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लिपि:
॥ श्री ॥
ललिता सहस्रनाम
सहस्रनाम · माँ दुर्गा
पाठ
॥ ध्यानम् ॥ अरुणां करुणातरङ्गिताक्षीं धृतपाशाङ्कुशपुष्पबाणचापाम्। अणिमादिभिरावृतां मयूखैरहमित्येव विभावये भवानीम्॥
प्रथम शतक (नाम 1–100)
- श्रीमाता — समस्त सृष्टि की पावन माता
- श्रीमहाराज्ञी — ब्रह्मांड की महारानी
- श्रीमत्सिंहासनेश्वरी — दिव्य सिंहासन की स्वामिनी
- चिदग्निकुण्डसम्भूता — चित् रूपी अग्निकुंड से प्रकट
- देवकार्यसमुद्यता — देवों के कार्य हेतु उद्यत
- उद्यद्भानुसहस्राभा — सहस्र उदित सूर्यों-सी आभा वाली
- चतुर्बाहुसमन्विता — चार भुजाओं से युक्त
- रागस्वरूपपाशाढ्या — राग रूपी पाश धारण करने वाली
- क्रोधाकाराङ्कुशोज्ज्वला — क्रोध रूपी अंकुश से उज्ज्वल
- मनोरूपेक्षुकोदण्डा — मन रूपी इक्षु-धनुष धारण करने वाली
- पञ्चतन्मात्रसायका — पंच तन्मात्र रूपी बाण वाली
- निजारुणप्रभापूरमज्जद्ब्रह्माण्डमण्डला — अपनी अरुण प्रभा में ब्रह्मांड डुबो देने वाली
- चम्पकाशोकपुन्नागसौगन्धिकलसत्कचा — चंपा-अशोक-पुन्नाग-सौगंधिक पुष्पों से सुशोभित केश वाली
- कुरुविन्दमणिश्रेणीकनत्कोटीरमण्डिता — कुरुविंद मणियों के मुकुट से मंडित
- अष्टमीचन्द्रविभ्राजदलिकस्थलशोभिता — अष्टमी-चंद्र सम भाल-स्थल से शोभित
- मुखचन्द्रकलङ्काभमृगनाभिविशेषका — मुख-चंद्र पर कस्तूरी-तिलक वाली
- वदनस्मरमाङ्गल्यगृहतोरणचिल्लिका — मुख रूपी मंगल-गृह के तोरण सदृश भौंहों वाली
- वक्त्रलक्ष्मीपरीवाहचलन्मीनाभलोचना — मुख-शोभा में चंचल मीन सदृश नेत्रों वाली
- नवचम्पकपुष्पाभनासादण्डविराजिता — नवचंपा-पुष्प सम नासिका वाली
- ताराकान्तितिरस्कारिनासाभरणभासुरा — तारों की कांति को मात देते नासा-आभरण वाली
- कदम्बमञ्जरीक्लृप्तकर्णपूरमनोहरा — कदंब-मंजरी के कर्णफूल से मनोहर
- ताटङ्कयुगलीभूततपनोडुपमण्डला — सूर्य-चंद्र रूपी कर्णभूषण-युगल वाली
- पद्मरागशिलादर्शपरिभाविकपोलभूः — पद्मराग-दर्पण सम कपोलों वाली
- नवविद्रुमबिम्बश्रीन्यक्कारिरदनच्छदा — मूँगा-बिंब को मात देते अधरों वाली
- शुद्धविद्याङ्कुराकारद्विजपङ्क्तिद्वयोज्ज्वला — शुद्ध विद्या-अंकुर सम दंत-पंक्तियों वाली
- कर्पूरवीटिकामोदसमाकर्षद्दिगन्तरा — कर्पूर-ताम्बूल सुगंध से दिशाओं को आकर्षित करने वाली
- निजसल्लापमाधुर्यविनिर्भर्त्सितकच्छपी — अपनी मधुर वाणी से वीणा को लज्जित करने वाली
- मन्दस्मितप्रभापूरमज्जत्कामेशमानसा — मंद-स्मित प्रभा में कामेश्वर का मन डुबो देने वाली
- अनाकलितसादृश्यचिबुकश्रीविराजिता — अनुपम चिबुक-शोभा से विराजित
- कामेशबद्धमाङ्गल्यसूत्रशोभितकन्धरा — कामेश्वर द्वारा बँधे मंगल-सूत्र से शोभित ग्रीवा वाली
- कनकाङ्गदकेयूरकमनीयभुजान्विता — स्वर्ण-बाजूबंद से सुंदर भुजाओं वाली
- रत्नग्रैवेयचिन्ताकलोलमुक्ताफलान्विता — रत्न-हार व मुक्ता-फलों से युक्त
- कामेश्वरप्रेमरत्नमणिप्रतिपणस्तनी — कामेश्वर-प्रेम-रत्न के बदले स्तन देने वाली
- नाभ्यालवालरोमालिलताफलकुचद्वयी — नाभि-वाटिका की रोमावली-लता व कुच-फल वाली
- लक्ष्यरोमलताधारतासमुन्नेयमध्यमा — सूक्ष्म रोम-लता से अनुमेय मध्यभाग वाली
- स्तनभारदलन्मध्यपट्टबन्धवलित्रया — स्तन-भार से क्षीण मध्य की त्रिवली वाली
- अरुणारुणकौसुम्भवस्त्रभास्वत्कटीतटी — अरुण कुसुंभी वस्त्र से दीप्त कटि-प्रदेश वाली
- रत्नकिङ्किणिकारम्यरशनादामभूषिता — रत्न-घुँघरूदार करधनी से भूषित
- कामेशज्ञातसौभाग्यमार्दवोरुद्वयान्विता — कामेश्वर-ज्ञात कोमल ऊरु-युगल वाली
- माणिक्यमुकुटाकारजानुद्वयविराजिता — माणिक्य-मुकुट सम जानुओं वाली
- इन्द्रगोपपरिक्षिप्तस्मरतूणाभजङ्घिका — इंद्रगोप-जटित काम-तूणीर सम जंघाओं वाली
- गूढगुल्फा — गूढ़ (अप्रकट) गुल्फों वाली
- कूर्मपृष्ठजयिष्णुप्रपदान्विता — कच्छप-पृष्ठ को जीतते चरण-अग्र वाली
- नखदीधितिसञ्छन्ननमज्जनतमोगुणा — नख-कांति से नत भक्तों का तमोगुण हरने वाली
- पदद्वयप्रभाजालपराकृतसरोरुहा — चरण-कांति से कमलों को मात देने वाली
- शिञ्जानमणिमञ्जीरमण्डितश्रीपदाम्बुजा — मणि-नूपुर से मंडित श्रीचरण-कमल वाली
- मरालीमन्दगमना — हंसिनी सम मंद गति वाली
- महालावण्यशेवधिः — महान लावण्य के कोश रूप
- सर्वारुणा — सर्वथा अरुण वर्ण वाली
- अनवद्याङ्गी — निर्दोष अंगों वाली
- सर्वाभरणभूषिता — समस्त आभूषणों से भूषित
- शिवकामेश्वराङ्कस्था — शिव-कामेश्वर की गोद में स्थित
- शिवा — कल्याणकारिणी
- स्वाधीनवल्लभा — जिनके वल्लभ (शिव) स्वाधीन हैं
- सुमेरुमध्यशृङ्गस्था — सुमेरु के मध्य शिखर पर स्थित
- श्रीमन्नगरनायिका — श्रीनगर (श्रीचक्र) की नायिका
- चिन्तामणिगृहान्तस्था — चिंतामणि-गृह में स्थित
- पञ्चब्रह्मासनस्थिता — पंच-ब्रह्म रूपी आसन पर स्थित
- महापद्माटवीसंस्था — महापद्म-वन में स्थित
- कदम्बवनवासिनी — कदंब-वन में निवास करने वाली
- सुधासागरमध्यस्था — अमृत-सागर के मध्य स्थित
- कामाक्षी — काम (इच्छा) पूर्ण करने वाले नेत्रों वाली
- कामदायिनी — कामनाएँ पूर्ण करने वाली
- देवर्षिगणसङ्घातस्तूयमानात्मवैभवा — देव-ऋषिगणों द्वारा स्तुत वैभव वाली
- भण्डासुरवधोद्युक्तशक्तिसेनासमन्विता — भण्डासुर-वध हेतु शक्ति-सेना से युक्त
- सम्पत्करीसमारूढसिन्धुरव्रजसेविता — संपत्करी पर आरूढ़ गज-समूह से सेवित
- अश्वारूढाधिष्ठिताश्वकोटिकोटिभिरावृता — अश्वारूढा सहित करोड़ों अश्वों से घिरी
- चक्रराजरथारूढसर्वायुधपरिष्कृता — चक्रराज-रथ पर आरूढ़ व सर्वायुध सज्जित
- गेयचक्ररथारूढमन्त्रिणीपरिसेविता — गेयचक्र-रथ पर मंत्रिणी (श्यामला) से सेवित
- किरिचक्ररथारूढदण्डनाथापुरस्कृता — किरिचक्र-रथ पर दण्डनाथा (वाराही) से युक्त
- ज्वालामालिनिकाक्षिप्तवह्निप्राकारमध्यगा — ज्वालामालिनी रचित अग्नि-प्राकार के मध्य स्थित
- भण्डसैन्यवधोद्युक्तशक्तिविक्रमहर्षिता — भण्ड-सैन्य वध में शक्तियों के पराक्रम से हर्षित
- नित्यापराक्रमाटोपनिरीक्षणसमुत्सुका — नित्या-शक्तियों के पराक्रम देखने को उत्सुक
- भण्डपुत्रवधोद्युक्तबालाविक्रमनन्दिता — भण्ड-पुत्रों के वध में बाला के पराक्रम से प्रसन्न
