श्री गणेश आरती

śrī gaṇeśa āratī

Ganesh Aarti (Jai Ganesh Deva)

समय
2–3 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
✓ संपूर्ण

परिचय

विघ्नहर्ता श्री गणेश हर शुभ कार्य के प्रथम पूज्य देव हैं — बुद्धि, विवेक और समृद्धि के दाता।

स्रोत: पारंपरिक (रचयिता: पं. श्रद्धाराम फिल्लौरी)

आरती (लिरिक्स)

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जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

हे गणेश देव, आपकी जय हो! जिनकी माता पार्वती और पिता महादेव शिव हैं — आपकी वंदना है।

एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी। माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥

एक दंत वाले, दयालु, चार भुजाओं वाले; मस्तक पर सिंदूर सुशोभित है और जिनकी सवारी मूषक है।

पान चढ़े फूल चढ़े, और चढ़े मेवा। लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥

आपको पान, पुष्प और मेवा अर्पित किए जाते हैं; लड्डुओं का भोग लगता है और संतजन आपकी सेवा करते हैं।

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया। बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥

आप अंधों को दृष्टि, कोढ़ियों को निरोग काया, संतानहीनों को पुत्र और निर्धनों को धन प्रदान करते हैं।

सूर श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

भक्त आपकी शरण में आए हैं — हमारी सेवा सफल कीजिए; जिनकी माता पार्वती और पिता महादेव हैं।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे गणेश देव, आपकी जय हो! जिनकी माता पार्वती और पिता महादेव शिव हैं — आपकी वंदना है।
  2. एक दंत वाले, दयालु, चार भुजाओं वाले; मस्तक पर सिंदूर सुशोभित है और जिनकी सवारी मूषक है।
  3. आपको पान, पुष्प और मेवा अर्पित किए जाते हैं; लड्डुओं का भोग लगता है और संतजन आपकी सेवा करते हैं।
  4. आप अंधों को दृष्टि, कोढ़ियों को निरोग काया, संतानहीनों को पुत्र और निर्धनों को धन प्रदान करते हैं।
  5. भक्त आपकी शरण में आए हैं — हमारी सेवा सफल कीजिए; जिनकी माता पार्वती और पिता महादेव हैं।

लाभ

  • किसी भी शुभ कार्य के आरंभ में विघ्नों का नाश होता है।
  • बुद्धि, विवेक और एकाग्रता में वृद्धि होती है।
  • घर में सुख-समृद्धि और मंगल का वास होता है।

कब करें पाठ

प्रातः पूजा मेंबुधवार कोगणेश चतुर्थी परकिसी नए कार्य के आरंभ में

पाठ विधि

स्वच्छ होकर गणेश जी के समक्ष दीप व धूप जलाएँ। आरती की थाली में दीपक, पुष्प, अक्षत व मोदक रखें। आरती को दाएँ से बाएँ घुमाते हुए श्रद्धापूर्वक गाएँ और अंत में परिवार सहित प्रसाद ग्रहण करें।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरापारंपरिक हिन्दू आरती संग्रह · पं. श्रद्धाराम फिल्लौरी रचित आरती
रचयिताश्रद्धाराम फिल्लौरी
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री गणेश

Lord Ganesha

विघ्नहर्ता श्री गणेश हर शुभ कार्य के प्रथम पूज्य देव हैं — बुद्धि, विवेक और समृद्धि के दाता।

देवता वर्गविघ्न नाश · बुद्धि · शुभारंभ · समृद्धि
वाहनमूषक (चूहा)
संबंधित वारबुधवार
मुख्य मंत्रॐ गं गणपतये नमः
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