समय
40 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
शुक्रवार व दीपावली
उद्देश्य:समृद्धि (Prosperity)धन प्राप्ति (Wealth)आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual Growth)
✓ संपूर्ण गायत्री मंत्र
लक्ष्मी गायत्री मंत्र — पारंपरिक लक्ष्मी गायत्री (गायत्री छंद)। हम महालक्ष्मी को जानते हैं और विष्णुपत्नी का ध्यान करते हैं; वे लक्ष्मी हमारी बुद्धि (व समृद्धि) को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें। परंपरा में इसे मुख्यतः समृद्धि, धन प्राप्ति, आध्यात्मिक उन्नति के भाव से जपा जाता है, प्रायः 108 बार अर्थात एक माला।
FAQ
लक्ष्मी गायत्री मंत्र — सामान्य प्रश्न
यह धन-समृद्धि प्रदान करता है, मन में संतोष लाता है और भौतिक व आध्यात्मिक उन्नति में सहायक है।
शुक्रवार, दीपावली व नित्य प्रातः-संध्या में इसका जप विशेष लाभकारी है।
परंपरा में इस मंत्र का जप 108 बार — अर्थात एक माला — करने का विधान कहा जाता है, और इसके लिए कमलगट्टा या स्फटिक माला का प्रयोग बताया जाता है। जप का सुझाया गया समय प्रातः, संध्या व शुक्रवार है। संख्या से अधिक महत्व नियमितता तथा शुद्ध उच्चारण का माना गया है।
मंत्र के पदों का अर्थ इस प्रकार है — महालक्ष्म्यै — महालक्ष्मी को; विद्महे — हम जानते हैं; विष्णुपत्न्यै — विष्णु की पत्नी को; धीमहि — हम ध्यान करते हैं; तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात् — वे लक्ष्मी हमें प्रेरित करें। पूरे मंत्र का भाव यह है: हम महालक्ष्मी को जानते हैं और विष्णुपत्नी का ध्यान करते हैं; वे लक्ष्मी हमारी बुद्धि (व समृद्धि) को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें।
यह गायत्री मंत्र है, जिसमें स्वर तथा छंद का भी विधान होता है। परंपरा में ऐसे मंत्रों को गुरु के मुख से शुद्ध उच्चारण सहित सीखना श्रेष्ठ कहा जाता है। श्रद्धापूर्वक श्रवण तथा भावपूर्ण पाठ पर रोक नहीं बताई जाती।
"महा-लक्ष्म्यै", "विद्-म-हे", "विष्णु-पत्न्यै", "धी-म-हि" स्पष्ट बोलें। "धीमहि" में "धी" दीर्घ; "प्रचोदयात्" का "त्" हल्का हलन्त। परंपरा में मंत्र-जप में शुद्ध उच्चारण का विशेष महत्व कहा जाता है, इसलिए आरंभ में धीरे-धीरे व स्पष्ट बोलकर अभ्यास करें और गति बाद में बढ़ाएँ।
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