lakṣmī gāyatrī mantra
Lakshmi Gayatri Mantra
माँ लक्ष्मी धन, समृद्धि और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी हैं — भगवान विष्णु की शक्ति।
स्रोत: पारंपरिक लक्ष्मी गायत्री (गायत्री छंद)
ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि। तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥
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oṃ mahālakṣmyai ca vidmahe viṣṇupatnyai ca dhīmahi | tanno lakṣmīḥ pracodayāt ||
Om Mahalakshmyai Cha Vidmahe Vishnupatnyai Cha Dhimahi, Tanno Lakshmih Prachodayat.
उच्चारण मार्गदर्शन: "महा-लक्ष्म्यै", "विद्-म-हे", "विष्णु-पत्न्यै", "धी-म-हि" स्पष्ट बोलें। "धीमहि" में "धी" दीर्घ; "प्रचोदयात्" का "त्" हल्का हलन्त।
जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।
माला: कमलगट्टा या स्फटिक माला
उत्तम समय: प्रातः, संध्या व शुक्रवार
लक्ष्मी जी का ध्यान करते हुए कमलगट्टे या स्फटिक माला से 108 बार जप करें। शुक्रवार व दीपावली को जप विशेष फलदायी होता है।
Goddess Lakshmi
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