञ्जीवनौषधिः — शिव-नेत्राग्नि से दग्ध काम को जिलाने वाली औषधि रूप
  85. श्रीमद्वाग्भवकूटैकस्वरूपमुखपङ्कजा — श्रीविद्या के वाग्भव-कूट रूपी मुख-कमल वाली
  86. कण्ठाधःकटिपर्यन्तमध्यकूटस्वरूपिणी — कंठ से कटि तक मध्य-कूट स्वरूपा
  87. शक्तिकूटैकतापन्नकट्यधोभागधारिणी — शक्ति-कूट रूपी कटि-अधोभाग धारिणी
  88. मूलमन्त्रात्मिका — मूल-मंत्र स्वरूपा
  89. मूलकूटत्रयकलेवरा — तीन कूटों रूपी कलेवर वाली
  90. कुलामृतैकरसिका — कुल-अमृत की एकमात्र रसिका
  91. कुलसङ्केतपालिनी — कुल-संकेतों की रक्षक
  92. कुलाङ्गना — कुल-अंगना (कुलीन नारी) रूप
  93. कुलान्तस्था — कुल के भीतर स्थित
  94. कौलिनी — कौल-मार्ग की देवी
  95. कुलयोगिनी — कुल-योगिनी
  96. अकुला — कुल से परे
  97. समयान्तस्था — समयाचार में स्थित
  98. समयाचारतत्परा — समयाचार में तत्पर
  99. मूलाधारैकनिलया — मूलाधार में एकमात्र निवास करने वाली
  100. ब्रह्मग्रन्थिविभेदिनी — ब्रह्म-ग्रंथि का भेदन करने वाली

द्वितीय शतक (नाम 101–200)

  1. मणिपूरान्तरुदिता — मणिपूर चक्र में उदित
  2. विष्णुग्रन्थिविभेदिनी — विष्णु-ग्रंथि का भेदन करने वाली
  3. आज्ञाचक्रान्तरालस्था — आज्ञा-चक्र के भीतर स्थित
  4. रुद्रग्रन्थिविभेदिनी — रुद्र-ग्रंथि का भेदन करने वाली
  5. सहस्राराम्बुजारूढा — सहस्रार-कमल पर आरूढ़
  6. सुधासाराभिवर्षिणी — अमृत-धारा बरसाने वाली
  7. तटिल्लतासमरुचिः — विद्युत-लता सम कांति वाली
  8. षट्चक्रोपरिसंस्थिता — षट्चक्रों के ऊपर स्थित
  9. महाशक्तिः — महाशक्ति
  10. कुण्डलिनी — कुंडलिनी-शक्ति रूप
  11. बिसतन्तुतनीयसी — कमल-तंतु सम सूक्ष्म रूप
  12. भवानी — भव (शिव) की शक्ति
  13. भावनागम्या — भावना (ध्यान) से प्राप्य
  14. भवारण्यकुठारिका — संसार-वन के लिए कुठार रूप
  15. भद्रप्रिया — कल्याण की प्रेमी
  16. भद्रमूर्तिः — कल्याणमयी मूर्ति
  17. भक्तसौभाग्यदायिनी — भक्तों को सौभाग्य देने वाली
  18. भक्तिप्रिया — भक्ति की प्रेमी
  19. भक्तिगम्या — भक्ति से प्राप्य
  20. भक्तिवश्या — भक्ति के वश में होने वाली
  21. भयापहा — भय को दूर करने वाली
  22. शाम्भवी — शंभु (शिव) की शक्ति
  23. शारदाराध्या — शारदा द्वारा आराध्य
  24. शर्वाणी — शर्व (शिव) की पत्नी
  25. शर्मदायिनी — सुख प्रदान करने वाली
  26. शाङ्करी — शंकर की शक्ति
  27. श्रीकरी — श्री (शोभा) प्रदान करने वाली
  28. साध्वी — साध्वी (पतिव्रता)
  29. शरच्चन्द्रनिभानना — शरद्-चंद्र सम मुख वाली
  30. शातोदरी — कृश उदर वाली
  31. शान्तिमती — शांतिमयी
  32. निराधारा — आधार-रहित
  33. निरञ्जना — निर्मल (माया-रहित)
  34. निर्लेपा — निर्लिप्त
  35. निर्मला — निर्मल
  36. नित्या — नित्य (शाश्वत)
  37. निराकारा — निराकार
  38. निराकुला — व्याकुलता-रहित
  39. निर्गुणा — गुणों से परे
  40. निष्कला — कला-रहित (अखंड)
  41. शान्ता — शांत-स्वरूपा
  42. निष्कामा — कामना-रहित
  43. निरुपप्लवा — उपद्रव-रहित (अविनाशी)
  44. नित्यमुक्ता — नित्य मुक्त
  45. निर्विकारा — विकार-रहित
  46. निष्प्रपञ्चा — प्रपंच-रहित
  47. निराश्रया — आश्रय-रहित (स्वयं आधार)
  48. नित्यशुद्धा — नित्य शुद्ध
  49. नित्यबुद्धा — नित्य बुद्ध (ज्ञानमयी)
  50. निरवद्या — निर्दोष
  51. निरन्तरा — अविच्छिन्न (सर्वव्यापी)
  52. निष्कारणा — कारण-रहित
  53. निष्कलङ्का — कलंक-रहित
  54. निरुपाधिः — उपाधि-रहित
  55. निरीश्वरा — जिनसे परे कोई ईश्वर नहीं
  56. नीरागा — राग-रहित
  57. रागमथनी — राग का मथन करने वाली
  58. निर्मदा — मद-रहित
  59. मदनाशिनी — मद का नाश करने वाली
  60. निश्चिन्ता — चिंता-रहित
  61. निरहङ्कारा — अहंकार-रहित
  62. निर्मोहा — मोह-रहित
  63. मोहनाशिनी — मोह का नाश करने वाली
  64. निर्ममा — ममता-रहित
  65. ममताहन्त्री — ममता का नाश करने वाली
  66. निष्पापा — पाप-रहित
  67. पापनाशिनी — पापों का नाश करने वाली
  68. निष्क्रोधा — क्रोध-रहित
  69. क्रोधशमनी — क्रोध का शमन करने वाली
  70. निर्लोभा — लोभ-रहित
  71. लोभनाशिनी — लोभ का नाश करने वाली
  72. निःसंशया — संशय-रहित
  73. संशयघ्नी — संशय का नाश करने वाली
  74. निर्भवा — जन्म-रहित
  75. भवनाशिनी — संसार (जन्म-मरण) का नाश करने वाली
  76. निर्विकल्पा — विकल्प-रहित
  77. निराबाधा — बाधा-रहित
  78. निर्भेदा — भेद-रहित
  79. भेदनाशिनी — भेद का नाश करने वाली
  80. निर्नाशा — नाश-रहित
  81. मृत्युमथनी — मृत्यु का मथन करने वाली
  82. निष्क्रिया — क्रिया-रहित
  83. निष्परिग्रहा — परिग्रह-रहित
  84. निस्तुला — अतुलनीय
  85. नीलचिकुरा — नील केश वाली
  86. निरपाया — अविनाशी
  87. निरत्यया — अनतिक्रमणीय
  88. दुर्लभा — दुर्लभ
  89. दुर्गमा — दुर्गम
  90. दुर्गा — दुर्गम संकट हरने वाली
  91. दुःखहन्त्री — दुःखों का नाश करने वाली
  92. सुखप्रदा — सुख प्रदान करने वाली
  93. दुष्टदूरा — दुष्टों से दूर
  94. दुराचारशमनी — दुराचार का शमन करने वाली
  95. दोषवर्जिता — दोष-रहित
  96. सर्वज्ञा — सर्वज्ञ
  97. सान्द्रकरुणा — सघन करुणा वाली
  98. समानाधिकवर्जिता — जिनके समान या अधिक कोई नहीं
  99. सर्वशक्तिमयी — समस्त शक्तियों से युक्त
  100. सर्वमङ्गला — सबका मंगल करने वाली

तृतीय शतक (नाम 201–300)