- मन्त्रिण्यम्बाविरचितविषङ्गवधतोषिता — मंत्रिणी-अम्बा द्वारा विषंग-वध से संतुष्ट
- विशुक्रप्राणहरणवाराहीवीर्यनन्दिता — वाराही द्वारा विशुक्र-वध से प्रसन्न
- कामेश्वरमुखालोककल्पितश्रीगणेश्वरा — कामेश्वर के मुख-दर्शन से गणेश को प्रकट करने वाली
- महागणेशनिर्भिन्नविघ्नयन्त्रप्रहर्षिता — महागणेश द्वारा विघ्न-यंत्र भंजन से हर्षित
- भण्डासुरेन्द्रनिर्मुक्तशस्त्रप्रत्यस्त्रवर्षिणी — भण्डासुर के शस्त्रों पर प्रत्यस्त्र बरसाने वाली
- कराङ्गुलिनखोत्पन्ननारायणदशाकृतिः — कर-अंगुलि-नखों से दश नारायण-अवतार प्रकट करने वाली
- महापाशुपतास्त्राग्निनिर्दग्धासुरसैनिका — महापाशुपतास्त्र-अग्नि से असुर-सैन्य भस्म करने वाली
- कामेश्वरास्त्रनिर्दग्धसभण्डासुरशून्यका — कामेश्वरास्त्र से भण्डासुर-सहित नगर शून्य करने वाली
- ब्रह्मोपेन्द्रमहेन्द्रादिदेवसंस्तुतवैभवा — ब्रह्मा-विष्णु-इंद्र आदि देवों से स्तुत वैभव वाली
- हरनेत्राग्निसन्दग्धकामसञ्जीवनौषधिः — शिव-नेत्राग्नि से दग्ध काम को जिलाने वाली औषधि रूप
- श्रीमद्वाग्भवकूटैकस्वरूपमुखपङ्कजा — श्रीविद्या के वाग्भव-कूट रूपी मुख-कमल वाली
- कण्ठाधःकटिपर्यन्तमध्यकूटस्वरूपिणी — कंठ से कटि तक मध्य-कूट स्वरूपा
- शक्तिकूटैकतापन्नकट्यधोभागधारिणी — शक्ति-कूट रूपी कटि-अधोभाग धारिणी
- मूलमन्त्रात्मिका — मूल-मंत्र स्वरूपा
- मूलकूटत्रयकलेवरा — तीन कूटों रूपी कलेवर वाली
- कुलामृतैकरसिका — कुल-अमृत की एकमात्र रसिका
- कुलसङ्केतपालिनी — कुल-संकेतों की रक्षक
- कुलाङ्गना — कुल-अंगना (कुलीन नारी) रूप
- कुलान्तस्था — कुल के भीतर स्थित
- कौलिनी — कौल-मार्ग की देवी
- कुलयोगिनी — कुल-योगिनी
- अकुला — कुल से परे
- समयान्तस्था — समयाचार में स्थित
- समयाचारतत्परा — समयाचार में तत्पर
- मूलाधारैकनिलया — मूलाधार में एकमात्र निवास करने वाली
- ब्रह्मग्रन्थिविभेदिनी — ब्रह्म-ग्रंथि का भेदन करने वाली
द्वितीय शतक (नाम 101–200)
- मणिपूरान्तरुदिता — मणिपूर चक्र में उदित
- विष्णुग्रन्थिविभेदिनी — विष्णु-ग्रंथि का भेदन करने वाली
- आज्ञाचक्रान्तरालस्था — आज्ञा-चक्र के भीतर स्थित
- रुद्रग्रन्थिविभेदिनी — रुद्र-ग्रंथि का भेदन करने वाली
- सहस्राराम्बुजारूढा — सहस्रार-कमल पर आरूढ़
- सुधासाराभिवर्षिणी — अमृत-धारा बरसाने वाली
- तटिल्लतासमरुचिः — विद्युत-लता सम कांति वाली
- षट्चक्रोपरिसंस्थिता — षट्चक्रों के ऊपर स्थित
- महाशक्तिः — महाशक्ति
- कुण्डलिनी — कुंडलिनी-शक्ति रूप
- बिसतन्तुतनीयसी — कमल-तंतु सम सूक्ष्म रूप
- भवानी — भव (शिव) की शक्ति
- भावनागम्या — भावना (ध्यान) से प्राप्य
- भवारण्यकुठारिका — संसार-वन के लिए कुठार रूप
- भद्रप्रिया — कल्याण की प्रेमी
- भद्रमूर्तिः — कल्याणमयी मूर्ति
- भक्तसौभाग्यदायिनी — भक्तों को सौभाग्य देने वाली
- भक्तिप्रिया — भक्ति की प्रेमी
- भक्तिगम्या — भक्ति से प्राप्य
- भक्तिवश्या — भक्ति के वश में होने वाली
- भयापहा — भय को दूर करने वाली
- शाम्भवी — शंभु (शिव) की शक्ति
- शारदाराध्या — शारदा द्वारा आराध्य
- शर्वाणी — शर्व (शिव) की पत्नी
- शर्मदायिनी — सुख प्रदान करने वाली
- शाङ्करी — शंकर की शक्ति
- श्रीकरी — श्री (शोभा) प्रदान करने वाली
- साध्वी — साध्वी (पतिव्रता)
- शरच्चन्द्रनिभानना — शरद्-चंद्र सम मुख वाली
- शातोदरी — कृश उदर वाली
- शान्तिमती — शांतिमयी
- निराधारा — आधार-रहित
- निरञ्जना — निर्मल (माया-रहित)
- निर्लेपा — निर्लिप्त
- निर्मला — निर्मल
- नित्या — नित्य (शाश्वत)
- निराकारा — निराकार
- निराकुला — व्याकुलता-रहित
- निर्गुणा — गुणों से परे
- निष्कला — कला-रहित (अखंड)
- शान्ता — शांत-स्वरूपा
- निष्कामा — कामना-रहित
- निरुपप्लवा — उपद्रव-रहित (अविनाशी)
- नित्यमुक्ता — नित्य मुक्त
- निर्विकारा — विकार-रहित
- निष्प्रपञ्चा — प्रपंच-रहित
- निराश्रया — आश्रय-रहित (स्वयं आधार)
- नित्यशुद्धा — नित्य शुद्ध
- नित्यबुद्धा — नित्य बुद्ध (ज्ञानमयी)
- निरवद्या — निर्दोष
- निरन्तरा — अविच्छिन्न (सर्वव्यापी)
- निष्कारणा — कारण-रहित
- निष्कलङ्का — कलंक-रहित
- निरुपाधिः — उपाधि-रहित
- निरीश्वरा — जिनसे परे कोई ईश्वर नहीं
- नीरागा — राग-रहित
- रागमथनी — राग का मथन करने वाली
- निर्मदा — मद-रहित
- मदनाशिनी — मद का नाश करने वाली
- निश्चिन्ता — चिंता-रहित
- निरहङ्कारा — अहंकार-रहित
- निर्मोहा — मोह-रहित
- मोहनाशिनी — मोह का नाश करने वाली
- निर्ममा — ममता-रहित
- ममताहन्त्री — ममता का नाश करने वाली
- निष्पापा — पाप-रहित
- पापनाशिनी — पापों का नाश करने वाली
- निष्क्रोधा — क्रोध-रहित
- क्रोधशमनी — क्रोध का शमन करने वाली
- निर्लोभा — लोभ-रहित
- लोभनाशिनी — लोभ का नाश करने वाली
- निःसंशया — संशय-रहित
- संशयघ्नी — संशय का नाश करने वाली
- निर्भवा — जन्म-रहित
- भवनाशिनी — संसार (जन्म-मरण) का नाश करने वाली
- निर्विकल्पा — विकल्प-रहित
- निराबाधा — बाधा-रहित
- निर्भेदा — भेद-रहित
- भेदनाशिनी — भेद का नाश करने वाली
- निर्नाशा — नाश-रहित
- मृत्युमथनी — मृत्यु का मथन करने वाली
- निष्क्रिया — क्रिया-रहित
- निष्परिग्रहा — परिग्रह-रहित
- निस्तुला — अतुलनीय
- नीलचिकुरा — नील केश वाली
- निरपाया — अविनाशी
- निरत्यया — अनतिक्रमणीय
- दुर्लभा — दुर्लभ
- दुर्गमा — दुर्गम
- दुर्गा — दुर्गम संकट हरने वाली
- दुःखहन्त्री — दुःखों का नाश करने वाली
- सुखप्रदा — सुख प्रदान करने वाली
- दुष्टदूरा — दुष्टों से दूर
- दुराचारशमनी — दुराचार का शमन करने वाली
- दोषवर्जिता — दोष-रहित
- सर्वज्ञा — सर्वज्ञ
- सान्द्रकरुणा — सघन करुणा वाली
- समानाधिकवर्जिता — जिनके समान या अधिक कोई नहीं
- सर्वशक्तिमयी — समस्त शक्तियों से युक्त
- सर्वमङ्गला — सबका मंगल करने वाली
तृतीय शतक (नाम 201–300)
- सद्गतिप्रदा — सद्गति प्रदान करने वाली
- सर्वेश्वरी — सबकी ईश्वरी
- सर्वमयी — सर्व-स्वरूपा
- सर्वमन्त्रस्वरूपिणी — समस्त मंत्र-स्वरूपा
- सर्वयन्त्रात्मिका — समस्त यंत्र-स्वरूपा
- सर्वतन्त्ररूपा — समस्त तंत्र-स्वरूपा
