FAQ
श्री गणेश — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विघ्नहर्ता श्री गणेश हर शुभ कार्य के प्रथम पूज्य देव हैं — बुद्धि, विवेक और समृद्धि के दाता। श्री गणेश भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र हैं और समस्त देवताओं में प्रथम पूजनीय माने जाते हैं। किसी भी मांगलिक कार्य, पूजा या नए आरंभ से पूर्व उनका आह्वान किया जाता है क्योंकि वे विघ्नों के नाशक और बुद्धि-विवेक के अधिष्ठाता हैं।
परंपरा के अनुसार श्री गणेश का वाहन मूषक (चूहा) है। उनकी शक्ति/संगिनी रिद्धि-सिद्धि मानी जाती हैं।
श्री गणेश का बीज मंत्र "ॐ गं गणपतये नमः" है। रोमन में इसे "Om Gam Ganapataye Namah" लिखा जाता है। मंत्र-जप श्रद्धा व नियमितता पर आधारित परंपरा है।
परंपरा में श्री गणेश की आराधना के लिए बुधवार विशेष माना जाता है। इस दिन व्रत, मंत्र-जप और संबंधित पाठ का विधान बताया जाता है।
श्री गणेश को गणपति, विघ्नहर्ता, गजानन, लम्बोदर आदि नामों से भी जाना जाता है। हर नाम उनके किसी एक स्वरूप या गुण की ओर संकेत करता है।
गजमुख, चार भुजाएँ, एक हाथ में अंकुश, एक में पाश, एक में मोदक तथा एक वरमुद्रा में; वाहन मूषक। परंपरा में उन्हें विघ्न नाश, बुद्धि, शुभारंभ, समृद्धि का अधिष्ठाता माना जाता है।
इस पृष्ठ पर श्री गणेश से जुड़े 7 भक्ति पाठ उपलब्ध हैं — आरती, चालीसा, मंत्र व स्तोत्र सहित। हर पाठ हिन्दी, IAST और रोमन तीनों लिपियों में पढ़ा जा सकता है।