  1. सद्गतिप्रदा — सद्गति प्रदान करने वाली
  2. सर्वेश्वरी — सबकी ईश्वरी
  3. सर्वमयी — सर्व-स्वरूपा
  4. सर्वमन्त्रस्वरूपिणी — समस्त मंत्र-स्वरूपा
  5. सर्वयन्त्रात्मिका — समस्त यंत्र-स्वरूपा
  6. सर्वतन्त्ररूपा — समस्त तंत्र-स्वरूपा
  7. मनोन्मनी — उन्मनी (परम चेतना) रूप
  8. माहेश्वरी — महेश्वर की शक्ति
  9. महादेवी — महादेवी
  10. महालक्ष्मी — महालक्ष्मी रूप
  11. मृडप्रिया — मृड (शिव) की प्रिया
  12. महारूपा — महान रूप वाली
  13. महापूज्या — परम पूज्या
  14. महापातकनाशिनी — महापातकों का नाश करने वाली
  15. महामाया — महामाया
  16. महासत्त्वा — महान सत्त्व वाली
  17. महाशक्तिः — महाशक्ति
  18. महारतिः — महान आनंद-स्वरूपा
  19. महाभोगा — महान भोग-स्वरूपा
  20. महैश्वर्या — महान ऐश्वर्य वाली
  21. महावीर्या — महान वीर्य वाली
  22. महाबला — महान बल वाली
  23. महाबुद्धिः — महान बुद्धि वाली
  24. महासिद्धिः — महान सिद्धि रूप
  25. महायोगेश्वरेश्वरी — महायोगेश्वरों की ईश्वरी
  26. महातन्त्रा — महान तंत्र-स्वरूपा
  27. महामन्त्रा — महान मंत्र-स्वरूपा
  28. महायन्त्रा — महान यंत्र-स्वरूपा
  29. महासना — महान आसन वाली
  30. महायागक्रमाराध्या — महायाग-क्रम से आराध्य
  31. महाभैरवपूजिता — महाभैरव द्वारा पूजित
  32. महेश्वरमहाकल्पमहाताण्डवसाक्षिणी — महेश्वर के महाताण्डव की साक्षी
  33. महाकामेशमहिषी — महाकामेश्वर की पटरानी
  34. महात्रिपुरसुन्दरी — महान त्रिपुरसुंदरी
  35. चतुःषष्ट्युपचाराढ्या — चौंसठ उपचारों से पूजित
  36. चतुःषष्टिकलामयी — चौंसठ कलाओं से युक्त
  37. महाचतुःषष्टिकोटियोगिनीगणसेविता — चौंसठ कोटि योगिनीगणों से सेवित
  38. मनुविद्या — मनु-विद्या रूप
  39. चन्द्रविद्या — चंद्र-विद्या रूप
  40. चन्द्रमण्डलमध्यगा — चंद्र-मंडल के मध्य स्थित
  41. चारुरूपा — सुंदर रूप वाली
  42. चारुहासा — सुंदर हास्य वाली
  43. चारुचन्द्रकलाधरा — सुंदर चंद्रकला धारण करने वाली
  44. चराचरजगन्नाथा — चर-अचर जगत् की स्वामिनी
  45. चक्रराजनिकेतना — श्रीचक्रराज में निवास करने वाली
  46. पार्वती — पर्वतराज की पुत्री
  47. पद्मनयना — कमल सम नेत्रों वाली
  48. पद्मरागसमप्रभा — पद्मराग-मणि सम कांति वाली
  49. पञ्चप्रेतासनासीना — पंच-प्रेत रूपी आसन पर आसीन
  50. पञ्चब्रह्मस्वरूपिणी — पंच-ब्रह्म स्वरूपा
  51. चिन्मयी — चित्-स्वरूपा
  52. परमानन्दा — परम आनंद रूप
  53. विज्ञानघनरूपिणी — विज्ञान-घन स्वरूपा
  54. ध्यानध्यातृध्येयरूपा — ध्यान-ध्याता-ध्येय स्वरूपा
  55. धर्माधर्मविवर्जिता — धर्म-अधर्म से परे
  56. विश्वरूपा — विश्व-स्वरूपा
  57. जागरिणी — जाग्रत अवस्था रूप
  58. स्वपन्ती — स्वप्न अवस्था रूप
  59. तैजसात्मिका — तैजस (स्वप्न-चेतना) रूप
  60. सुप्ता — सुषुप्ति अवस्था रूप
  61. प्राज्ञात्मिका — प्राज्ञ (सुषुप्ति-चेतना) रूप
  62. तुर्या — तुरीय अवस्था रूप
  63. सर्वावस्थाविवर्जिता — समस्त अवस्थाओं से परे
  64. सृष्टिकर्त्री — सृष्टि की कर्त्री
  65. ब्रह्मरूपा — ब्रह्मा रूप
  66. गोप्त्री — पालन (रक्षा) करने वाली
  67. गोविन्दरूपिणी — गोविंद (विष्णु) रूप
  68. संहारिणी — संहार करने वाली
  69. रुद्ररूपा — रुद्र रूप
  70. तिरोधानकरी — तिरोधान (लय) करने वाली
  71. ईश्वरी — ईश्वरी
  72. सदाशिवा — सदाशिव रूप
  73. अनुग्रहदा — अनुग्रह प्रदान करने वाली
  74. पञ्चकृत्यपरायणा — पंच-कृत्यों में तत्पर
  75. भानुमण्डलमध्यस्था — सूर्य-मंडल के मध्य स्थित
  76. भैरवी — भैरवी रूप
  77. भगमालिनी — भग-मालाधारिणी
  78. पद्मासना — कमल-आसन वाली
  79. भगवती — ऐश्वर्यमयी भगवती
  80. पद्मनाभसहोदरी — पद्मनाभ (विष्णु) की भगिनी
  81. उन्मेषनिमिषोत्पन्नविपन्नभुवनावली — पलक खुलने-मुँदने से लोकों की उत्पत्ति-लय करने वाली
  82. सहस्रशीर्षवदना — सहस्र शीर्ष व मुख वाली
  83. सहस्राक्षी — सहस्र नेत्रों वाली
  84. सहस्रपात् — सहस्र चरणों वाली
  85. आब्रह्मकीटजननी — ब्रह्मा से कीट तक की जननी
  86. वर्णाश्रमविधायिनी — वर्ण-आश्रम की विधायिका
  87. निजाज्ञारूपनिगमा — अपनी आज्ञा रूपी वेद वाली
  88. पुण्यापुण्यफलप्रदा — पुण्य-पाप का फल देने वाली
  89. श्रुतिसीमन्तसिन्दूरीकृतपादाब्जधूलिका — वेद रूपी सीमंत में सिंदूर बनी चरण-धूलि वाली
  90. सकलागमसन्दोहशुक्तिसम्पुटमौक्तिका — समस्त आगमों रूपी सीप में मोती रूप
  91. पुरुषार्थप्रदा — पुरुषार्थ (धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष) देने वाली
  92. पूर्णा — पूर्ण
  93. भोगिनी — भोग-स्वरूपा
  94. भुवनेश्वरी — भुवनों की ईश्वरी
  95. अम्बिका — जगज्जननी अम्बिका
  96. अनादिनिधना — आदि-अंत रहित
  97. हरिब्रह्मेन्द्रसेविता — विष्णु-ब्रह्मा-इंद्र द्वारा सेवित
  98. नारायणी — नारायण की शक्ति
  99. नादरूपा — नाद-स्वरूपा
  100. नामरूपविवर्जिता — नाम-रूप से परे

चतुर्थ शतक (नाम 301–400)