- मनोन्मनी — उन्मनी (परम चेतना) रूप
- माहेश्वरी — महेश्वर की शक्ति
- महादेवी — महादेवी
- महालक्ष्मी — महालक्ष्मी रूप
- मृडप्रिया — मृड (शिव) की प्रिया
- महारूपा — महान रूप वाली
- महापूज्या — परम पूज्या
- महापातकनाशिनी — महापातकों का नाश करने वाली
- महामाया — महामाया
- महासत्त्वा — महान सत्त्व वाली
- महाशक्तिः — महाशक्ति
- महारतिः — महान आनंद-स्वरूपा
- महाभोगा — महान भोग-स्वरूपा
- महैश्वर्या — महान ऐश्वर्य वाली
- महावीर्या — महान वीर्य वाली
- महाबला — महान बल वाली
- महाबुद्धिः — महान बुद्धि वाली
- महासिद्धिः — महान सिद्धि रूप
- महायोगेश्वरेश्वरी — महायोगेश्वरों की ईश्वरी
- महातन्त्रा — महान तंत्र-स्वरूपा
- महामन्त्रा — महान मंत्र-स्वरूपा
- महायन्त्रा — महान यंत्र-स्वरूपा
- महासना — महान आसन वाली
- महायागक्रमाराध्या — महायाग-क्रम से आराध्य
- महाभैरवपूजिता — महाभैरव द्वारा पूजित
- महेश्वरमहाकल्पमहाताण्डवसाक्षिणी — महेश्वर के महाताण्डव की साक्षी
- महाकामेशमहिषी — महाकामेश्वर की पटरानी
- महात्रिपुरसुन्दरी — महान त्रिपुरसुंदरी
- चतुःषष्ट्युपचाराढ्या — चौंसठ उपचारों से पूजित
- चतुःषष्टिकलामयी — चौंसठ कलाओं से युक्त
- महाचतुःषष्टिकोटियोगिनीगणसेविता — चौंसठ कोटि योगिनीगणों से सेवित
- मनुविद्या — मनु-विद्या रूप
- चन्द्रविद्या — चंद्र-विद्या रूप
- चन्द्रमण्डलमध्यगा — चंद्र-मंडल के मध्य स्थित
- चारुरूपा — सुंदर रूप वाली
- चारुहासा — सुंदर हास्य वाली
- चारुचन्द्रकलाधरा — सुंदर चंद्रकला धारण करने वाली
- चराचरजगन्नाथा — चर-अचर जगत् की स्वामिनी
- चक्रराजनिकेतना — श्रीचक्रराज में निवास करने वाली
- पार्वती — पर्वतराज की पुत्री
- पद्मनयना — कमल सम नेत्रों वाली
- पद्मरागसमप्रभा — पद्मराग-मणि सम कांति वाली
- पञ्चप्रेतासनासीना — पंच-प्रेत रूपी आसन पर आसीन
- पञ्चब्रह्मस्वरूपिणी — पंच-ब्रह्म स्वरूपा
- चिन्मयी — चित्-स्वरूपा
- परमानन्दा — परम आनंद रूप
- विज्ञानघनरूपिणी — विज्ञान-घन स्वरूपा
- ध्यानध्यातृध्येयरूपा — ध्यान-ध्याता-ध्येय स्वरूपा
- धर्माधर्मविवर्जिता — धर्म-अधर्म से परे
- विश्वरूपा — विश्व-स्वरूपा
- जागरिणी — जाग्रत अवस्था रूप
- स्वपन्ती — स्वप्न अवस्था रूप
- तैजसात्मिका — तैजस (स्वप्न-चेतना) रूप
- सुप्ता — सुषुप्ति अवस्था रूप
- प्राज्ञात्मिका — प्राज्ञ (सुषुप्ति-चेतना) रूप
- तुर्या — तुरीय अवस्था रूप
- सर्वावस्थाविवर्जिता — समस्त अवस्थाओं से परे
- सृष्टिकर्त्री — सृष्टि की कर्त्री
- ब्रह्मरूपा — ब्रह्मा रूप
- गोप्त्री — पालन (रक्षा) करने वाली
- गोविन्दरूपिणी — गोविंद (विष्णु) रूप
- संहारिणी — संहार करने वाली
- रुद्ररूपा — रुद्र रूप
- तिरोधानकरी — तिरोधान (लय) करने वाली
- ईश्वरी — ईश्वरी
- सदाशिवा — सदाशिव रूप
- अनुग्रहदा — अनुग्रह प्रदान करने वाली
- पञ्चकृत्यपरायणा — पंच-कृत्यों में तत्पर
- भानुमण्डलमध्यस्था — सूर्य-मंडल के मध्य स्थित
- भैरवी — भैरवी रूप
- भगमालिनी — भग-मालाधारिणी
- पद्मासना — कमल-आसन वाली
- भगवती — ऐश्वर्यमयी भगवती
- पद्मनाभसहोदरी — पद्मनाभ (विष्णु) की भगिनी
- उन्मेषनिमिषोत्पन्नविपन्नभुवनावली — पलक खुलने-मुँदने से लोकों की उत्पत्ति-लय करने वाली
- सहस्रशीर्षवदना — सहस्र शीर्ष व मुख वाली
- सहस्राक्षी — सहस्र नेत्रों वाली
- सहस्रपात् — सहस्र चरणों वाली
- आब्रह्मकीटजननी — ब्रह्मा से कीट तक की जननी
- वर्णाश्रमविधायिनी — वर्ण-आश्रम की विधायिका
- निजाज्ञारूपनिगमा — अपनी आज्ञा रूपी वेद वाली
- पुण्यापुण्यफलप्रदा — पुण्य-पाप का फल देने वाली
- श्रुतिसीमन्तसिन्दूरीकृतपादाब्जधूलिका — वेद रूपी सीमंत में सिंदूर बनी चरण-धूलि वाली
- सकलागमसन्दोहशुक्तिसम्पुटमौक्तिका — समस्त आगमों रूपी सीप में मोती रूप
- पुरुषार्थप्रदा — पुरुषार्थ (धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष) देने वाली
- पूर्णा — पूर्ण
- भोगिनी — भोग-स्वरूपा
- भुवनेश्वरी — भुवनों की ईश्वरी
- अम्बिका — जगज्जननी अम्बिका
- अनादिनिधना — आदि-अंत रहित
- हरिब्रह्मेन्द्रसेविता — विष्णु-ब्रह्मा-इंद्र द्वारा सेवित
- नारायणी — नारायण की शक्ति
- नादरूपा — नाद-स्वरूपा
- नामरूपविवर्जिता — नाम-रूप से परे
चतुर्थ शतक (नाम 301–400)
- ह्रींकारी — 'ह्रीं' बीज स्वरूपा
- ह्रीमती — लज्जाशीला
- हृद्या — हृदय को प्रिय
- हेयोपादेयवर्जिता — त्याज्य-ग्राह्य से परे
- राजराजार्चिता — राजाधिराजों द्वारा पूजित
- राज्ञी — महारानी
- रम्या — रमणीय
- राजीवलोचना — कमल सम नेत्रों वाली
- रञ्जनी — आनंदित करने वाली
- रमणी — रमण करने वाली (आह्लादिनी)
- रस्या — रस-स्वरूपा (आस्वाद्य)
- रणत्किङ्किणिमेखला — रुनझुन करधनी वाली
- रमा — रमा (लक्ष्मी) रूप
- राकेन्दुवदना — पूर्ण चंद्र सम मुख वाली
- रतिरूपा — रति-स्वरूपा
- रतिप्रिया — रति की प्रेमी
- रक्षाकरी — रक्षा करने वाली
- राक्षसघ्नी — राक्षसों का नाश करने वाली
- रामा — रमण करने वाली (मनोहरा)
- रमणलम्पटा — रमण (शिव) में अनुरक्त
- काम्या — कमनीय (वांछनीय)
- कामकलारूपा — काम-कला स्वरूपा
- कदम्बकुसुमप्रिया — कदंब-पुष्प की प्रेमी
- कल्याणी — कल्याणकारिणी
- जगतीकन्दा — जगत् के मूल (कंद) रूप
- करुणारससागरा — करुणा-रस के सागर
- कलावती — कलाओं से युक्त
- कलालापा — कलापूर्ण वाणी वाली
- कान्ता — मनोहर रूप वाली
- कादम्बरीप्रिया — कादंबरी (मधु) की प्रेमी
- वरदा — वर देने वाली
- वामनयना — सुंदर नेत्रों वाली
- वारुणीमदविह्वला — वारुणी-मद से विह्वल
- विश्वाधिका — विश्व से श्रेष्ठ
- वेदवेद्या — वेदों द्वारा ज्ञेय
- विन्ध्याचलनिवासिनी — विंध्याचल पर निवास करने वाली
- विधात्री — विधाता (रचयित्री)
- वेदजननी — वेदों की जननी
- विष्णुमाया — विष्णु की माया-शक्ति
- विलासिनी — विलासमयी
- क्षेत्रस्वरूपा — क्षेत्र (देह) स्वरूपा
- क्षेत्रेशी — क्षेत्र की ईश्वरी
- क्षेत्रक्षेत्रज्ञपालिनी — क्षेत्र व क्षेत्रज्ञ की पालक
- क्षयवृद्धिविनिर्मुक्ता — क्षय-वृद्धि से परे
- क्षेत्रपालसमर्चिता — क्षेत्रपालों द्वारा पूजित
