श्री गणेश आरती

śrī gaṇeśa āratī

Ganesh Aarti (Jai Ganesh Deva)

समय
2–3 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
बुधवार; गणेश चतुर्थी; हर शुभ कार्य के आरंभ में
उद्देश्य:शुभ आरंभ (Auspicious beginnings)विघ्न-नाश (Removal of obstacles)समृद्धि (Prosperity)
✓ संपूर्ण

श्री गणेश आरती "जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा, माता जाकी पार्वती पिता महादेवा" भगवान गणेश की सबसे प्रचलित आरती है। इसमें पाँच पद हैं, और टेक हर पद के बाद दोहराई जाती है। आरती गणेश जी को एकदंत, चार भुजाओं वाले और मूषक-वाहन कहती है, और अंतिम पद में छाप "सूर श्याम" है।

परिचय

विघ्नहर्ता श्री गणेश हर शुभ कार्य के प्रथम पूज्य देव हैं — बुद्धि, विवेक और समृद्धि के दाता।

स्रोत: परंपरागत आरती; अंतिम पद में छाप "सूर श्याम" — इसी से सूरदास की रचना मानी जाती है

एक नज़र में

मंत्र / पाठश्री गणेश आरती
IASTśrī gaṇeśa āratī
देवताश्री गणेश
मूल स्रोतपरंपरागत आरती; अंतिम पद में छाप "सूर श्याम" — इसी से सूरदास की रचना मानी जाती है
शुभ दिनबुधवार; गणेश चतुर्थी; हर शुभ कार्य के आरंभ में
पाठ समय2–3 मिनट
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

गणेश आरती छोटी है, पर इसके पाँच पदों में गणेश जी का पूरा परिचय है — माता-पिता, रूप, भोग और कृपा।

परिचय (पद 1). "माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा" — आरती गणेश जी को उनके माता-पिता से पहचानती है, और यही पंक्ति टेक बनकर हर पद के बाद लौटती है।

रूप (पद 2). "एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी; माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी" — एक दाँत, चार भुजाएँ, माथे पर सिंदूर और मूषक की सवारी।

भोग (पद 3). "पान चढ़े फूल चढ़े, और चढ़े मेवा; लड्डुअन का भोग लगे" — पान, फूल, मेवा और लड्डू का भोग।

कृपा (पद 4). "अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया" — अंधे को आँख, रोगी को स्वस्थ शरीर, निस्संतान को संतान और निर्धन को धन।

छाप (पद 5). "सूर श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा" — इसी छाप से आरती सूरदास की रचना मानी जाती है।

आरती (लिरिक्स)

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जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

हे गणेश देव, आपकी जय हो! जिनकी माता पार्वती और पिता महादेव शिव हैं — आपकी वंदना है।

एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी। माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥

एक दंत वाले, दयालु, चार भुजाओं वाले; मस्तक पर सिंदूर सुशोभित है और जिनकी सवारी मूषक है।

पान चढ़े फूल चढ़े, और चढ़े मेवा। लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥

आपको पान, पुष्प और मेवा अर्पित किए जाते हैं; लड्डुओं का भोग लगता है और संतजन आपकी सेवा करते हैं।

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया। बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥

आप अंधों को दृष्टि, कोढ़ियों को निरोग काया, संतानहीनों को पुत्र और निर्धनों को धन प्रदान करते हैं।

सूर श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

भक्त आपकी शरण में आए हैं — हमारी सेवा सफल कीजिए; जिनकी माता पार्वती और पिता महादेव हैं।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे गणेश देव, आपकी जय हो! जिनकी माता पार्वती और पिता महादेव शिव हैं — आपकी वंदना है।
  2. एक दंत वाले, दयालु, चार भुजाओं वाले; मस्तक पर सिंदूर सुशोभित है और जिनकी सवारी मूषक है।
  3. आपको पान, पुष्प और मेवा अर्पित किए जाते हैं; लड्डुओं का भोग लगता है और संतजन आपकी सेवा करते हैं।
  4. आप अंधों को दृष्टि, कोढ़ियों को निरोग काया, संतानहीनों को पुत्र और निर्धनों को धन प्रदान करते हैं।
  5. भक्त आपकी शरण में आए हैं — हमारी सेवा सफल कीजिए; जिनकी माता पार्वती और पिता महादेव हैं।

लाभ

  • हर शुभ कार्य का मंगल आरंभ — गणेश-पूजन के बाद यही आरती गाई जाती है।
  • कृपा का भाव — "अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया; बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया" (पद 4)।
  • सेवा सफल होने की प्रार्थना — "सूर श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा" (पद 5)।

कब करें पाठ

प्रातः पूजा मेंबुधवार कोगणेश चतुर्थी परकिसी नए कार्य के आरंभ में

पाठ विधि

स्वच्छ होकर गणेश जी के समक्ष दीप व धूप जलाएँ। आरती की थाली में दीपक, पुष्प, अक्षत व मोदक रखें। आरती को दाएँ से बाएँ घुमाते हुए श्रद्धापूर्वक गाएँ और अंत में परिवार सहित प्रसाद ग्रहण करें।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराbhaktibharat.com — श्री गणेश जी की आरती · drikpanchang.com — श्री गणेशजी की आरती · रचयिता: पाठ की छाप "सूर श्याम"; bhajanaarti.in — जय गणेश जय गणेश देवा by सूरदास
रचयितासूरदास (अंतिम पद की छाप "सूर श्याम")
अंतिम अद्यतनसितंबर 2026

यह भी देखें

देव परिचय

श्री गणेश

Lord Ganesha

विघ्नहर्ता श्री गणेश हर शुभ कार्य के प्रथम पूज्य देव हैं — बुद्धि, विवेक और समृद्धि के दाता।

देवता वर्गविघ्न नाश · बुद्धि · शुभारंभ · समृद्धि
वाहनमूषक (चूहा)
संबंधित वारबुधवार
मुख्य मंत्रॐ गं गणपतये नमः
श्री गणेश के पाठ
सभी पाठ देखें

श्री गणेश आरती — सामान्य प्रश्न

श्री गणेश भक्ति संग्रह

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