  1. ह्रींकारी — 'ह्रीं' बीज स्वरूपा
  2. ह्रीमती — लज्जाशीला
  3. हृद्या — हृदय को प्रिय
  4. हेयोपादेयवर्जिता — त्याज्य-ग्राह्य से परे
  5. राजराजार्चिता — राजाधिराजों द्वारा पूजित
  6. राज्ञी — महारानी
  7. रम्या — रमणीय
  8. राजीवलोचना — कमल सम नेत्रों वाली
  9. रञ्जनी — आनंदित करने वाली
  10. रमणी — रमण करने वाली (आह्लादिनी)
  11. रस्या — रस-स्वरूपा (आस्वाद्य)
  12. रणत्किङ्किणिमेखला — रुनझुन करधनी वाली
  13. रमा — रमा (लक्ष्मी) रूप
  14. राकेन्दुवदना — पूर्ण चंद्र सम मुख वाली
  15. रतिरूपा — रति-स्वरूपा
  16. रतिप्रिया — रति की प्रेमी
  17. रक्षाकरी — रक्षा करने वाली
  18. राक्षसघ्नी — राक्षसों का नाश करने वाली
  19. रामा — रमण करने वाली (मनोहरा)
  20. रमणलम्पटा — रमण (शिव) में अनुरक्त
  21. काम्या — कमनीय (वांछनीय)
  22. कामकलारूपा — काम-कला स्वरूपा
  23. कदम्बकुसुमप्रिया — कदंब-पुष्प की प्रेमी
  24. कल्याणी — कल्याणकारिणी
  25. जगतीकन्दा — जगत् के मूल (कंद) रूप
  26. करुणारससागरा — करुणा-रस के सागर
  27. कलावती — कलाओं से युक्त
  28. कलालापा — कलापूर्ण वाणी वाली
  29. कान्ता — मनोहर रूप वाली
  30. कादम्बरीप्रिया — कादंबरी (मधु) की प्रेमी
  31. वरदा — वर देने वाली
  32. वामनयना — सुंदर नेत्रों वाली
  33. वारुणीमदविह्वला — वारुणी-मद से विह्वल
  34. विश्वाधिका — विश्व से श्रेष्ठ
  35. वेदवेद्या — वेदों द्वारा ज्ञेय
  36. विन्ध्याचलनिवासिनी — विंध्याचल पर निवास करने वाली
  37. विधात्री — विधाता (रचयित्री)
  38. वेदजननी — वेदों की जननी
  39. विष्णुमाया — विष्णु की माया-शक्ति
  40. विलासिनी — विलासमयी
  41. क्षेत्रस्वरूपा — क्षेत्र (देह) स्वरूपा
  42. क्षेत्रेशी — क्षेत्र की ईश्वरी
  43. क्षेत्रक्षेत्रज्ञपालिनी — क्षेत्र व क्षेत्रज्ञ की पालक
  44. क्षयवृद्धिविनिर्मुक्ता — क्षय-वृद्धि से परे
  45. क्षेत्रपालसमर्चिता — क्षेत्रपालों द्वारा पूजित
  46. विजया — विजय-स्वरूपा
  47. विमला — निर्मल
  48. वन्द्या — वंदनीय
  49. वन्दारुजनवत्सला — वंदना करने वालों पर वत्सल
  50. वाग्वादिनी — वाणी की अधिष्ठात्री
  51. वामकेशी — सुंदर केश वाली
  52. वह्निमण्डलवासिनी — अग्नि-मंडल में वास करने वाली
  53. भक्तिमत्कल्पलतिका — भक्तों के लिए कल्पलता रूप
  54. पशुपाशविमोचिनी — जीव-बंधन से मुक्त करने वाली
  55. संहृताशेषपाषण्डा — समस्त पाखंडों का नाश करने वाली
  56. सदाचारप्रवर्तिका — सदाचार का प्रवर्तन करने वाली
  57. तापत्रयाग्निसन्तप्तसमाह्लादनचन्द्रिका — त्रिविध-ताप से तप्त जनों को शीतलता देने वाली चाँदनी
  58. तरुणी — नित्य-तरुणी
  59. तापसाराध्या — तपस्वियों द्वारा आराध्य
  60. तनुमध्या — कृश मध्यभाग वाली
  61. तमोपहा — अज्ञान-अंधकार दूर करने वाली
  62. चितिः — चिति (शुद्ध चेतना) रूप
  63. तत्पदलक्ष्यार्था — 'तत्' पद के लक्ष्यार्थ रूप
  64. चिदेकरसरूपिणी — चित्-एकरस स्वरूपा
  65. स्वात्मानन्दलवीभूतब्रह्माद्यानन्दसन्ततिः — जिनके आत्मानंद के लव से ब्रह्मादि का आनंद है
  66. परा — परा (सर्वोच्च वाणी) रूप
  67. प्रत्यक्चितीरूपा — अंतर्मुखी चेतना रूप
  68. पश्यन्ती — पश्यन्ती वाणी रूप
  69. परदेवता — परम देवता
  70. मध्यमा — मध्यमा वाणी रूप
  71. वैखरीरूपा — वैखरी वाणी रूप
  72. भक्तमानसहंसिका — भक्तों के मानस-सरोवर की हंसिनी
  73. कामेश्वरप्राणनाडी — कामेश्वर की प्राण-नाड़ी रूप
  74. कृतज्ञा — कृतज्ञ (किए को जानने वाली)
  75. कामपूजिता — कामदेव द्वारा पूजित
  76. श्रृङ्गाररससम्पूर्णा — शृंगार-रस से परिपूर्ण
  77. जया — विजय-स्वरूपा
  78. जालन्धरस्थिता — जालंधर-पीठ में स्थित
  79. ओड्याणपीठनिलया — ओड्याण-पीठ में निवास करने वाली
  80. बिन्दुमण्डलवासिनी — बिंदु-मंडल में वास करने वाली
  81. रहोयागक्रमाराध्या — रहस्य-याग क्रम से आराध्य
  82. रहस्तर्पणतर्पिता — रहस्य-तर्पण से तृप्त
  83. सद्यःप्रसादिनी — शीघ्र प्रसन्न होने वाली
  84. विश्वसाक्षिणी — विश्व की साक्षी
  85. साक्षिवर्जिता — साक्षी-भाव से भी परे
  86. षडङ्गदेवतायुक्ता — षडंग-देवताओं से युक्त
  87. षाड्गुण्यपरिपूरिता — छह ऐश्वर्य-गुणों से परिपूर्ण
  88. नित्यक्लिन्ना — सदा करुणा-आर्द्र
  89. निरुपमा — उपमा-रहित
  90. निर्वाणसुखदायिनी — निर्वाण-सुख प्रदान करने वाली
  91. नित्याषोडशिकारूपा — नित्या-षोडशी स्वरूपा
  92. श्रीकण्ठार्धशरीरिणी — श्रीकंठ (शिव) के अर्ध-शरीर वाली
  93. प्रभावती — प्रभा (तेज) वाली
  94. प्रभारूपा — प्रभा-स्वरूपा
  95. प्रसिद्धा — सर्वविख्यात
  96. परमेश्वरी — परम ईश्वरी
  97. मूलप्रकृतिः — मूल प्रकृति रूप
  98. अव्यक्ता — अव्यक्त
  99. व्यक्ताव्यक्तस्वरूपिणी — व्यक्त-अव्यक्त स्वरूपा
  100. व्यापिनी — सर्वव्यापिनी

पंचम शतक (नाम 401–500)

