oṃ bhūr bhuvaḥ svaḥ |
tat savitur vareṇyaṃ bhargo devasya dhīmahi |
dhiyo yo naḥ pracodayāt ||
Om Bhur Bhuvah Svah,
Tat Savitur Varenyam Bhargo Devasya Dhimahi,
Dhiyo Yo Nah Prachodayat.
उच्चारण मार्गदर्शन: "ॐ" को दीर्घ (ओ…म्) उच्चारित करें। "भूर्-भुवः-स्वः" तीन व्याहृतियाँ स्पष्ट रुककर बोलें। "धीमहि" में "धी" दीर्घ है और "प्रचोदयात्" के अंत का "त्" हल्का हलन्त (आधा) उच्चारित होता है। प्रत्येक पद को शांत व सम स्वर में बोलें।
शब्द-अर्थ (Word-by-Word)
ॐप्रणव — परब्रह्म का प्रतीक
भूःभूलोक (पृथ्वी)
भुवःअंतरिक्ष लोक
स्वःस्वर्ग लोक
तत्वह (परमात्मा)
सवितुःसविता — सृष्टि के प्रेरक सूर्य
वरेण्यम्श्रेष्ठ, वरण करने योग्य
भर्गःदिव्य तेज, प्रकाश
देवस्यदेव का
धीमहिहम ध्यान करते हैं
धियःबुद्धि
यःजो
नःहमारी
प्रचोदयात्प्रेरित करे, सन्मार्ग पर चलाए
अर्थ (हिन्दी)
हम उस सविता (सूर्य) देव के श्रेष्ठ, वरण करने योग्य दिव्य तेज का ध्यान करते हैं, जो भूः, भुवः और स्वः — तीनों लोकों में व्याप्त है; वह देव हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करे।
लाभ
बुद्धि, विवेक और एकाग्रता में वृद्धि होती है।
मन शांत होता है और आध्यात्मिक उन्नति होती है।
नकारात्मक विचारों का नाश होकर सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
अनुशंसित जप संख्या
जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।
माला: रुद्राक्ष या स्फटिक माला
उत्तम समय: प्रातः व संध्या (संध्या-वंदन काल)
जप का उत्तम समय
प्रातः सूर्योदय के समयमध्याह्नसंध्या सूर्यास्त के समय
जप विधि (चैंटिंग मेथड)
स्नान कर स्वच्छ आसन पर पूर्व दिशा की ओर मुख कर बैठें। रुद्राक्ष या तुलसी की माला से 108 बार जप करें। श्वास को सम रखते हुए शांत, स्पष्ट स्वर में उच्चारण करें। संध्या-काल में जल का अर्घ्य देकर जप अधिक फलदायी होता है।
प्रामाणिकता व स्रोत
स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराऋग्वेद 3.62.10 · पारंपरिक संध्या-वंदन परंपरा
रचयिताऋषि विश्वामित्र
अंतिम अद्यतनजून 2026
देव परिचय
श्री सूर्य देव
Lord Surya (Sun)
सूर्य देव प्रत्यक्ष देव हैं — तेज, आरोग्य व ऊर्जा के स्रोत; गायत्री मंत्र के अधिष्ठाता सविता।