गणेश गायत्री मंत्र

gaṇeśa gāyatrī mantra

Ganesha Gayatri Mantra

समय
40 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
बुधवार व चतुर्थी
उद्देश्य:बुद्धि (Wisdom)विघ्न नाश (Obstacle Removal)आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual Growth)
✓ संपूर्ण गायत्री मंत्र

गणेश गायत्री मंत्र — पारंपरिक गणेश गायत्री (गायत्री छंद)। हम एकदन्त गणेश को जानते हैं और वक्रतुण्ड का ध्यान करते हैं; वे दन्ती (गणेश) हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें। परंपरा में इसे मुख्यतः बुद्धि, विघ्न नाश, आध्यात्मिक उन्नति के भाव से जपा जाता है, प्रायः 108 बार अर्थात एक माला।

परिचय

विघ्नहर्ता श्री गणेश हर शुभ कार्य के प्रथम पूज्य देव हैं — बुद्धि, विवेक और समृद्धि के दाता।

स्रोत: पारंपरिक गणेश गायत्री (गायत्री छंद)

एक नज़र में

मंत्र / पाठगणेश गायत्री मंत्र
IASTgaṇeśa gāyatrī mantra
प्रकारगायत्री मंत्र
देवताश्री गणेश
मूल स्रोतपारंपरिक गणेश गायत्री (गायत्री छंद)
जप संख्या108
मालारुद्राक्ष या स्फटिक माला
शुभ दिनबुधवार व चतुर्थी
पाठ समय40 सेकंड
कठिनाईमध्यम

उद्भव / पृष्ठभूमि

गणेश गायत्री मंत्र पारंपरिक गणेश गायत्री (गायत्री छंद) के रूप में जाना जाता है। हम एकदन्त गणेश को जानते हैं और वक्रतुण्ड का ध्यान करते हैं; वे दन्ती (गणेश) हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें।

मंत्र के प्रत्येक पद का अपना अर्थ है: एकदन्ताय — एक दाँत वाले गणेश को; विद्महे — हम जानते हैं; वक्रतुण्डाय — टेढ़ी सूँड वाले को; धीमहि — हम ध्यान करते हैं; तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् — वे दन्ती (गणेश) हमारी बुद्धि को प्रेरित करें। इन्हीं पदों के मेल से पूरे मंत्र का भाव बनता है, इसलिए जप करते समय इनका स्मरण रखना उपयोगी कहा जाता है।

यह गायत्री छंद में रचा मंत्र है। गायत्री-वर्ग के मंत्रों में स्वर तथा छंद का विशेष विधान होता है, इसलिए परंपरा में इन्हें शुद्ध उच्चारण सहित सीखने पर बल दिया जाता है।

परंपरा में इसका जप 108 बार — एक माला — कहा जाता है, और इसके लिए रुद्राक्ष या स्फटिक माला बताई जाती है। इसके लिए बुधवार व चतुर्थी विशेष कहे जाते हैं। परंपरा में यह भी कहा जाता है कि संख्या से अधिक महत्व नियमितता का है।

मंत्र

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ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि। तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्॥

लिपि बदलने के लिए ऊपर देवनागरी / IAST / Roman चुनें।

उच्चारण (Pronunciation)

ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि। तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्॥

oṃ ekadantāya vidmahe vakratuṇḍāya dhīmahi | tanno dantiḥ pracodayāt ||

Om Ekadantaya Vidmahe Vakratundaya Dhimahi, Tanno Dantih Prachodayat.

उच्चारण मार्गदर्शन: "एक-दन्ताय", "विद्-म-हे", "वक्र-तुण्डाय", "धी-म-हि" को स्पष्ट बोलें। "धीमहि" में "धी" दीर्घ है। "प्रचोदयात्" का अंतिम "त्" हल्का हलन्त उच्चारित करें।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

एकदन्तायएक दाँत वाले गणेश को
विद्महेहम जानते हैं
वक्रतुण्डायटेढ़ी सूँड वाले को
धीमहिहम ध्यान करते हैं
तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्वे दन्ती (गणेश) हमारी बुद्धि को प्रेरित करें

अर्थ (हिन्दी)

  1. हम एकदन्त गणेश को जानते हैं और वक्रतुण्ड का ध्यान करते हैं; वे दन्ती (गणेश) हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें।

लाभ

  • बुद्धि, विवेक व एकाग्रता में वृद्धि होती है।
  • विद्या व कार्यों में आने वाली बाधाएँ दूर होती हैं।
  • मन शांत होकर आध्यात्मिक उन्नति होती है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: रुद्राक्ष या स्फटिक माला

उत्तम समय: प्रातः व बुधवार

जप का उत्तम समय

प्रातः सूर्योदय के समयबुधवार व चतुर्थी कोअध्ययन से पूर्व

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

स्नान कर स्वच्छ आसन पर बैठें और गणेश जी का ध्यान करते हुए रुद्राक्ष या स्फटिक माला से 108 बार जप करें। प्रातः व बुधवार को जप विशेष फलदायी होता है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराdrikpanchang.com — गणेश मंत्र (vedic-mantra सूची) · blog.shlokmantra.com — 108 देवताओं के गायत्री मंत्र · hindi.webdunia.com — हर देवी-देवता का गायत्री मंत्र
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री गणेश

Lord Ganesha

विघ्नहर्ता श्री गणेश हर शुभ कार्य के प्रथम पूज्य देव हैं — बुद्धि, विवेक और समृद्धि के दाता।

देवता वर्गविघ्न नाश · बुद्धि · शुभारंभ · समृद्धि
वाहनमूषक (चूहा)
संबंधित वारबुधवार
मुख्य मंत्रॐ गं गणपतये नमः
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