  1. विविधाकारा — विविध रूप वाली
  2. विद्याविद्यास्वरूपिणी — विद्या-अविद्या स्वरूपा
  3. महाकामेशनयनकुमुदाह्लादकौमुदी — महाकामेश के नयन-कुमुद को प्रफुल्लित करने वाली चाँदनी
  4. भक्ताहार्दतमोभेदभानुमद्भानुसन्ततिः — भक्तों के हृदय-तम का भेदन करने वाली सूर्य-किरण समूह
  5. शिवदूती — शिव को दूत बनाने वाली
  6. शिवाराध्या — शिव द्वारा आराध्य
  7. शिवमूर्तिः — शिवमयी मूर्ति
  8. शिवङ्करी — कल्याण करने वाली
  9. शिवप्रिया — शिव की प्रिया
  10. शिवपरा — शिव में तत्पर
  11. शिष्टेष्टा — शिष्टों को इष्ट
  12. शिष्टपूजिता — शिष्टजनों द्वारा पूजित
  13. अप्रमेया — अप्रमेय (अमाप्य)
  14. स्वप्रकाशा — स्वयं-प्रकाश रूप
  15. मनोवाचामगोचरा — मन-वाणी से परे
  16. चिच्छक्तिः — चित्-शक्ति रूप
  17. चेतनारूपा — चेतना स्वरूपा
  18. जडशक्तिः — जड-शक्ति रूप
  19. जडात्मिका — जड-स्वरूपा
  20. गायत्री — गायत्री रूप
  21. व्याहृतिः — व्याहृति (भूर्भुवः-स्वः) रूप
  22. सन्ध्या — संध्या-स्वरूपा
  23. द्विजवृन्दनिषेविता — ब्राह्मण-समूह द्वारा सेवित
  24. तत्त्वासना — तत्त्व रूपी आसन वाली
  25. तत् — 'तत्' (वह ब्रह्म) स्वरूपा
  26. त्वम् — 'त्वम्' (तू) स्वरूपा
  27. अयी — 'अयी' (हे माँ) संबोधन-स्वरूपा
  28. पञ्चकोशान्तरस्थिता — पंच-कोशों के भीतर स्थित
  29. निःसीममहिमा — असीम महिमा वाली
  30. नित्ययौवना — नित्य-यौवन वाली
  31. मदशालिनी — आनंद-मद से शोभित
  32. मदघूर्णितरक्ताक्षी — मद से घूर्णित लाल नेत्रों वाली
  33. मदपाटलगण्डभूः — मद से अरुण कपोलों वाली
  34. चन्दनद्रवदिग्धाङ्गी — चंदन-लेप से लिप्त अंगों वाली
  35. चाम्पेयकुसुमप्रिया — चंपा-पुष्प की प्रेमी
  36. कुशला — कुशल (निपुण)
  37. कोमलाकारा — कोमल रूप वाली
  38. कुरुकुल्ला — कुरुकुल्ला देवी रूप
  39. कुलेश्वरी — कुल की ईश्वरी
  40. कुलकुण्डालया — कुल-कुंड में निवास करने वाली
  41. कौलमार्गतत्परसेविता — कौल-मार्ग में तत्पर जनों द्वारा सेवित
  42. कुमारगणनाथाम्बा — कुमार (कार्तिकेय) व गणनाथ (गणेश) की माता
  43. तुष्टिः — तुष्टि (संतोष) रूप
  44. पुष्टिः — पुष्टि रूप
  45. मतिः — बुद्धि-स्वरूपा
  46. धृतिः — धैर्य-स्वरूपा
  47. शान्तिः — शांति-स्वरूपा
  48. स्वस्तिमती — कल्याणयुक्त
  49. कान्तिः — कांति (तेज) स्वरूपा
  50. नन्दिनी — आनंद देने वाली
  51. विघ्ननाशिनी — विघ्नों का नाश करने वाली
  52. तेजोवती — तेजमयी
  53. त्रिनयना — तीन नेत्रों वाली
  54. लोलाक्षीकामरूपिणी — चंचल नेत्रों वाली काम-रूपा
  55. मालिनी — माला धारण करने वाली
  56. हंसिनी — हंसिनी रूप
  57. माता — माता-स्वरूपा
  58. मलयाचलवासिनी — मलयाचल पर निवास करने वाली
  59. सुमुखी — सुंदर मुख वाली
  60. नलिनी — कमलिनी रूप
  61. सुभ्रूः — सुंदर भौंहों वाली
  62. शोभना — शोभायुक्त
  63. सुरनायिका — देवताओं की नायिका
  64. कालकण्ठी — नील-कंठ वाली (शिव-शक्ति)
  65. कान्तिमती — कांतियुक्त
  66. क्षोभिणी — क्षोभ (हलचल) उत्पन्न करने वाली
  67. सूक्ष्मरूपिणी — सूक्ष्म रूप वाली
  68. वज्रेश्वरी — वज्रेश्वरी रूप
  69. वामदेवी — वामदेव (शिव) की शक्ति
  70. वयोऽवस्थाविवर्जिता — आयु-अवस्थाओं से परे
  71. सिद्धेश्वरी — सिद्धों की ईश्वरी
  72. सिद्धविद्या — सिद्ध-विद्या रूप
  73. सिद्धमाता — सिद्धों की माता
  74. यशस्विनी — यशस्विनी
  75. विशुद्धिचक्रनिलया — विशुद्धि-चक्र में निवास करने वाली
  76. आरक्तवर्णा — रक्त-वर्णा
  77. त्रिलोचना — तीन नेत्रों वाली
  78. खट्वाङ्गादिप्रहरणा — खट्वांग आदि अस्त्र धारिणी
  79. वदनैकसमन्विता — एक मुख वाली
  80. पायसान्नप्रिया — पायस-अन्न की प्रेमी
  81. त्वक्स्था — त्वचा (धातु) में स्थित
  82. पशुलोकभयङ्करी — पशु-भाव वालों के लिए भयंकर
  83. अमृतादिमहाशक्तिसंवृता — अमृता आदि महाशक्तियों से घिरी
  84. डाकिनीश्वरी — डाकिनी-शक्ति की ईश्वरी
  85. अनाहताब्जनिलया — अनाहत-कमल में निवास करने वाली
  86. श्यामाभा — श्याम कांति वाली
  87. वदनद्वया — दो मुख वाली
  88. दंष्ट्रोज्ज्वला — उज्ज्वल दाढ़ों वाली
  89. अक्षमालादिधरा — जपमाला आदि धारण करने वाली
  90. रुधिरसंस्थिता — रुधिर (धातु) में स्थित
  91. कालरात्र्यादिशक्त्यौघवृता — कालरात्रि आदि शक्ति-समूह से घिरी
  92. स्निग्धौदनप्रिया — घृत-मिश्रित अन्न की प्रेमी
  93. महावीरेन्द्रवरदा — महावीरों को वर देने वाली
  94. राकिण्यम्बास्वरूपिणी — राकिणी-अम्बा स्वरूपा
  95. मणिपूराब्जनिलया — मणिपूर-कमल में निवास करने वाली
  96. वदनत्रयसंयुता — तीन मुख वाली
  97. वज्राधिकायुधोपेता — वज्र आदि आयुधों से युक्त
  98. डामर्यादिभिरावृता — डामरी आदि शक्तियों से घिरी
  99. रक्तवर्णा — रक्त-वर्णा
  100. मांसनिष्ठा — मांस (धातु) में स्थित

षष्ठ शतक (नाम 501–600)

  1. गुडान्नप्रीतमानसा — गुड़-अन्न से प्रसन्न मन वाली
  2. समस्तभक्तसुखदा — समस्त भक्तों को सुख देने वाली
  3. लाकिन्यम्बास्वरूपिणी — लाकिनी-अम्बा स्वरूपा
  4. स्वाधिष्ठानाम्बुजगता — स्वाधिष्ठान-कमल में स्थित
  5. चतुर्वक्त्रमनोहरा — चार मनोहर मुख वाली
  6. शूलाद्यायुधसम्पन्ना — शूल आदि आयुधों से सम्पन्न
  7. पीतवर्णा — पीत-वर्णा
  8. अतिगर्विता — अति गर्वयुक्त
  9. मेदोनिष्ठा — मेद (धातु) में स्थित
  10. मधुप्रीता — मधु से प्रसन्न
  11. बन्दिन्यादिसमन्विता — बंदिनी आदि शक्तियों से युक्त
  12. दध्यन्नासक्तहृदया — दधि-अन्न में अनुरक्त हृदय वाली
  13. काकिनीरूपधारिणी — काकिनी रूप धारण करने वाली
  14. मूलाधाराम्बुजारूढा — मूलाधार-कमल पर आरूढ़
  15. पञ्चवक्त्रा — पाँच मुख वाली
  16. अस्थिसंस्थिता — अस्थि (धातु) में स्थित
  17. अङ्कुशादिप्रहरणा — अंकुश आदि अस्त्र धारिणी
  18. वरदादिनिषेविता — वरदा आदि शक्तियों से सेवित
  19. मुद्गौदनासक्तचित्ता — मूँग-अन्न में अनुरक्त चित्त वाली
  20. साकिन्यम्बास्वरूपिणी — साकिनी-अम्बा स्वरूपा
  21. आज्ञाचक्राब्जनिलया — आज्ञा-चक्र-कमल में निवास करने वाली
  22. शुक्लवर्णा — श्वेत-वर्णा
  23. षडानना — छह मुख वाली
  24. मज्जासंस्था — मज्जा (धातु) में स्थित
  25. हंसवतीमुख्यशक्तिसमन्विता — हंसवती आदि मुख्य शक्तियों से युक्त
  26. हरिद्रान्नैकरसिका — हल्दी-अन्न की रसिका
  27. हाकिनीरूपधारिणी — हाकिनी रूप धारण करने वाली
  28. सहस्रदलपद्मस्था — सहस्रदल कमल में स्थित
  29. सर्ववर्णोपशोभिता — समस्त वर्णों से शोभित
  30. सर्वायुधधरा — समस्त आयुध धारण करने वाली
  31. शुक्लसंस्थिता — शुक्र (धातु) में स्थित
  32. सर्वतोमुखी — सब ओर मुख वाली
  33. सर्वौदनप्रीतचित्ता — सब प्रकार के अन्न से प्रसन्न चित्त वाली
  34. याकिन्यम्बास्वरूपिणी — याकिनी-अम्बा स्वरूपा
  35. स्वाहा — स्वाहा-स्वरूपा
  36. स्वधा — स्वधा-स्वरूपा
  37. अमतिः — अज्ञान/मति-रहित अवस्था रूप
  38. मेधा — मेधा (धारणा-बुद्धि) रूप
  39. श्रुतिः — श्रुति (वेद) रूप
  40. स्मृतिः — स्मृति-स्वरूपा
  41. अनुत्तमा — जिनसे श्रेष्ठ कोई नहीं
  42. पुण्यकीर्तिः — पुण्य-कीर्ति वाली
  43. पुण्यलभ्या — पुण्य से प्राप्य
  44. पुण्यश्रवणकीर्तना — जिनका श्रवण-कीर्तन पुण्यकारी है
  45. पुलोमजार्चिता — शची (पुलोमजा) द्वारा पूजित
  46. बन्धमोचनी — बंधन से मुक्त करने वाली
  47. बर्बरालका — घुँघराले केश वाली
  48. विमर्शरूपा — विमर्श (आत्म-चेतना) स्वरूपा
  49. विद्या — विद्या-स्वरूपा
  50. वियदादिजगत्प्रसूः — आकाश आदि जगत् की जननी
  51. सर्वव्याधिप्रशमनी — समस्त व्याधियों का शमन करने वाली
  52. सर्वमृत्युनिवारिणी — समस्त मृत्यु का निवारण करने वाली
  53. अग्रगण्या — सर्वप्रथम गणनीय (श्रेष्ठ)
  54. अचिन्त्यरूपा — अचिंत्य रूप वाली
  55. कलिकल्मषनाशिनी — कलियुग के पापों का नाश करने वाली
  56. कात्यायनी — कात्यायन-गोत्र में अवतरित
  57. कालहन्त्री — काल (मृत्यु) का नाश करने वाली
  58. कमलाक्षनिषेविता — विष्णु (कमलाक्ष) द्वारा सेवित
  59. ताम्बूलपूरितमुखी — ताम्बूल युक्त मुख वाली
  60. दाडिमीकुसुमप्रभा — अनार-पुष्प सम कांति वाली
  61. मृगाक्षी — मृग सम नेत्रों वाली
  62. मोहिनी — मोहित करने वाली
  63. मुख्या — प्रमुख (आदि कारण)
  64. मृडानी — मृड (शिव) की पत्नी
  65. मित्ररूपिणी — मित्र (हितैषी) स्वरूपा
  66. नित्यतृप्ता — नित्य तृप्त
  67. भक्तनिधिः — भक्तों के निधि
  68. नियन्त्री — नियंत्रण करने वाली
  69. निखिलेश्वरी — समस्त की ईश्वरी
  70. मैत्र्यादिवासनालभ्या — मैत्री आदि भावनाओं से प्राप्य
  71. महाप्रलयसाक्षिणी — महाप्रलय की साक्षी
  72. पराशक्तिः — परम शक्ति
  73. परानिष्ठा — परम निष्ठा रूप
  74. प्रज्ञानघनरूपिणी — प्रज्ञान-घन स्वरूपा
  75. माध्वीपानालसा — मधु-पान से अलसाई हुई
  76. मत्ता — आनंद-मत्त
  77. मातृकावर्णरूपिणी — मातृका-वर्णों (अक्षरों) स्वरूपा
  78. महाकैलासनिलया — महाकैलास में निवास करने वाली
  79. मृणालमृदुदोर्लता — कमल-नाल सम कोमल भुजा-लता वाली
  80. महनीया — पूजनीय
  81. महासाम्राज्यशालिनी — महान साम्राज्य से सुशोभित
  82. आत्मविद्या — आत्म-विद्या रूप
  83. महाविद्या — महाविद्या रूप
  84. श्रीविद्या — श्रीविद्या रूप
  85. कामसेविता — कामदेव द्वारा सेवित
  86. श्रीषोडशाक्षरीविद्या — श्री षोडशाक्षरी विद्या रूप
  87. त्रिकूटा — तीन कूटों वाली
  88. कामकोटिका — काम-कोटि रूप
  89. कटाक्षकिङ्करीभूतकमलाकोटिसेविता — जिनके कटाक्ष से किंकरी बनी करोड़ों लक्ष्मियों द्वारा सेवित
  90. शिरःस्थिता — शिर (सहस्रार) में स्थित
  91. चन्द्रनिभा — चंद्र सम कांति वाली
  92. भालस्था — भाल में स्थित
  93. इन्द्रधनुःप्रभा — इंद्रधनुष सम प्रभा वाली
  94. हृदयस्था — हृदय में स्थित
  95. रविप्रख्या — सूर्य सम तेजस्वी
  96. त्रिकोणान्तरदीपिका — त्रिकोण के भीतर दीप्त ज्योति
  97. दाक्षायणी — दक्ष की पुत्री (सती)
  98. दैत्यहन्त्री — दैत्यों का नाश करने वाली
  99. दक्षयज्ञविनाशिनी — दक्ष-यज्ञ का विनाश करने वाली
  100. दरान्दोलितदीर्घाक्षी — किंचित् आंदोलित दीर्घ नेत्रों वाली

