Om Ekadantaya Vidmahe Vakratundaya Dhimahi,
Tanno Dantih Prachodayat.
उच्चारण मार्गदर्शन: "एक-दन्ताय", "विद्-म-हे", "वक्र-तुण्डाय", "धी-म-हि" को स्पष्ट बोलें। "धीमहि" में "धी" दीर्घ है। "प्रचोदयात्" का अंतिम "त्" हल्का हलन्त उच्चारित करें।
शब्द-अर्थ (Word-by-Word)
एकदन्तायएक दाँत वाले गणेश को
विद्महेहम जानते हैं
वक्रतुण्डायटेढ़ी सूँड वाले को
धीमहिहम ध्यान करते हैं
तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्वे दन्ती (गणेश) हमारी बुद्धि को प्रेरित करें
अर्थ (हिन्दी)
हम एकदन्त गणेश को जानते हैं और वक्रतुण्ड का ध्यान करते हैं; वे दन्ती (गणेश) हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें।
लाभ
बुद्धि, विवेक व एकाग्रता में वृद्धि होती है।
विद्या व कार्यों में आने वाली बाधाएँ दूर होती हैं।
मन शांत होकर आध्यात्मिक उन्नति होती है।
अनुशंसित जप संख्या
जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।
माला: रुद्राक्ष या स्फटिक माला
उत्तम समय: प्रातः व बुधवार
जप का उत्तम समय
प्रातः सूर्योदय के समयबुधवार व चतुर्थी कोअध्ययन से पूर्व
जप विधि (चैंटिंग मेथड)
स्नान कर स्वच्छ आसन पर बैठें और गणेश जी का ध्यान करते हुए रुद्राक्ष या स्फटिक माला से 108 बार जप करें। प्रातः व बुधवार को जप विशेष फलदायी होता है।
प्रामाणिकता व स्रोत
स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरापारंपरिक गणेश गायत्री परंपरा
अंतिम अद्यतनजून 2026
देव परिचय
श्री गणेश
Lord Ganesha
विघ्नहर्ता श्री गणेश हर शुभ कार्य के प्रथम पूज्य देव हैं — बुद्धि, विवेक और समृद्धि के दाता।