लक्ष्मी गायत्री मंत्र

lakṣmī gāyatrī mantra

Lakshmi Gayatri Mantra

समय
40 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
शुक्रवार व दीपावली
उद्देश्य:समृद्धि (Prosperity)धन प्राप्ति (Wealth)आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual Growth)
✓ संपूर्ण गायत्री मंत्र

लक्ष्मी गायत्री मंत्र — पारंपरिक लक्ष्मी गायत्री (गायत्री छंद)। हम महालक्ष्मी को जानते हैं और विष्णुपत्नी का ध्यान करते हैं; वे लक्ष्मी हमारी बुद्धि (व समृद्धि) को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें। परंपरा में इसे मुख्यतः समृद्धि, धन प्राप्ति, आध्यात्मिक उन्नति के भाव से जपा जाता है, प्रायः 108 बार अर्थात एक माला।

परिचय

माँ लक्ष्मी धन, समृद्धि और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी हैं — भगवान विष्णु की शक्ति।

स्रोत: पारंपरिक लक्ष्मी गायत्री (गायत्री छंद)

एक नज़र में

मंत्र / पाठलक्ष्मी गायत्री मंत्र
IASTlakṣmī gāyatrī mantra
प्रकारगायत्री मंत्र
देवतामाँ लक्ष्मी
मूल स्रोतपारंपरिक लक्ष्मी गायत्री (गायत्री छंद)
जप संख्या108
मालाकमलगट्टा या स्फटिक माला
शुभ दिनशुक्रवार व दीपावली
पाठ समय40 सेकंड
कठिनाईमध्यम

उद्भव / पृष्ठभूमि

लक्ष्मी गायत्री मंत्र पारंपरिक लक्ष्मी गायत्री (गायत्री छंद) के रूप में जाना जाता है। हम महालक्ष्मी को जानते हैं और विष्णुपत्नी का ध्यान करते हैं; वे लक्ष्मी हमारी बुद्धि (व समृद्धि) को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें।

मंत्र के प्रत्येक पद का अपना अर्थ है: महालक्ष्म्यै — महालक्ष्मी को; विद्महे — हम जानते हैं; विष्णुपत्न्यै — विष्णु की पत्नी को; धीमहि — हम ध्यान करते हैं; तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात् — वे लक्ष्मी हमें प्रेरित करें। इन्हीं पदों के मेल से पूरे मंत्र का भाव बनता है, इसलिए जप करते समय इनका स्मरण रखना उपयोगी कहा जाता है।

यह गायत्री छंद में रचा मंत्र है। गायत्री-वर्ग के मंत्रों में स्वर तथा छंद का विशेष विधान होता है, इसलिए परंपरा में इन्हें शुद्ध उच्चारण सहित सीखने पर बल दिया जाता है।

परंपरा में इसका जप 108 बार — एक माला — कहा जाता है, और इसके लिए कमलगट्टा या स्फटिक माला बताई जाती है। इसके लिए शुक्रवार व दीपावली विशेष कहे जाते हैं। परंपरा में यह भी कहा जाता है कि संख्या से अधिक महत्व नियमितता का है।

मंत्र

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ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि। तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥

लिपि बदलने के लिए ऊपर देवनागरी / IAST / Roman चुनें।

उच्चारण (Pronunciation)

ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि। तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥

oṃ mahālakṣmyai ca vidmahe viṣṇupatnyai ca dhīmahi | tanno lakṣmīḥ pracodayāt ||

Om Mahalakshmyai Cha Vidmahe Vishnupatnyai Cha Dhimahi, Tanno Lakshmih Prachodayat.

उच्चारण मार्गदर्शन: "महा-लक्ष्म्यै", "विद्-म-हे", "विष्णु-पत्न्यै", "धी-म-हि" स्पष्ट बोलें। "धीमहि" में "धी" दीर्घ; "प्रचोदयात्" का "त्" हल्का हलन्त।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

महालक्ष्म्यैमहालक्ष्मी को
विद्महेहम जानते हैं
विष्णुपत्न्यैविष्णु की पत्नी को
धीमहिहम ध्यान करते हैं
तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्वे लक्ष्मी हमें प्रेरित करें

अर्थ (हिन्दी)

  1. हम महालक्ष्मी को जानते हैं और विष्णुपत्नी का ध्यान करते हैं; वे लक्ष्मी हमारी बुद्धि (व समृद्धि) को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें।

लाभ

  • धन, समृद्धि व ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
  • मन में संतोष व स्थिरता आती है।
  • भौतिक व आध्यात्मिक दोनों उन्नति होती है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: कमलगट्टा या स्फटिक माला

उत्तम समय: प्रातः, संध्या व शुक्रवार

जप का उत्तम समय

शुक्रवार कोदीपावली व धनतेरस परप्रातः व संध्या पूजा में

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

लक्ष्मी जी का ध्यान करते हुए कमलगट्टे या स्फटिक माला से 108 बार जप करें। शुक्रवार व दीपावली को जप विशेष फलदायी होता है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराdrikpanchang.com — लक्ष्मी मंत्र (vedic-mantra सूची)
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

माँ लक्ष्मी

Goddess Lakshmi

माँ लक्ष्मी धन, समृद्धि और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी हैं — भगवान विष्णु की शक्ति।

देवता वर्गधन · समृद्धि · ऐश्वर्य · सौभाग्य
वाहनउल्लू
संबंधित वारशुक्रवार
मुख्य मंत्रॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
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