सप्तम शतक (नाम 601–700)

  1. दरहासोज्ज्वलन्मुखी — मंद-हास से उज्ज्वल मुख वाली
  2. गुरुमूर्तिः — गुरु-स्वरूप मूर्ति
  3. गुणनिधिः — गुणों के निधि
  4. गोमाता — गौओं (इंद्रियों/वाणी) की माता
  5. गुहजन्मभूः — गुह (कार्तिकेय) की जन्मभूमि
  6. देवेशी — देवों की ईश्वरी
  7. दण्डनीतिस्था — दंडनीति में स्थित
  8. दहराकाशरूपिणी — हृदय-आकाश (दहर) स्वरूपा
  9. प्रतिपन्मुख्यराकान्ततिथिमण्डलपूजिता — प्रतिपदा से पूर्णिमा तक तिथि-मंडल द्वारा पूजित
  10. कलात्मिका — कला-स्वरूपा
  11. कलानाथा — कलाओं की स्वामिनी
  12. काव्यालापविनोदिनी — काव्य-आलाप में विनोद करने वाली
  13. सचामररमावाणीसव्यदक्षिणसेविता — बायें-दायें रमा व वाणी द्वारा चामर से सेवित
  14. आदिशक्तिः — आदि शक्ति
  15. अमेया — अमेय (अमाप्य)
  16. आत्मा — आत्म-स्वरूपा
  17. परमा — परम
  18. पावनाकृतिः — पावन आकृति वाली
  19. अनेककोटिब्रह्माण्डजननी — अनेक कोटि ब्रह्मांडों की जननी
  20. दिव्यविग्रहा — दिव्य विग्रह (रूप) वाली
  21. क्लीङ्कारी — 'क्लीं' बीज स्वरूपा
  22. केवला — केवल (शुद्ध) स्वरूपा
  23. गुह्या — गुह्य (गोपनीय)
  24. कैवल्यपददायिनी — कैवल्य (मोक्ष) पद देने वाली
  25. त्रिपुरा — त्रिपुरा रूप
  26. त्रिजगद्वन्द्या — तीनों लोकों द्वारा वंदनीय
  27. त्रिमूर्तिः — त्रिमूर्ति स्वरूपा
  28. त्रिदशेश्वरी — देवताओं की ईश्वरी
  29. त्र्यक्षरी — तीन अक्षरों (बीजों) वाली
  30. दिव्यगन्धाढ्या — दिव्य सुगंध से युक्त
  31. सिन्दूरतिलकाञ्चिता — सिंदूर-तिलक से सुशोभित
  32. उमा — उमा (पार्वती) रूप
  33. शैलेन्द्रतनया — पर्वतराज की पुत्री
  34. गौरी — गौर-वर्णा
  35. गन्धर्वसेविता — गंधर्वों द्वारा सेवित
  36. विश्वगर्भा — जिनके गर्भ में विश्व है
  37. स्वर्णगर्भा — स्वर्ण-गर्भा (हिरण्यगर्भ शक्ति)
  38. अवरदा — रक्षा करने वाली / वर देने वाली
  39. वागधीश्वरी — वाणी की अधीश्वरी
  40. ध्यानगम्या — ध्यान से प्राप्य
  41. अपरिच्छेद्या — जिनका परिच्छेद (सीमा) न हो
  42. ज्ञानदा — ज्ञान प्रदान करने वाली
  43. ज्ञानविग्रहा — ज्ञान-स्वरूप विग्रह वाली
  44. सर्ववेदान्तसंवेद्या — समस्त वेदांत द्वारा ज्ञेय
  45. सत्यानन्दस्वरूपिणी — सत्य-आनंद स्वरूपा
  46. लोपामुद्रार्चिता — लोपामुद्रा द्वारा पूजित
  47. लीलाक्लृप्तब्रह्माण्डमण्डला — लीला से ब्रह्मांड-मंडल रचने वाली
  48. अदृश्या — अदृश्य
  49. दृश्यरहिता — दृश्य से रहित
  50. विज्ञात्री — सर्वज्ञाता
  51. वेद्यवर्जिता — ज्ञेय-भाव से परे
  52. योगिनी — योगिनी रूप
  53. योगदा — योग प्रदान करने वाली
  54. योग्या — योग्य (आराधना-योग्य)
  55. योगानन्दा — योग-आनंद स्वरूपा
  56. युगन्धरा — युगों को धारण करने वाली
  57. इच्छाशक्तिज्ञानशक्तिक्रियाशक्तिस्वरूपिणी — इच्छा-ज्ञान-क्रिया शक्ति स्वरूपा
  58. सर्वाधारा — सबकी आधार
  59. सुप्रतिष्ठा — सुदृढ़ प्रतिष्ठा वाली
  60. सदसद्रूपधारिणी — सत्-असत् रूप धारण करने वाली
  61. अष्टमूर्तिः — आठ मूर्ति (रूप) वाली
  62. अजाजैत्री — अजा (माया) को जीतने वाली
  63. लोकयात्राविधायिनी — लोक-व्यवहार का संचालन करने वाली
  64. एकाकिनी — अद्वितीय (एकाकी)
  65. भूमरूपा — भूमा (अनंत वैभव) स्वरूपा
  66. निर्द्वैता — द्वैत-रहित
  67. द्वैतवर्जिता — द्वैत से परे
  68. अन्नदा — अन्न प्रदान करने वाली
  69. वसुदा — धन प्रदान करने वाली
  70. वृद्धा — पुरातन (आदि)
  71. ब्रह्मात्मैक्यस्वरूपिणी — ब्रह्म-आत्मा की एकता स्वरूपा
  72. बृहती — विशाल (व्यापक)
  73. ब्राह्मणी — ब्रह्म-शक्ति रूप
  74. ब्राह्मी — ब्रह्मा की शक्ति
  75. ब्रह्मानन्दा — ब्रह्म-आनंद स्वरूपा
  76. बलिप्रिया — बलि (भक्ति-अर्पण) की प्रेमी
  77. भाषारूपा — समस्त भाषा-स्वरूपा
  78. बृहत्सेना — विशाल सेना वाली
  79. भावाभावविवर्जिता — भाव-अभाव से परे
  80. सुखाराध्या — सुगमता से आराध्य
  81. शुभकरी — कल्याण करने वाली
  82. शोभनासुलभागतिः — शुभ व सुलभ गति देने वाली
  83. राजराजेश्वरी — राजाधिराजों की ईश्वरी
  84. राज्यदायिनी — राज्य प्रदान करने वाली
  85. राज्यवल्लभा — राज्य की प्रिय (रक्षक)
  86. राजत्कृपा — देदीप्यमान कृपा वाली
  87. राजपीठनिवेशितनिजाश्रिता — अपने आश्रितों को राज-सिंहासन पर बैठाने वाली
  88. राज्यलक्ष्मीः — राज्य की लक्ष्मी
  89. कोशनाथा — कोश (भंडार) की स्वामिनी
  90. चतुरङ्गबलेश्वरी — चतुरंग सेना की ईश्वरी
  91. साम्राज्यदायिनी — साम्राज्य प्रदान करने वाली
  92. सत्यसन्धा — सत्य-प्रतिज्ञ
  93. सागरमेखला — समुद्र रूपी मेखला (पृथ्वी) वाली
  94. दीक्षिता — दीक्षा देने वाली
  95. दैत्यशमनी — दैत्यों का शमन करने वाली
  96. सर्वलोकवशंकरी — समस्त लोकों को वश में करने वाली
  97. सर्वार्थदात्री — समस्त अर्थ (प्रयोजन) देने वाली
  98. सावित्री — सावित्री रूप
  99. सच्चिदानन्दरूपिणी — सत्-चित्-आनंद स्वरूपा
  100. देशकालापरिच्छिन्ना — देश-काल से असीमित