- विजया — विजय-स्वरूपा
- विमला — निर्मल
- वन्द्या — वंदनीय
- वन्दारुजनवत्सला — वंदना करने वालों पर वत्सल
- वाग्वादिनी — वाणी की अधिष्ठात्री
- वामकेशी — सुंदर केश वाली
- वह्निमण्डलवासिनी — अग्नि-मंडल में वास करने वाली
- भक्तिमत्कल्पलतिका — भक्तों के लिए कल्पलता रूप
- पशुपाशविमोचिनी — जीव-बंधन से मुक्त करने वाली
- संहृताशेषपाषण्डा — समस्त पाखंडों का नाश करने वाली
- सदाचारप्रवर्तिका — सदाचार का प्रवर्तन करने वाली
- तापत्रयाग्निसन्तप्तसमाह्लादनचन्द्रिका — त्रिविध-ताप से तप्त जनों को शीतलता देने वाली चाँदनी
- तरुणी — नित्य-तरुणी
- तापसाराध्या — तपस्वियों द्वारा आराध्य
- तनुमध्या — कृश मध्यभाग वाली
- तमोपहा — अज्ञान-अंधकार दूर करने वाली
- चितिः — चिति (शुद्ध चेतना) रूप
- तत्पदलक्ष्यार्था — 'तत्' पद के लक्ष्यार्थ रूप
- चिदेकरसरूपिणी — चित्-एकरस स्वरूपा
- स्वात्मानन्दलवीभूतब्रह्माद्यानन्दसन्ततिः — जिनके आत्मानंद के लव से ब्रह्मादि का आनंद है
- परा — परा (सर्वोच्च वाणी) रूप
- प्रत्यक्चितीरूपा — अंतर्मुखी चेतना रूप
- पश्यन्ती — पश्यन्ती वाणी रूप
- परदेवता — परम देवता
- मध्यमा — मध्यमा वाणी रूप
- वैखरीरूपा — वैखरी वाणी रूप
- भक्तमानसहंसिका — भक्तों के मानस-सरोवर की हंसिनी
- कामेश्वरप्राणनाडी — कामेश्वर की प्राण-नाड़ी रूप
- कृतज्ञा — कृतज्ञ (किए को जानने वाली)
- कामपूजिता — कामदेव द्वारा पूजित
- श्रृङ्गाररससम्पूर्णा — शृंगार-रस से परिपूर्ण
- जया — विजय-स्वरूपा
- जालन्धरस्थिता — जालंधर-पीठ में स्थित
- ओड्याणपीठनिलया — ओड्याण-पीठ में निवास करने वाली
- बिन्दुमण्डलवासिनी — बिंदु-मंडल में वास करने वाली
- रहोयागक्रमाराध्या — रहस्य-याग क्रम से आराध्य
- रहस्तर्पणतर्पिता — रहस्य-तर्पण से तृप्त
- सद्यःप्रसादिनी — शीघ्र प्रसन्न होने वाली
- विश्वसाक्षिणी — विश्व की साक्षी
- साक्षिवर्जिता — साक्षी-भाव से भी परे
- षडङ्गदेवतायुक्ता — षडंग-देवताओं से युक्त
- षाड्गुण्यपरिपूरिता — छह ऐश्वर्य-गुणों से परिपूर्ण
- नित्यक्लिन्ना — सदा करुणा-आर्द्र
- निरुपमा — उपमा-रहित
- निर्वाणसुखदायिनी — निर्वाण-सुख प्रदान करने वाली
- नित्याषोडशिकारूपा — नित्या-षोडशी स्वरूपा
- श्रीकण्ठार्धशरीरिणी — श्रीकंठ (शिव) के अर्ध-शरीर वाली
- प्रभावती — प्रभा (तेज) वाली
- प्रभारूपा — प्रभा-स्वरूपा
- प्रसिद्धा — सर्वविख्यात
- परमेश्वरी — परम ईश्वरी
- मूलप्रकृतिः — मूल प्रकृति रूप
- अव्यक्ता — अव्यक्त
- व्यक्ताव्यक्तस्वरूपिणी — व्यक्त-अव्यक्त स्वरूपा
- व्यापिनी — सर्वव्यापिनी
पंचम शतक (नाम 401–500)
- विविधाकारा — विविध रूप वाली
- विद्याविद्यास्वरूपिणी — विद्या-अविद्या स्वरूपा
- महाकामेशनयनकुमुदाह्लादकौमुदी — महाकामेश के नयन-कुमुद को प्रफुल्लित करने वाली चाँदनी
- भक्ताहार्दतमोभेदभानुमद्भानुसन्ततिः — भक्तों के हृदय-तम का भेदन करने वाली सूर्य-किरण समूह
- शिवदूती — शिव को दूत बनाने वाली
- शिवाराध्या — शिव द्वारा आराध्य
- शिवमूर्तिः — शिवमयी मूर्ति
- शिवङ्करी — कल्याण करने वाली
- शिवप्रिया — शिव की प्रिया
- शिवपरा — शिव में तत्पर
- शिष्टेष्टा — शिष्टों को इष्ट
- शिष्टपूजिता — शिष्टजनों द्वारा पूजित
- अप्रमेया — अप्रमेय (अमाप्य)
- स्वप्रकाशा — स्वयं-प्रकाश रूप
- मनोवाचामगोचरा — मन-वाणी से परे
- चिच्छक्तिः — चित्-शक्ति रूप
- चेतनारूपा — चेतना स्वरूपा
- जडशक्तिः — जड-शक्ति रूप
- जडात्मिका — जड-स्वरूपा
- गायत्री — गायत्री रूप
- व्याहृतिः — व्याहृति (भूर्भुवः-स्वः) रूप
- सन्ध्या — संध्या-स्वरूपा
- द्विजवृन्दनिषेविता — ब्राह्मण-समूह द्वारा सेवित
- तत्त्वासना — तत्त्व रूपी आसन वाली
- तत् — 'तत्' (वह ब्रह्म) स्वरूपा
- त्वम् — 'त्वम्' (तू) स्वरूपा
- अयी — 'अयी' (हे माँ) संबोधन-स्वरूपा
- पञ्चकोशान्तरस्थिता — पंच-कोशों के भीतर स्थित
- निःसीममहिमा — असीम महिमा वाली
- नित्ययौवना — नित्य-यौवन वाली
- मदशालिनी — आनंद-मद से शोभित
- मदघूर्णितरक्ताक्षी — मद से घूर्णित लाल नेत्रों वाली
- मदपाटलगण्डभूः — मद से अरुण कपोलों वाली
- चन्दनद्रवदिग्धाङ्गी — चंदन-लेप से लिप्त अंगों वाली
- चाम्पेयकुसुमप्रिया — चंपा-पुष्प की प्रेमी
- कुशला — कुशल (निपुण)
- कोमलाकारा — कोमल रूप वाली
- कुरुकुल्ला — कुरुकुल्ला देवी रूप
- कुलेश्वरी — कुल की ईश्वरी
- कुलकुण्डालया — कुल-कुंड में निवास करने वाली
- कौलमार्गतत्परसेविता — कौल-मार्ग में तत्पर जनों द्वारा सेवित
- कुमारगणनाथाम्बा — कुमार (कार्तिकेय) व गणनाथ (गणेश) की माता
- तुष्टिः — तुष्टि (संतोष) रूप
- पुष्टिः — पुष्टि रूप
- मतिः — बुद्धि-स्वरूपा
- धृतिः — धैर्य-स्वरूपा
- शान्तिः — शांति-स्वरूपा
- स्वस्तिमती — कल्याणयुक्त
- कान्तिः — कांति (तेज) स्वरूपा
- नन्दिनी — आनंद देने वाली
- विघ्ननाशिनी — विघ्नों का नाश करने वाली
- तेजोवती — तेजमयी
- त्रिनयना — तीन नेत्रों वाली
- लोलाक्षीकामरूपिणी — चंचल नेत्रों वाली काम-रूपा
- मालिनी — माला धारण करने वाली
- हंसिनी — हंसिनी रूप
- माता — माता-स्वरूपा
- मलयाचलवासिनी — मलयाचल पर निवास करने वाली
- सुमुखी — सुंदर मुख वाली
- नलिनी — कमलिनी रूप
- सुभ्रूः — सुंदर भौंहों वाली
- शोभना — शोभायुक्त
- सुरनायिका — देवताओं की नायिका
- कालकण्ठी — नील-कंठ वाली (शिव-शक्ति)
- कान्तिमती — कांतियुक्त
- क्षोभिणी — क्षोभ (हलचल) उत्पन्न करने वाली
- सूक्ष्मरूपिणी — सूक्ष्म रूप वाली
- वज्रेश्वरी — वज्रेश्वरी रूप
- वामदेवी — वामदेव (शिव) की शक्ति
- वयोऽवस्थाविवर्जिता — आयु-अवस्थाओं से परे
- सिद्धेश्वरी — सिद्धों की ईश्वरी
- सिद्धविद्या — सिद्ध-विद्या रूप
- सिद्धमाता — सिद्धों की माता
- यशस्विनी — यशस्विनी
- विशुद्धिचक्रनिलया — विशुद्धि-चक्र में निवास करने वाली
- आरक्तवर्णा — रक्त-वर्णा
- त्रिलोचना — तीन नेत्रों वाली
- खट्वाङ्गादिप्रहरणा — खट्वांग आदि अस्त्र धारिणी
- वदनैकसमन्विता — एक मुख वाली
- पायसान्नप्रिया — पायस-अन्न की प्रेमी
- त्वक्स्था — त्वचा (धातु) में स्थित
