श्री गणेश आरती
śrī gaṇeśa āratī
Ganesh Aarti (Jai Ganesh Deva)
परिचय
विघ्नहर्ता श्री गणेश हर शुभ कार्य के प्रथम पूज्य देव हैं — बुद्धि, विवेक और समृद्धि के दाता।
स्रोत: पारंपरिक (रचयिता: पं. श्रद्धाराम फिल्लौरी)
आरती (लिरिक्स)
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
हे गणेश देव, आपकी जय हो! जिनकी माता पार्वती और पिता महादेव शिव हैं — आपकी वंदना है।
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी। माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
एक दंत वाले, दयालु, चार भुजाओं वाले; मस्तक पर सिंदूर सुशोभित है और जिनकी सवारी मूषक है।
पान चढ़े फूल चढ़े, और चढ़े मेवा। लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
आपको पान, पुष्प और मेवा अर्पित किए जाते हैं; लड्डुओं का भोग लगता है और संतजन आपकी सेवा करते हैं।
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया। बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
आप अंधों को दृष्टि, कोढ़ियों को निरोग काया, संतानहीनों को पुत्र और निर्धनों को धन प्रदान करते हैं।
सूर श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
भक्त आपकी शरण में आए हैं — हमारी सेवा सफल कीजिए; जिनकी माता पार्वती और पिता महादेव हैं।
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अर्थ (हिन्दी)
- हे गणेश देव, आपकी जय हो! जिनकी माता पार्वती और पिता महादेव शिव हैं — आपकी वंदना है।
- एक दंत वाले, दयालु, चार भुजाओं वाले; मस्तक पर सिंदूर सुशोभित है और जिनकी सवारी मूषक है।
- आपको पान, पुष्प और मेवा अर्पित किए जाते हैं; लड्डुओं का भोग लगता है और संतजन आपकी सेवा करते हैं।
- आप अंधों को दृष्टि, कोढ़ियों को निरोग काया, संतानहीनों को पुत्र और निर्धनों को धन प्रदान करते हैं।
- भक्त आपकी शरण में आए हैं — हमारी सेवा सफल कीजिए; जिनकी माता पार्वती और पिता महादेव हैं।
लाभ
- किसी भी शुभ कार्य के आरंभ में विघ्नों का नाश होता है।
- बुद्धि, विवेक और एकाग्रता में वृद्धि होती है।
- घर में सुख-समृद्धि और मंगल का वास होता है।
कब करें पाठ
पाठ विधि
स्वच्छ होकर गणेश जी के समक्ष दीप व धूप जलाएँ। आरती की थाली में दीपक, पुष्प, अक्षत व मोदक रखें। आरती को दाएँ से बाएँ घुमाते हुए श्रद्धापूर्वक गाएँ और अंत में परिवार सहित प्रसाद ग्रहण करें।
प्रामाणिकता व स्रोत
देव परिचय
श्री गणेश
Lord Ganesha
विघ्नहर्ता श्री गणेश हर शुभ कार्य के प्रथम पूज्य देव हैं — बुद्धि, विवेक और समृद्धि के दाता।