अष्टम शतक (नाम 701–800)

  1. सर्वगा — सर्वव्यापिनी
  2. सर्वमोहिनी — सबको मोहित करने वाली
  3. सरस्वती — सरस्वती रूप
  4. शास्त्रमयी — समस्त शास्त्र-स्वरूपा
  5. गुहाम्बा — गुह (कार्तिकेय) की माता
  6. गुह्यरूपिणी — गुह्य (गूढ़) स्वरूपा
  7. सर्वोपाधिविनिर्मुक्ता — समस्त उपाधियों से मुक्त
  8. सदाशिवपतिव्रता — सदाशिव की पतिव्रता
  9. सम्प्रदायेश्वरी — संप्रदायों की ईश्वरी
  10. साध्वी — साध्वी (पतिव्रता)
  11. गुरुमण्डलरूपिणी — गुरु-मंडल स्वरूपा
  12. कुलोत्तीर्णा — कुल (मार्ग) से परे
  13. भगाराध्या — भग (ऐश्वर्य) रूप में आराध्य
  14. माया — माया-स्वरूपा
  15. मधुमती — मधुर बुद्धि वाली
  16. मही — पृथ्वी-स्वरूपा
  17. गणाम्बा — गणों की माता
  18. गुह्यकाराध्या — गुह्यकों (यक्षों) द्वारा आराध्य
  19. कोमलाङ्गी — कोमल अंगों वाली
  20. गुरुप्रिया — गुरु की प्रिय
  21. स्वतन्त्रा — स्वतंत्र
  22. सर्वतन्त्रेशी — समस्त तंत्रों की ईश्वरी
  23. दक्षिणामूर्तिरूपिणी — दक्षिणामूर्ति स्वरूपा
  24. सनकादिसमाराध्या — सनकादि मुनियों द्वारा आराध्य
  25. शिवज्ञानप्रदायिनी — शिव-ज्ञान प्रदान करने वाली
  26. चित्कला — चित्-कला रूप
  27. आनन्दकलिका — आनंद की कलिका रूप
  28. प्रेमरूपा — प्रेम-स्वरूपा
  29. प्रियङ्करी — प्रिय करने वाली
  30. नामपारायणप्रीता — नाम-पारायण से प्रसन्न
  31. नन्दिविद्या — नंदि-विद्या रूप
  32. नटेश्वरी — नटराज (शिव) की शक्ति
  33. मिथ्याजगदधिष्ठाना — मिथ्या जगत् का अधिष्ठान
  34. मुक्तिदा — मुक्ति प्रदान करने वाली
  35. मुक्तिरूपिणी — मुक्ति-स्वरूपा
  36. लास्यप्रिया — लास्य-नृत्य की प्रेमी
  37. लयकरी — लय (प्रलय) करने वाली
  38. लज्जा — लज्जा-स्वरूपा
  39. रम्भादिवन्दिता — रंभा आदि अप्सराओं द्वारा वंदित
  40. भवदावसुधावृष्टिः — संसार-दावानल पर अमृत-वृष्टि रूप
  41. पापारण्यदवानला — पाप रूपी वन के लिए दावाग्नि
  42. दौर्भाग्यतूलवातूला — दुर्भाग्य रूपी रुई के लिए आँधी
  43. जराध्वान्तरविप्रभा — जरा रूपी अंधकार के लिए सूर्य-प्रभा
  44. भाग्याब्धिचन्द्रिका — भाग्य-सागर को बढ़ाने वाली चाँदनी
  45. भक्तचित्तकेकिघनाघना — भक्त-चित्त रूपी मयूर के लिए सघन मेघ
  46. रोगपर्वतदम्भोलिः — रोग रूपी पर्वत के लिए वज्र
  47. मृत्युदारुकुठारिका — मृत्यु रूपी वृक्ष के लिए कुठार
  48. महेश्वरी — महेश्वरी
  49. महाकाली — महाकाली रूप
  50. महाग्रासा — महाग्रास (संहार-शक्ति) रूप
  51. महाशना — महान भोक्त्री
  52. अपर्णा — तप में पर्ण भी त्यागने वाली
  53. चण्डिका — प्रचंड रूपा
  54. चण्डमुण्डासुरनिषूदिनी — चंड-मुंड असुरों का नाश करने वाली
  55. क्षराक्षरात्मिका — क्षर-अक्षर स्वरूपा
  56. सर्वलोकेशी — समस्त लोकों की ईश्वरी
  57. विश्वधारिणी — विश्व को धारण करने वाली
  58. त्रिवर्गदात्री — धर्म-अर्थ-काम तीनों देने वाली
  59. सुभगा — सौभाग्यवती
  60. त्र्यम्बका — तीन नेत्रों वाली
  61. त्रिगुणात्मिका — तीन गुण स्वरूपा
  62. स्वर्गापवर्गदा — स्वर्ग व मोक्ष देने वाली
  63. शुद्धा — शुद्ध-स्वरूपा
  64. जपापुष्पनिभाकृतिः — जपा-पुष्प सम आकृति वाली
  65. ओजोवती — ओज (तेज) से युक्त
  66. द्युतिधरा — कांति धारण करने वाली
  67. यज्ञरूपा — यज्ञ-स्वरूपा
  68. प्रियव्रता — व्रतों में प्रिय
  69. दुराराध्या — कठिनता से आराध्य
  70. दुराधर्षा — जिन पर आक्रमण न हो सके
  71. पाटलीकुसुमप्रिया — पाटली-पुष्प की प्रेमी
  72. महती — महान
  73. मेरुनिलया — मेरु पर निवास करने वाली
  74. मन्दारकुसुमप्रिया — मंदार-पुष्प की प्रेमी
  75. वीराराध्या — वीरों (साधकों) द्वारा आराध्य
  76. विराड्रूपा — विराट् स्वरूपा
  77. विरजसे — रजोगुण-रहित
  78. विश्वतोमुखी — सब ओर मुख वाली
  79. प्रत्यग्रूपा — अंतरात्मा स्वरूपा
  80. पराकाशा — परम आकाश रूप
  81. प्राणदा — प्राण प्रदान करने वाली
  82. प्राणरूपिणी — प्राण-स्वरूपा
  83. मार्ताण्डभैरवाराध्या — मार्तंड-भैरव द्वारा आराध्य
  84. मन्त्रिणीन्यस्तराज्यधूः — मंत्रिणी को राज्य-भार सौंपने वाली
  85. त्रिपुरेशी — त्रिपुर की ईश्वरी
  86. जयत्सेना — विजयी सेना वाली
  87. निस्त्रैगुण्या — तीन गुणों से परे
  88. परापरा — पर व अपर स्वरूपा
  89. सत्यज्ञानानन्दरूपा — सत्य-ज्ञान-आनंद स्वरूपा
  90. सामरस्यपरायणा — सामरस्य (शिव-शक्ति ऐक्य) में तत्पर
  91. कपर्दिनी — जटाधारी (शिव-शक्ति)
  92. कलामाला — कलाओं की माला वाली
  93. कामधुक् — कामधेनु (इच्छा-पूर्ति) रूप
  94. कामरूपिणी — इच्छानुसार रूप धारण करने वाली
  95. कलानिधिः — कलाओं के निधि
  96. काव्यकला — काव्य-कला रूप
  97. रसज्ञा — रस की ज्ञाता
  98. रसशेवधिः — रस के कोश रूप
  99. पुष्टा — पुष्ट (परिपूर्ण)
  100. पुरातना — अति प्राचीन