- पशुलोकभयङ्करी — पशु-भाव वालों के लिए भयंकर
- अमृतादिमहाशक्तिसंवृता — अमृता आदि महाशक्तियों से घिरी
- डाकिनीश्वरी — डाकिनी-शक्ति की ईश्वरी
- अनाहताब्जनिलया — अनाहत-कमल में निवास करने वाली
- श्यामाभा — श्याम कांति वाली
- वदनद्वया — दो मुख वाली
- दंष्ट्रोज्ज्वला — उज्ज्वल दाढ़ों वाली
- अक्षमालादिधरा — जपमाला आदि धारण करने वाली
- रुधिरसंस्थिता — रुधिर (धातु) में स्थित
- कालरात्र्यादिशक्त्यौघवृता — कालरात्रि आदि शक्ति-समूह से घिरी
- स्निग्धौदनप्रिया — घृत-मिश्रित अन्न की प्रेमी
- महावीरेन्द्रवरदा — महावीरों को वर देने वाली
- राकिण्यम्बास्वरूपिणी — राकिणी-अम्बा स्वरूपा
- मणिपूराब्जनिलया — मणिपूर-कमल में निवास करने वाली
- वदनत्रयसंयुता — तीन मुख वाली
- वज्राधिकायुधोपेता — वज्र आदि आयुधों से युक्त
- डामर्यादिभिरावृता — डामरी आदि शक्तियों से घिरी
- रक्तवर्णा — रक्त-वर्णा
- मांसनिष्ठा — मांस (धातु) में स्थित
षष्ठ शतक (नाम 501–600)
- गुडान्नप्रीतमानसा — गुड़-अन्न से प्रसन्न मन वाली
- समस्तभक्तसुखदा — समस्त भक्तों को सुख देने वाली
- लाकिन्यम्बास्वरूपिणी — लाकिनी-अम्बा स्वरूपा
- स्वाधिष्ठानाम्बुजगता — स्वाधिष्ठान-कमल में स्थित
- चतुर्वक्त्रमनोहरा — चार मनोहर मुख वाली
- शूलाद्यायुधसम्पन्ना — शूल आदि आयुधों से सम्पन्न
- पीतवर्णा — पीत-वर्णा
- अतिगर्विता — अति गर्वयुक्त
- मेदोनिष्ठा — मेद (धातु) में स्थित
- मधुप्रीता — मधु से प्रसन्न
- बन्दिन्यादिसमन्विता — बंदिनी आदि शक्तियों से युक्त
- दध्यन्नासक्तहृदया — दधि-अन्न में अनुरक्त हृदय वाली
- काकिनीरूपधारिणी — काकिनी रूप धारण करने वाली
- मूलाधाराम्बुजारूढा — मूलाधार-कमल पर आरूढ़
- पञ्चवक्त्रा — पाँच मुख वाली
- अस्थिसंस्थिता — अस्थि (धातु) में स्थित
- अङ्कुशादिप्रहरणा — अंकुश आदि अस्त्र धारिणी
- वरदादिनिषेविता — वरदा आदि शक्तियों से सेवित
- मुद्गौदनासक्तचित्ता — मूँग-अन्न में अनुरक्त चित्त वाली
- साकिन्यम्बास्वरूपिणी — साकिनी-अम्बा स्वरूपा
- आज्ञाचक्राब्जनिलया — आज्ञा-चक्र-कमल में निवास करने वाली
- शुक्लवर्णा — श्वेत-वर्णा
- षडानना — छह मुख वाली
- मज्जासंस्था — मज्जा (धातु) में स्थित
- हंसवतीमुख्यशक्तिसमन्विता — हंसवती आदि मुख्य शक्तियों से युक्त
- हरिद्रान्नैकरसिका — हल्दी-अन्न की रसिका
- हाकिनीरूपधारिणी — हाकिनी रूप धारण करने वाली
- सहस्रदलपद्मस्था — सहस्रदल कमल में स्थित
- सर्ववर्णोपशोभिता — समस्त वर्णों से शोभित
- सर्वायुधधरा — समस्त आयुध धारण करने वाली
- शुक्लसंस्थिता — शुक्र (धातु) में स्थित
- सर्वतोमुखी — सब ओर मुख वाली
- सर्वौदनप्रीतचित्ता — सब प्रकार के अन्न से प्रसन्न चित्त वाली
- याकिन्यम्बास्वरूपिणी — याकिनी-अम्बा स्वरूपा
- स्वाहा — स्वाहा-स्वरूपा
- स्वधा — स्वधा-स्वरूपा
- अमतिः — अज्ञान/मति-रहित अवस्था रूप
- मेधा — मेधा (धारणा-बुद्धि) रूप
- श्रुतिः — श्रुति (वेद) रूप
- स्मृतिः — स्मृति-स्वरूपा
- अनुत्तमा — जिनसे श्रेष्ठ कोई नहीं
- पुण्यकीर्तिः — पुण्य-कीर्ति वाली
- पुण्यलभ्या — पुण्य से प्राप्य
- पुण्यश्रवणकीर्तना — जिनका श्रवण-कीर्तन पुण्यकारी है
- पुलोमजार्चिता — शची (पुलोमजा) द्वारा पूजित
- बन्धमोचनी — बंधन से मुक्त करने वाली
- बर्बरालका — घुँघराले केश वाली
- विमर्शरूपा — विमर्श (आत्म-चेतना) स्वरूपा
- विद्या — विद्या-स्वरूपा
- वियदादिजगत्प्रसूः — आकाश आदि जगत् की जननी
- सर्वव्याधिप्रशमनी — समस्त व्याधियों का शमन करने वाली
- सर्वमृत्युनिवारिणी — समस्त मृत्यु का निवारण करने वाली
- अग्रगण्या — सर्वप्रथम गणनीय (श्रेष्ठ)
- अचिन्त्यरूपा — अचिंत्य रूप वाली
- कलिकल्मषनाशिनी — कलियुग के पापों का नाश करने वाली
- कात्यायनी — कात्यायन-गोत्र में अवतरित
- कालहन्त्री — काल (मृत्यु) का नाश करने वाली
- कमलाक्षनिषेविता — विष्णु (कमलाक्ष) द्वारा सेवित
- ताम्बूलपूरितमुखी — ताम्बूल युक्त मुख वाली
- दाडिमीकुसुमप्रभा — अनार-पुष्प सम कांति वाली
- मृगाक्षी — मृग सम नेत्रों वाली
- मोहिनी — मोहित करने वाली
- मुख्या — प्रमुख (आदि कारण)
- मृडानी — मृड (शिव) की पत्नी
- मित्ररूपिणी — मित्र (हितैषी) स्वरूपा
- नित्यतृप्ता — नित्य तृप्त
- भक्तनिधिः — भक्तों के निधि
- नियन्त्री — नियंत्रण करने वाली
- निखिलेश्वरी — समस्त की ईश्वरी
- मैत्र्यादिवासनालभ्या — मैत्री आदि भावनाओं से प्राप्य
- महाप्रलयसाक्षिणी — महाप्रलय की साक्षी
- पराशक्तिः — परम शक्ति
- परानिष्ठा — परम निष्ठा रूप
- प्रज्ञानघनरूपिणी — प्रज्ञान-घन स्वरूपा
- माध्वीपानालसा — मधु-पान से अलसाई हुई
- मत्ता — आनंद-मत्त
- मातृकावर्णरूपिणी — मातृका-वर्णों (अक्षरों) स्वरूपा
- महाकैलासनिलया — महाकैलास में निवास करने वाली
- मृणालमृदुदोर्लता — कमल-नाल सम कोमल भुजा-लता वाली
- महनीया — पूजनीय
- महासाम्राज्यशालिनी — महान साम्राज्य से सुशोभित
- आत्मविद्या — आत्म-विद्या रूप
- महाविद्या — महाविद्या रूप
- श्रीविद्या — श्रीविद्या रूप
- कामसेविता — कामदेव द्वारा सेवित
- श्रीषोडशाक्षरीविद्या — श्री षोडशाक्षरी विद्या रूप
- त्रिकूटा — तीन कूटों वाली
- कामकोटिका — काम-कोटि रूप
- कटाक्षकिङ्करीभूतकमलाकोटिसेविता — जिनके कटाक्ष से किंकरी बनी करोड़ों लक्ष्मियों द्वारा सेवित
- शिरःस्थिता — शिर (सहस्रार) में स्थित
- चन्द्रनिभा — चंद्र सम कांति वाली
- भालस्था — भाल में स्थित
- इन्द्रधनुःप्रभा — इंद्रधनुष सम प्रभा वाली
- हृदयस्था — हृदय में स्थित
- रविप्रख्या — सूर्य सम तेजस्वी
- त्रिकोणान्तरदीपिका — त्रिकोण के भीतर दीप्त ज्योति
- दाक्षायणी — दक्ष की पुत्री (सती)
- दैत्यहन्त्री — दैत्यों का नाश करने वाली
- दक्षयज्ञविनाशिनी — दक्ष-यज्ञ का विनाश करने वाली
- दरान्दोलितदीर्घाक्षी — किंचित् आंदोलित दीर्घ नेत्रों वाली
सप्तम शतक (नाम 601–700)
- दरहासोज्ज्वलन्मुखी — मंद-हास से उज्ज्वल मुख वाली
- गुरुमूर्तिः — गुरु-स्वरूप मूर्ति
- गुणनिधिः — गुणों के निधि
- गोमाता — गौओं (इंद्रियों/वाणी) की माता