नवम शतक (नाम 801–900)

  1. पूज्या — पूजनीय
  2. पुष्करा — पुष्कर (पावन) रूप
  3. पुष्करेक्षणा — कमल सम नेत्रों वाली
  4. परंज्योतिः — परम ज्योति
  5. परंधाम — परम धाम
  6. परमाणुः — परम-अणु (सूक्ष्मतम) रूप
  7. परात्परा — परे से भी परे
  8. पाशहस्ता — हाथ में पाश वाली
  9. पाशहन्त्री — पाश (बंधन) का नाश करने वाली
  10. परमन्त्रविभेदिनी — शत्रु-मंत्रों का भेदन करने वाली
  11. मूर्ता — साकार रूप
  12. अमूर्ता — निराकार रूप
  13. अनित्यतृप्ता — अनित्य से अतृप्त (नित्य में तृप्त)
  14. मुनिमानसहंसिका — मुनियों के मानस की हंसिनी
  15. सत्यव्रता — सत्य-व्रत वाली
  16. सत्यरूपा — सत्य-स्वरूपा
  17. सर्वान्तर्यामिणी — सबके अंतर्यामी
  18. सती — सती (पतिव्रता)
  19. ब्रह्माणी — ब्रह्मा की शक्ति
  20. ब्रह्म — ब्रह्म-स्वरूपा
  21. जननी — जगत् की जननी
  22. बहुरूपा — अनेक रूप वाली
  23. बुधार्चिता — बुधजनों (विद्वानों) द्वारा पूजित
  24. प्रसवित्री — जगत् को जन्म देने वाली
  25. प्रचण्डा — अति प्रचंड
  26. आज्ञा — आज्ञा (शासन) स्वरूपा
  27. प्रतिष्ठा — प्रतिष्ठा (आधार) रूप
  28. प्रकटाकृतिः — प्रकट आकृति वाली
  29. प्राणेश्वरी — प्राणों की ईश्वरी
  30. प्राणदात्री — प्राण देने वाली
  31. पञ्चाशत्पीठरूपिणी — पचास पीठ (अक्षर) स्वरूपा
  32. विशृङ्खला — बंधन-रहित
  33. विविक्तस्था — एकांत में स्थित
  34. वीरमाता — वीरों की माता
  35. वियत्प्रसूः — आकाश की जननी
  36. मुकुन्दा — मुक्ति देने वाली
  37. मुक्तिनिलया — मुक्ति का निवास
  38. मूलविग्रहरूपिणी — मूल विग्रह स्वरूपा
  39. भावज्ञा — भावों (हृदय) को जानने वाली
  40. भवरोगघ्नी — संसार-रोग का नाश करने वाली
  41. भवचक्रप्रवर्तिनी — संसार-चक्र का प्रवर्तन करने वाली
  42. छन्दःसारा — छंदों का सार
  43. शास्त्रसारा — शास्त्रों का सार
  44. मन्त्रसारा — मंत्रों का सार
  45. तलोदरी — कृश उदर वाली
  46. उदारकीर्तिः — उदार कीर्ति वाली
  47. उद्दामवैभवा — अपरिमित वैभव वाली
  48. वर्णरूपिणी — अक्षर-स्वरूपा
  49. जन्ममृत्युजरातप्तजनविश्रान्तिदायिनी — जन्म-मृत्यु-जरा से तप्त जनों को विश्रांति देने वाली
  50. सर्वोपनिषदुद्घुष्टा — समस्त उपनिषदों द्वारा घोषित
  51. शान्त्यतीतकलात्मिका — शांत्यतीत कला स्वरूपा
  52. गम्भीरा — गंभीर-स्वरूपा
  53. गगनान्तस्था — आकाश के भीतर स्थित
  54. गर्विता — गौरवयुक्त
  55. गानलोलुपा — गान (संगीत) की प्रेमी
  56. कल्पनारहिता — कल्पना से परे
  57. काष्ठा — काष्ठा (परम सीमा) रूप
  58. अकान्ता — जिनसे प्रिय कोई नहीं / नित्य रमणीय
  59. कान्तार्धविग्रहा — कांत (शिव) के अर्ध-शरीर वाली
  60. कार्यकारणनिर्मुक्ता — कार्य-कारण से मुक्त
  61. कामकेलितरङ्गिता — काम-क्रीड़ा में तरंगित
  62. कनत्कनकताटङ्का — चमकते स्वर्ण-कुंडल वाली
  63. लीलाविग्रहधारिणी — लीला हेतु विग्रह धारण करने वाली
  64. अजा — अजन्मा
  65. क्षयविनिर्मुक्ता — क्षय (नाश) से मुक्त
  66. मुग्धा — मनोहर (सरल) रूप
  67. क्षिप्रप्रसादिनी — शीघ्र प्रसन्न होने वाली
  68. अन्तर्मुखसमाराध्या — अंतर्मुखी साधकों द्वारा आराध्य
  69. बहिर्मुखसुदुर्लभा — बहिर्मुखी जनों को अति दुर्लभ
  70. त्रयी — तीन वेद स्वरूपा
  71. त्रिवर्गनिलया — धर्म-अर्थ-काम का निवास
  72. त्रिस्था — तीनों (अवस्थाओं/लोकों) में स्थित
  73. त्रिपुरमालिनी — त्रिपुर-मालिनी रूप
  74. निरामया — रोग-रहित
  75. निरालम्बा — आलंबन-रहित (स्वयं आधार)
  76. स्वात्मारामा — आत्मा में रमण करने वाली
  77. सुधासृष्टिः — अमृत-सृष्टि रूप
  78. संसारपङ्कनिर्मग्नसमुद्धरणपण्डिता — संसार-कीचड़ में डूबे जनों के उद्धार में निपुण
  79. यज्ञप्रिया — यज्ञ की प्रेमी
  80. यज्ञकर्त्री — यज्ञ की कर्त्री
  81. यजमानस्वरूपिणी — यजमान स्वरूपा
  82. धर्माधारा — धर्म की आधार
  83. धनाध्यक्षा — धन की अध्यक्ष
  84. धनधान्यविवर्धिनी — धन-धान्य बढ़ाने वाली
  85. विप्रप्रिया — विप्रों (ब्राह्मणों) की प्रेमी
  86. विप्ररूपा — विप्र-स्वरूपा
  87. विश्वभ्रमणकारिणी — विश्व को भ्रमण कराने वाली
  88. विश्वग्रासा — विश्व का ग्रास (संहार) करने वाली
  89. विद्रुमाभा — मूँगा सम कांति वाली
  90. वैष्णवी — विष्णु की शक्ति
  91. विष्णुरूपिणी — विष्णु-स्वरूपा
  92. अयोनिः — योनि (जन्म) रहित
  93. योनिनिलया — समस्त की उत्पत्ति-स्थान
  94. कूटस्था — कूटस्थ (अचल) रूप
  95. कुलरूपिणी — कुल-स्वरूपा
  96. वीरगोष्ठीप्रिया — वीर-साधकों की गोष्ठी की प्रेमी
  97. वीरा — वीर-स्वरूपा
  98. नैष्कर्म्या — निष्काम-कर्म स्वरूपा
  99. नादरूपिणी — नाद-स्वरूपा
  100. विज्ञानकलना — विज्ञान की प्रेरक

दशम शतक (नाम 901–998)

  1. कल्या — कल्याणमयी
  2. विदग्धा — चतुर (निपुण)
  3. बैन्दवासना — बिंदु को आसन बनाने वाली
  4. तत्त्वाधिका — तत्त्वों से श्रेष्ठ
  5. तत्त्वमयी — तत्त्व-स्वरूपा
  6. तत्त्वमर्थस्वरूपिणी — 'तत्त्वमसि' के अर्थ स्वरूपा
  7. सामगानप्रिया — सामगान की प्रेमी
  8. सौम्या — सौम्य-स्वरूपा
  9. सदाशिवकुटुम्बिनी — सदाशिव की गृहिणी
  10. सव्यापसव्यमार्गस्था — दक्षिण व वाम दोनों मार्गों में स्थित
  11. सर्वापद्विनिवारिणी — समस्त आपदाओं का निवारण करने वाली
  12. स्वस्था — आत्मस्थ (स्वस्थ)
  13. स्वभावमधुरा — स्वभाव से मधुर
  14. धीरा — धीर-स्वरूपा
  15. धीरसमर्चिता — धीर (विवेकी) जनों द्वारा पूजित
  16. चैतन्यार्घ्यसमाराध्या — चैतन्य रूपी अर्घ्य से आराध्य
  17. चैतन्यकुसुमप्रिया — चैतन्य रूपी पुष्प की प्रेमी
  18. सदोदिता — सदा उदित (प्रकाशमान)
  19. सदातुष्टा — सदा संतुष्ट
  20. तरुणादित्यपाटला — उदित सूर्य सम अरुण आभा वाली
  21. दक्षिणादक्षिणाराध्या — दक्षिण व वाम दोनों मार्गों से आराध्य
  22. दरस्मेरमुखाम्बुजा — मंद-स्मित मुख-कमल वाली
  23. कौलिनीकेवला — कौलिनी व केवल स्वरूपा
  24. अनर्घ्यकैवल्यपददायिनी — अमूल्य कैवल्य-पद देने वाली
  25. स्तोत्रप्रिया — स्तोत्र की प्रेमी
  26. स्तुतिमती — स्तुति से प्रसन्न होने वाली
  27. श्रुतिसंस्तुतवैभवा — वेदों द्वारा स्तुत वैभव वाली
  28. मनस्विनी — मनस्विनी (तेजस्वी मन वाली)
  29. मानवती — मान (गौरव) वाली
  30. महेशी — महेश्वरी
  31. मङ्गलाकृतिः — मंगलमयी आकृति वाली
  32. विश्वमाता — विश्व की माता
  33. जगद्धात्री — जगत् को धारण करने वाली
  34. विशालाक्षी — विशाल नेत्रों वाली
  35. विरागिणी — विरक्त (राग-रहित)
  36. प्रगल्भा — प्रगल्भ (समर्थ)
  37. परमोदारा — परम उदार
  38. परामोदा — परम आनंद रूप
  39. मनोमयी — मनोमय
  40. व्योमकेशी — आकाश रूपी केश वाली
  41. विमानस्था — विमान में स्थित
  42. वज्रिणी — वज्र धारण करने वाली
  43. वामकेश्वरी — वामकेश्वर-तंत्र की देवी
  44. पञ्चयज्ञप्रिया — पंच-यज्ञों की प्रेमी
  45. पञ्चप्रेतमञ्चाधिशायिनी — पंच-प्रेत रूपी मंच पर शयन करने वाली
  46. पञ्चमी — पंचमी (शक्ति) रूप
  47. पञ्चभूतेशी — पंच-भूतों की ईश्वरी
  48. पञ्चसङ्ख्योपचारिणी — पंच-उपचारों से पूजित
  49. शाश्वती — शाश्वत (नित्य)
  50. शाश्वतैश्वर्या — शाश्वत ऐश्वर्य वाली
  51. शर्मदा — सुख प्रदान करने वाली
  52. शम्भुमोहिनी — शंभु को मोहित करने वाली
  53. धरा — धारण करने वाली (पृथ्वी)
  54. धरसुता — पर्वत (धर) की पुत्री
  55. धन्या — धन्य-स्वरूपा
  56. धर्मिणी — धर्मनिष्ठ
  57. धर्मवर्धिनी — धर्म को बढ़ाने वाली
  58. लोकातीता — लोकों से परे
  59. गुणातीता — गुणों से परे
  60. सर्वातीता — सबसे परे
  61. शमात्मिका — शम (शांति) स्वरूपा
  62. बन्धूककुसुमप्रख्या — बंधूक-पुष्प सम कांति वाली
  63. बाला — बाला (नित्य-किशोरी) रूप
  64. लीलाविनोदिनी — लीला में विनोद करने वाली
  65. सुमङ्गली — सौभाग्यवती
  66. सुखकरी — सुख देने वाली
  67. सुवेषाढ्या — सुंदर वेश से युक्त
  68. सुवासिनी — सुहागिन (सौभाग्यवती)
  69. सुवासिन्यर्चनप्रीता — सुवासिनी-पूजन से प्रसन्न
  70. आशोभना — अति शोभायुक्त
  71. शुद्धमानसा — शुद्ध मन वाली
  72. बिन्दुतर्पणसन्तुष्टा — बिंदु-तर्पण से संतुष्ट
  73. पूर्वजा — सबसे पूर्व उत्पन्न (आदि)
  74. त्रिपुराम्बिका — त्रिपुर की अम्बा
  75. दशमुद्रासमाराध्या — दश मुद्राओं से आराध्य
  76. त्रिपुराश्रीवशङ्करी — त्रिपुर-श्री को वश में करने वाली
  77. ज्ञानमुद्रा — ज्ञान-मुद्रा रूप
  78. ज्ञानगम्या — ज्ञान से प्राप्य
  79. ज्ञानज्ञेयस्वरूपिणी — ज्ञान व ज्ञेय स्वरूपा
  80. योनिमुद्रा — योनि-मुद्रा रूप
  81. त्रिखण्डेशी — त्रिखंड (मुद्रा) की ईश्वरी
  82. त्रिगुणा — तीन गुण स्वरूपा
  83. अम्बा — जगन्माता अम्बा
  84. त्रिकोणगा — त्रिकोण (यंत्र-मध्य) में स्थित
  85. अनघा — पाप-रहित
  86. अद्भुतचारित्रा — अद्भुत चरित्र वाली
  87. वाञ्छितार्थप्रदायिनी — वांछित अर्थ प्रदान करने वाली
  88. अभ्यासातिशयज्ञाता — निरंतर अभ्यास से ज्ञात
  89. षडध्वातीतरूपिणी — छह अध्वाओं से परे स्वरूपा
  90. अव्याजकरुणामूर्तिः — निष्कपट करुणा की मूर्ति
  91. अज्ञानध्वान्तदीपिका — अज्ञान-अंधकार के लिए दीपक
  92. आबालगोपविदिता — बालक से ग्वाले तक सबको विदित
  93. सर्वानुल्लङ्घ्यशासना — जिनका शासन कोई उल्लंघन न कर सके
  94. श्रीचक्रराजनिलया — श्रीचक्रराज में निवास करने वाली
  95. श्रीमत्त्रिपुरसुन्दरी — श्रीमती त्रिपुरसुंदरी
  96. श्रीशिवा — श्री-शिवा (कल्याणमयी)
  97. शिवशक्त्यैक्यरूपिणी — शिव-शक्ति की एकता स्वरूपा
  98. ललिताम्बिका — ललिता अम्बिका (परम जगन्माता)

अर्थ (हिन्दी)

  1. अरुण वर्ण वाली, करुणा से तरंगित नेत्रों वाली, पाश-अंकुश व पुष्प-बाण-धनुष धारण करने वाली, अणिमादि सिद्धियों से घिरी हुई भवानी का मैं "अहम्" रूप में ध्यान करता हूँ।

लाभ

  • देवी की कृपा से समृद्धि, रक्षा व आध्यात्मिक उन्नति होती है।
  • मन की एकाग्रता व सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
  • रोग, दोष व नकारात्मकता का नाश होता है।
  • श्रीविद्या उपासना में अत्यंत फलदायी।

कब करें पाठ

शुक्रवार को · नवरात्रि में · पूर्णिमा को

स्रोत

रचयिता: वाग्देवियाँ (हयग्रीव-अगस्त्य संवाद). ब्रह्माण्ड पुराण — ललितोपाख्यान (श्री ललिता सहस्रनामस्तोत्र) · shyamjoshi.org — श्री ललिता सहस्र नामावली · lalithasahasranamam.in — श्री ललिता सहस्र नाम (संस्कृत)

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