- गुहजन्मभूः — गुह (कार्तिकेय) की जन्मभूमि
- देवेशी — देवों की ईश्वरी
- दण्डनीतिस्था — दंडनीति में स्थित
- दहराकाशरूपिणी — हृदय-आकाश (दहर) स्वरूपा
- प्रतिपन्मुख्यराकान्ततिथिमण्डलपूजिता — प्रतिपदा से पूर्णिमा तक तिथि-मंडल द्वारा पूजित
- कलात्मिका — कला-स्वरूपा
- कलानाथा — कलाओं की स्वामिनी
- काव्यालापविनोदिनी — काव्य-आलाप में विनोद करने वाली
- सचामररमावाणीसव्यदक्षिणसेविता — बायें-दायें रमा व वाणी द्वारा चामर से सेवित
- आदिशक्तिः — आदि शक्ति
- अमेया — अमेय (अमाप्य)
- आत्मा — आत्म-स्वरूपा
- परमा — परम
- पावनाकृतिः — पावन आकृति वाली
- अनेककोटिब्रह्माण्डजननी — अनेक कोटि ब्रह्मांडों की जननी
- दिव्यविग्रहा — दिव्य विग्रह (रूप) वाली
- क्लीङ्कारी — 'क्लीं' बीज स्वरूपा
- केवला — केवल (शुद्ध) स्वरूपा
- गुह्या — गुह्य (गोपनीय)
- कैवल्यपददायिनी — कैवल्य (मोक्ष) पद देने वाली
- त्रिपुरा — त्रिपुरा रूप
- त्रिजगद्वन्द्या — तीनों लोकों द्वारा वंदनीय
- त्रिमूर्तिः — त्रिमूर्ति स्वरूपा
- त्रिदशेश्वरी — देवताओं की ईश्वरी
- त्र्यक्षरी — तीन अक्षरों (बीजों) वाली
- दिव्यगन्धाढ्या — दिव्य सुगंध से युक्त
- सिन्दूरतिलकाञ्चिता — सिंदूर-तिलक से सुशोभित
- उमा — उमा (पार्वती) रूप
- शैलेन्द्रतनया — पर्वतराज की पुत्री
- गौरी — गौर-वर्णा
- गन्धर्वसेविता — गंधर्वों द्वारा सेवित
- विश्वगर्भा — जिनके गर्भ में विश्व है
- स्वर्णगर्भा — स्वर्ण-गर्भा (हिरण्यगर्भ शक्ति)
- अवरदा — रक्षा करने वाली / वर देने वाली
- वागधीश्वरी — वाणी की अधीश्वरी
- ध्यानगम्या — ध्यान से प्राप्य
- अपरिच्छेद्या — जिनका परिच्छेद (सीमा) न हो
- ज्ञानदा — ज्ञान प्रदान करने वाली
- ज्ञानविग्रहा — ज्ञान-स्वरूप विग्रह वाली
- सर्ववेदान्तसंवेद्या — समस्त वेदांत द्वारा ज्ञेय
- सत्यानन्दस्वरूपिणी — सत्य-आनंद स्वरूपा
- लोपामुद्रार्चिता — लोपामुद्रा द्वारा पूजित
- लीलाक्लृप्तब्रह्माण्डमण्डला — लीला से ब्रह्मांड-मंडल रचने वाली
- अदृश्या — अदृश्य
- दृश्यरहिता — दृश्य से रहित
- विज्ञात्री — सर्वज्ञाता
- वेद्यवर्जिता — ज्ञेय-भाव से परे
- योगिनी — योगिनी रूप
- योगदा — योग प्रदान करने वाली
- योग्या — योग्य (आराधना-योग्य)
- योगानन्दा — योग-आनंद स्वरूपा
- युगन्धरा — युगों को धारण करने वाली
- इच्छाशक्तिज्ञानशक्तिक्रियाशक्तिस्वरूपिणी — इच्छा-ज्ञान-क्रिया शक्ति स्वरूपा
- सर्वाधारा — सबकी आधार
- सुप्रतिष्ठा — सुदृढ़ प्रतिष्ठा वाली
- सदसद्रूपधारिणी — सत्-असत् रूप धारण करने वाली
- अष्टमूर्तिः — आठ मूर्ति (रूप) वाली
- अजाजैत्री — अजा (माया) को जीतने वाली
- लोकयात्राविधायिनी — लोक-व्यवहार का संचालन करने वाली
- एकाकिनी — अद्वितीय (एकाकी)
- भूमरूपा — भूमा (अनंत वैभव) स्वरूपा
- निर्द्वैता — द्वैत-रहित
- द्वैतवर्जिता — द्वैत से परे
- अन्नदा — अन्न प्रदान करने वाली
- वसुदा — धन प्रदान करने वाली
- वृद्धा — पुरातन (आदि)
- ब्रह्मात्मैक्यस्वरूपिणी — ब्रह्म-आत्मा की एकता स्वरूपा
- बृहती — विशाल (व्यापक)
- ब्राह्मणी — ब्रह्म-शक्ति रूप
- ब्राह्मी — ब्रह्मा की शक्ति
- ब्रह्मानन्दा — ब्रह्म-आनंद स्वरूपा
- बलिप्रिया — बलि (भक्ति-अर्पण) की प्रेमी
- भाषारूपा — समस्त भाषा-स्वरूपा
- बृहत्सेना — विशाल सेना वाली
- भावाभावविवर्जिता — भाव-अभाव से परे
- सुखाराध्या — सुगमता से आराध्य
- शुभकरी — कल्याण करने वाली
- शोभनासुलभागतिः — शुभ व सुलभ गति देने वाली
- राजराजेश्वरी — राजाधिराजों की ईश्वरी
- राज्यदायिनी — राज्य प्रदान करने वाली
- राज्यवल्लभा — राज्य की प्रिय (रक्षक)
- राजत्कृपा — देदीप्यमान कृपा वाली
- राजपीठनिवेशितनिजाश्रिता — अपने आश्रितों को राज-सिंहासन पर बैठाने वाली
- राज्यलक्ष्मीः — राज्य की लक्ष्मी
- कोशनाथा — कोश (भंडार) की स्वामिनी
- चतुरङ्गबलेश्वरी — चतुरंग सेना की ईश्वरी
- साम्राज्यदायिनी — साम्राज्य प्रदान करने वाली
- सत्यसन्धा — सत्य-प्रतिज्ञ
- सागरमेखला — समुद्र रूपी मेखला (पृथ्वी) वाली
- दीक्षिता — दीक्षा देने वाली
- दैत्यशमनी — दैत्यों का शमन करने वाली
- सर्वलोकवशंकरी — समस्त लोकों को वश में करने वाली
- सर्वार्थदात्री — समस्त अर्थ (प्रयोजन) देने वाली
- सावित्री — सावित्री रूप
- सच्चिदानन्दरूपिणी — सत्-चित्-आनंद स्वरूपा
- देशकालापरिच्छिन्ना — देश-काल से असीमित
अष्टम शतक (नाम 701–800)
- सर्वगा — सर्वव्यापिनी
- सर्वमोहिनी — सबको मोहित करने वाली
- सरस्वती — सरस्वती रूप
- शास्त्रमयी — समस्त शास्त्र-स्वरूपा
- गुहाम्बा — गुह (कार्तिकेय) की माता
- गुह्यरूपिणी — गुह्य (गूढ़) स्वरूपा
- सर्वोपाधिविनिर्मुक्ता — समस्त उपाधियों से मुक्त
- सदाशिवपतिव्रता — सदाशिव की पतिव्रता
- सम्प्रदायेश्वरी — संप्रदायों की ईश्वरी
- साध्वी — साध्वी (पतिव्रता)
- गुरुमण्डलरूपिणी — गुरु-मंडल स्वरूपा
- कुलोत्तीर्णा — कुल (मार्ग) से परे
- भगाराध्या — भग (ऐश्वर्य) रूप में आराध्य
- माया — माया-स्वरूपा
- मधुमती — मधुर बुद्धि वाली
- मही — पृथ्वी-स्वरूपा
- गणाम्बा — गणों की माता
- गुह्यकाराध्या — गुह्यकों (यक्षों) द्वारा आराध्य
- कोमलाङ्गी — कोमल अंगों वाली
- गुरुप्रिया — गुरु की प्रिय
- स्वतन्त्रा — स्वतंत्र
- सर्वतन्त्रेशी — समस्त तंत्रों की ईश्वरी
- दक्षिणामूर्तिरूपिणी — दक्षिणामूर्ति स्वरूपा
- सनकादिसमाराध्या — सनकादि मुनियों द्वारा आराध्य
- शिवज्ञानप्रदायिनी — शिव-ज्ञान प्रदान करने वाली
- चित्कला — चित्-कला रूप
- आनन्दकलिका — आनंद की कलिका रूप
- प्रेमरूपा — प्रेम-स्वरूपा
- प्रियङ्करी — प्रिय करने वाली
- नामपारायणप्रीता — नाम-पारायण से प्रसन्न
- नन्दिविद्या — नंदि-विद्या रूप
- नटेश्वरी — नटराज (शिव) की शक्ति
- मिथ्याजगदधिष्ठाना — मिथ्या जगत् का अधिष्ठान
- मुक्तिदा — मुक्ति प्रदान करने वाली
- मुक्तिरूपिणी — मुक्ति-स्वरूपा
- लास्यप्रिया — लास्य-नृत्य की प्रेमी
- लयकरी — लय (प्रलय) करने वाली
- लज्जा — लज्जा-स्वरूपा
- रम्भादिवन्दिता — रंभा आदि अप्सराओं द्वारा वंदित
- भवदावसुधावृष्टिः — संसार-दावानल पर अमृत-वृष्टि रूप
- पापारण्यदवानला — पाप रूपी वन के लिए दावाग्नि
- दौर्भाग्यतूलवातूला — दुर्भाग्य रूपी रुई के लिए आँधी
- जराध्वान्तरविप्रभा — जरा रूपी अंधकार के लिए सूर्य-प्रभा
- भाग्याब्धिचन्द्रिका — भाग्य-सागर को बढ़ाने वाली चाँदनी
- भक्तचित्तकेकिघनाघना — भक्त-चित्त रूपी मयूर के लिए सघन मेघ
- रोगपर्वतदम्भोलिः — रोग रूपी पर्वत के लिए वज्र
- मृत्युदारुकुठारिका — मृत्यु रूपी वृक्ष के लिए कुठार
- महेश्वरी — महेश्वरी
- महाकाली — महाकाली रूप
- महाग्रासा — महाग्रास (संहार-शक्ति) रूप
- महाशना — महान भोक्त्री
- अपर्णा — तप में पर्ण भी त्यागने वाली
- चण्डिका — प्रचंड रूपा
- चण्डमुण्डासुरनिषूदिनी — चंड-मुंड असुरों का नाश करने वाली
- क्षराक्षरात्मिका — क्षर-अक्षर स्वरूपा
- सर्वलोकेशी — समस्त लोकों की ईश्वरी
- विश्वधारिणी — विश्व को धारण करने वाली
- त्रिवर्गदात्री — धर्म-अर्थ-काम तीनों देने वाली
- सुभगा — सौभाग्यवती
- त्र्यम्बका — तीन नेत्रों वाली
- त्रिगुणात्मिका — तीन गुण स्वरूपा
- स्वर्गापवर्गदा — स्वर्ग व मोक्ष देने वाली
- शुद्धा — शुद्ध-स्वरूपा
- जपापुष्पनिभाकृतिः — जपा-पुष्प सम आकृति वाली
- ओजोवती — ओज (तेज) से युक्त
- द्युतिधरा — कांति धारण करने वाली
- यज्ञरूपा — यज्ञ-स्वरूपा
- प्रियव्रता — व्रतों में प्रिय
- दुराराध्या — कठिनता से आराध्य
- दुराधर्षा — जिन पर आक्रमण न हो सके
- पाटलीकुसुमप्रिया — पाटली-पुष्प की प्रेमी
- महती — महान
- मेरुनिलया — मेरु पर निवास करने वाली
- मन्दारकुसुमप्रिया — मंदार-पुष्प की प्रेमी
- वीराराध्या — वीरों (साधकों) द्वारा आराध्य
- विराड्रूपा — विराट् स्वरूपा
- विरजसे — रजोगुण-रहित
- विश्वतोमुखी — सब ओर मुख वाली
- प्रत्यग्रूपा — अंतरात्मा स्वरूपा
- पराकाशा — परम आकाश रूप
- प्राणदा — प्राण प्रदान करने वाली
- प्राणरूपिणी — प्राण-स्वरूपा
- मार्ताण्डभैरवाराध्या — मार्तंड-भैरव द्वारा आराध्य
- मन्त्रिणीन्यस्तराज्यधूः — मंत्रिणी को राज्य-भार सौंपने वाली
- त्रिपुरेशी — त्रिपुर की ईश्वरी
- जयत्सेना — विजयी सेना वाली
- निस्त्रैगुण्या — तीन गुणों से परे
- परापरा — पर व अपर स्वरूपा
- सत्यज्ञानानन्दरूपा — सत्य-ज्ञान-आनंद स्वरूपा
- सामरस्यपरायणा — सामरस्य (शिव-शक्ति ऐक्य) में तत्पर
- कपर्दिनी — जटाधारी (शिव-शक्ति)
- कलामाला — कलाओं की माला वाली
- कामधुक् — कामधेनु (इच्छा-पूर्ति) रूप
- कामरूपिणी — इच्छानुसार रूप धारण करने वाली
- कलानिधिः — कलाओं के निधि
- काव्यकला — काव्य-कला रूप
- रसज्ञा — रस की ज्ञाता
- रसशेवधिः — रस के कोश रूप
- पुष्टा — पुष्ट (परिपूर्ण)
- पुरातना — अति प्राचीन
नवम शतक (नाम 801–900)
- पूज्या — पूजनीय
- पुष्करा — पुष्कर (पावन) रूप
- पुष्करेक्षणा — कमल सम नेत्रों वाली
- परंज्योतिः — परम ज्योति
- परंधाम — परम धाम
- परमाणुः — परम-अणु (सूक्ष्मतम) रूप
- परात्परा — परे से भी परे
- पाशहस्ता — हाथ में पाश वाली
- पाशहन्त्री — पाश (बंधन) का नाश करने वाली
- परमन्त्रविभेदिनी — शत्रु-मंत्रों का भेदन करने वाली
- मूर्ता — साकार रूप
- अमूर्ता — निराकार रूप
- अनित्यतृप्ता — अनित्य से अतृप्त (नित्य में तृप्त)
- मुनिमानसहंसिका — मुनियों के मानस की हंसिनी
- सत्यव्रता — सत्य-व्रत वाली
- सत्यरूपा — सत्य-स्वरूपा
- सर्वान्तर्यामिणी — सबके अंतर्यामी
- सती — सती (पतिव्रता)
- ब्रह्माणी — ब्रह्मा की शक्ति
- ब्रह्म — ब्रह्म-स्वरूपा
- जननी — जगत् की जननी
- बहुरूपा — अनेक रूप वाली
- बुधार्चिता — बुधजनों (विद्वानों) द्वारा पूजित
- प्रसवित्री — जगत् को जन्म देने वाली
- प्रचण्डा — अति प्रचंड
- आज्ञा — आज्ञा (शासन) स्वरूपा
- प्रतिष्ठा — प्रतिष्ठा (आधार) रूप
- प्रकटाकृतिः — प्रकट आकृति वाली
- प्राणेश्वरी — प्राणों की ईश्वरी
- प्राणदात्री — प्राण देने वाली
- पञ्चाशत्पीठरूपिणी — पचास पीठ (अक्षर) स्वरूपा
- विशृङ्खला — बंधन-रहित
- विविक्तस्था — एकांत में स्थित
- वीरमाता — वीरों की माता
- वियत्प्रसूः — आकाश की जननी
- मुकुन्दा — मुक्ति देने वाली
- मुक्तिनिलया — मुक्ति का निवास
- मूलविग्रहरूपिणी — मूल विग्रह स्वरूपा
- भावज्ञा — भावों (हृदय) को जानने वाली
- भवरोगघ्नी — संसार-रोग का नाश करने वाली
- भवचक्रप्रवर्तिनी — संसार-चक्र का प्रवर्तन करने वाली
- छन्दःसारा — छंदों का सार
- शास्त्रसारा — शास्त्रों का सार
- मन्त्रसारा — मंत्रों का सार
- तलोदरी — कृश उदर वाली
- उदारकीर्तिः — उदार कीर्ति वाली
- उद्दामवैभवा — अपरिमित वैभव वाली
- वर्णरूपिणी — अक्षर-स्वरूपा
- जन्ममृत्युजरातप्तजनविश्रान्तिदायिनी — जन्म-मृत्यु-जरा से तप्त जनों को विश्रांति देने वाली
- सर्वोपनिषदुद्घुष्टा — समस्त उपनिषदों द्वारा घोषित
- शान्त्यतीतकलात्मिका — शांत्यतीत कला स्वरूपा
- गम्भीरा — गंभीर-स्वरूपा
- गगनान्तस्था — आकाश के भीतर स्थित
- गर्विता — गौरवयुक्त
- गानलोलुपा — गान (संगीत) की प्रेमी
- कल्पनारहिता — कल्पना से परे
- काष्ठा — काष्ठा (परम सीमा) रूप
- अकान्ता — जिनसे प्रिय कोई नहीं / नित्य रमणीय
- कान्तार्धविग्रहा — कांत (शिव) के अर्ध-शरीर वाली
- कार्यकारणनिर्मुक्ता — कार्य-कारण से मुक्त
- कामकेलितरङ्गिता — काम-क्रीड़ा में तरंगित
- कनत्कनकताटङ्का — चमकते स्वर्ण-कुंडल वाली
- लीलाविग्रहधारिणी — लीला हेतु विग्रह धारण करने वाली
- अजा — अजन्मा
- क्षयविनिर्मुक्ता — क्षय (नाश) से मुक्त
- मुग्धा — मनोहर (सरल) रूप
- क्षिप्रप्रसादिनी — शीघ्र प्रसन्न होने वाली
- अन्तर्मुखसमाराध्या — अंतर्मुखी साधकों द्वारा आराध्य
- बहिर्मुखसुदुर्लभा — बहिर्मुखी जनों को अति दुर्लभ
- त्रयी — तीन वेद स्वरूपा
- त्रिवर्गनिलया — धर्म-अर्थ-काम का निवास
- त्रिस्था — तीनों (अवस्थाओं/लोकों) में स्थित
- त्रिपुरमालिनी — त्रिपुर-मालिनी रूप
- निरामया — रोग-रहित
- निरालम्बा — आलंबन-रहित (स्वयं आधार)
- स्वात्मारामा — आत्मा में रमण करने वाली
- सुधासृष्टिः — अमृत-सृष्टि रूप
- संसारपङ्कनिर्मग्नसमुद्धरणपण्डिता — संसार-कीचड़ में डूबे जनों के उद्धार में निपुण
- यज्ञप्रिया — यज्ञ की प्रेमी
- यज्ञकर्त्री — यज्ञ की कर्त्री
- यजमानस्वरूपिणी — यजमान स्वरूपा
- धर्माधारा — धर्म की आधार
- धनाध्यक्षा — धन की अध्यक्ष
- धनधान्यविवर्धिनी — धन-धान्य बढ़ाने वाली
- विप्रप्रिया — विप्रों (ब्राह्मणों) की प्रेमी
- विप्ररूपा — विप्र-स्वरूपा
- विश्वभ्रमणकारिणी — विश्व को भ्रमण कराने वाली
- विश्वग्रासा — विश्व का ग्रास (संहार) करने वाली
- विद्रुमाभा — मूँगा सम कांति वाली
- वैष्णवी — विष्णु की शक्ति
- विष्णुरूपिणी — विष्णु-स्वरूपा
- अयोनिः — योनि (जन्म) रहित
- योनिनिलया — समस्त की उत्पत्ति-स्थान
- कूटस्था — कूटस्थ (अचल) रूप
- कुलरूपिणी — कुल-स्वरूपा
- वीरगोष्ठीप्रिया — वीर-साधकों की गोष्ठी की प्रेमी
- वीरा — वीर-स्वरूपा
- नैष्कर्म्या — निष्काम-कर्म स्वरूपा
- नादरूपिणी — नाद-स्वरूपा
- विज्ञानकलना — विज्ञान की प्रेरक
दशम शतक (नाम 901–998)
- कल्या — कल्याणमयी
- विदग्धा — चतुर (निपुण)
- बैन्दवासना — बिंदु को आसन बनाने वाली
- तत्त्वाधिका — तत्त्वों से श्रेष्ठ
- तत्त्वमयी — तत्त्व-स्वरूपा
- तत्त्वमर्थस्वरूपिणी — 'तत्त्वमसि' के अर्थ स्वरूपा
- सामगानप्रिया — सामगान की प्रेमी
- सौम्या — सौम्य-स्वरूपा
- सदाशिवकुटुम्बिनी — सदाशिव की गृहिणी
- सव्यापसव्यमार्गस्था — दक्षिण व वाम दोनों मार्गों में स्थित
- सर्वापद्विनिवारिणी — समस्त आपदाओं का निवारण करने वाली
- स्वस्था — आत्मस्थ (स्वस्थ)
- स्वभावमधुरा — स्वभाव से मधुर
- धीरा — धीर-स्वरूपा
- धीरसमर्चिता — धीर (विवेकी) जनों द्वारा पूजित
- चैतन्यार्घ्यसमाराध्या — चैतन्य रूपी अर्घ्य से आराध्य
- चैतन्यकुसुमप्रिया — चैतन्य रूपी पुष्प की प्रेमी
- सदोदिता — सदा उदित (प्रकाशमान)
- सदातुष्टा — सदा संतुष्ट
- तरुणादित्यपाटला — उदित सूर्य सम अरुण आभा वाली
- दक्षिणादक्षिणाराध्या — दक्षिण व वाम दोनों मार्गों से आराध्य
- दरस्मेरमुखाम्बुजा — मंद-स्मित मुख-कमल वाली
- कौलिनीकेवला — कौलिनी व केवल स्वरूपा
- अनर्घ्यकैवल्यपददायिनी — अमूल्य कैवल्य-पद देने वाली
- स्तोत्रप्रिया — स्तोत्र की प्रेमी
- स्तुतिमती — स्तुति से प्रसन्न होने वाली
- श्रुतिसंस्तुतवैभवा — वेदों द्वारा स्तुत वैभव वाली
- मनस्विनी — मनस्विनी (तेजस्वी मन वाली)
- मानवती — मान (गौरव) वाली
- महेशी — महेश्वरी
- मङ्गलाकृतिः — मंगलमयी आकृति वाली
- विश्वमाता — विश्व की माता
- जगद्धात्री — जगत् को धारण करने वाली
- विशालाक्षी — विशाल नेत्रों वाली
- विरागिणी — विरक्त (राग-रहित)
- प्रगल्भा — प्रगल्भ (समर्थ)
- परमोदारा — परम उदार
- परामोदा — परम आनंद रूप
- मनोमयी — मनोमय
- व्योमकेशी — आकाश रूपी केश वाली
- विमानस्था — विमान में स्थित
- वज्रिणी — वज्र धारण करने वाली
- वामकेश्वरी — वामकेश्वर-तंत्र की देवी
- पञ्चयज्ञप्रिया — पंच-यज्ञों की प्रेमी
- पञ्चप्रेतमञ्चाधिशायिनी — पंच-प्रेत रूपी मंच पर शयन करने वाली
- पञ्चमी — पंचमी (शक्ति) रूप
- पञ्चभूतेशी — पंच-भूतों की ईश्वरी
- पञ्चसङ्ख्योपचारिणी — पंच-उपचारों से पूजित
- शाश्वती — शाश्वत (नित्य)
- शाश्वतैश्वर्या — शाश्वत ऐश्वर्य वाली
- शर्मदा — सुख प्रदान करने वाली
- शम्भुमोहिनी — शंभु को मोहित करने वाली
- धरा — धारण करने वाली (पृथ्वी)
- धरसुता — पर्वत (धर) की पुत्री
- धन्या — धन्य-स्वरूपा
- धर्मिणी — धर्मनिष्ठ
- धर्मवर्धिनी — धर्म को बढ़ाने वाली
- लोकातीता — लोकों से परे
- गुणातीता — गुणों से परे
- सर्वातीता — सबसे परे
- शमात्मिका — शम (शांति) स्वरूपा
- बन्धूककुसुमप्रख्या — बंधूक-पुष्प सम कांति वाली
- बाला — बाला (नित्य-किशोरी) रूप
- लीलाविनोदिनी — लीला में विनोद करने वाली
- सुमङ्गली — सौभाग्यवती
- सुखकरी — सुख देने वाली
- सुवेषाढ्या — सुंदर वेश से युक्त
- सुवासिनी — सुहागिन (सौभाग्यवती)
- सुवासिन्यर्चनप्रीता — सुवासिनी-पूजन से प्रसन्न
- आशोभना — अति शोभायुक्त
- शुद्धमानसा — शुद्ध मन वाली
- बिन्दुतर्पणसन्तुष्टा — बिंदु-तर्पण से संतुष्ट
- पूर्वजा — सबसे पूर्व उत्पन्न (आदि)
- त्रिपुराम्बिका — त्रिपुर की अम्बा
- दशमुद्रासमाराध्या — दश मुद्राओं से आराध्य
- त्रिपुराश्रीवशङ्करी — त्रिपुर-श्री को वश में करने वाली
- ज्ञानमुद्रा — ज्ञान-मुद्रा रूप
- ज्ञानगम्या — ज्ञान से प्राप्य
- ज्ञानज्ञेयस्वरूपिणी — ज्ञान व ज्ञेय स्वरूपा
- योनिमुद्रा — योनि-मुद्रा रूप
- त्रिखण्डेशी — त्रिखंड (मुद्रा) की ईश्वरी
- त्रिगुणा — तीन गुण स्वरूपा
- अम्बा — जगन्माता अम्बा
- त्रिकोणगा — त्रिकोण (यंत्र-मध्य) में स्थित
- अनघा — पाप-रहित
- अद्भुतचारित्रा — अद्भुत चरित्र वाली
- वाञ्छितार्थप्रदायिनी — वांछित अर्थ प्रदान करने वाली
- अभ्यासातिशयज्ञाता — निरंतर अभ्यास से ज्ञात
- षडध्वातीतरूपिणी — छह अध्वाओं से परे स्वरूपा
- अव्याजकरुणामूर्तिः — निष्कपट करुणा की मूर्ति
- अज्ञानध्वान्तदीपिका — अज्ञान-अंधकार के लिए दीपक
- आबालगोपविदिता — बालक से ग्वाले तक सबको विदित
- सर्वानुल्लङ्घ्यशासना — जिनका शासन कोई उल्लंघन न कर सके
- श्रीचक्रराजनिलया — श्रीचक्रराज में निवास करने वाली
- श्रीमत्त्रिपुरसुन्दरी — श्रीमती त्रिपुरसुंदरी
- श्रीशिवा — श्री-शिवा (कल्याणमयी)
- शिवशक्त्यैक्यरूपिणी — शिव-शक्ति की एकता स्वरूपा
- ललिताम्बिका — ललिता अम्बिका (परम जगन्माता)
अर्थ (हिन्दी)
- अरुण वर्ण वाली, करुणा से तरंगित नेत्रों वाली, पाश-अंकुश व पुष्प-बाण-धनुष धारण करने वाली, अणिमादि सिद्धियों से घिरी हुई भवानी का मैं "अहम्" रूप में ध्यान करता हूँ।
लाभ
- देवी की कृपा से समृद्धि, रक्षा व आध्यात्मिक उन्नति होती है।
- मन की एकाग्रता व सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
- रोग, दोष व नकारात्मकता का नाश होता है।
- श्रीविद्या उपासना में अत्यंत फलदायी।
कब करें पाठ
शुक्रवार को · नवरात्रि में · पूर्णिमा को
स्रोत
रचयिता: वाग्देवियाँ (हयग्रीव-अगस्त्य संवाद). ब्रह्माण्ड पुराण — ललितोपाख्यान (श्री ललिता सहस्रनामस्तोत्र)
