ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः

oṃ hrāṃ hrīṃ hrauṃ saḥ sūryāya namaḥ

Surya Beej Mantra

समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
रविवार
उद्देश्य:स्वास्थ्य (Health)तेज (Vitality)आत्मविश्वास (Confidence)
✓ संपूर्ण बीज मंत्र

ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः एक बीज मंत्र है — पारंपरिक सूर्य बीज मंत्र (नवग्रह)। सूर्य देव को नमस्कार। परंपरा में इसे मुख्यतः स्वास्थ्य, तेज, आत्मविश्वास के भाव से जपा जाता है, प्रायः 108 बार अर्थात एक माला।

परिचय

सूर्य देव प्रत्यक्ष देव हैं — तेज, आरोग्य व ऊर्जा के स्रोत; गायत्री मंत्र के अधिष्ठाता सविता।

स्रोत: पारंपरिक सूर्य बीज मंत्र (नवग्रह)

एक नज़र में

मंत्र / पाठॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
IASToṃ hrāṃ hrīṃ hrauṃ saḥ sūryāya namaḥ
प्रकारबीज मंत्र (मूल मंत्र भी)
देवताश्री सूर्य देव
मूल स्रोतपारंपरिक सूर्य बीज मंत्र (नवग्रह)
जप संख्या108
मालारुद्राक्ष माला
शुभ दिनरविवार
पाठ समय30 सेकंड
कठिनाईमध्यम

उद्भव / पृष्ठभूमि

ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः पारंपरिक सूर्य बीज मंत्र (नवग्रह) के रूप में जाना जाता है। सूर्य देव को नमस्कार। "ह्रां ह्रीं ह्रौं सः" सूर्य के बीजाक्षर हैं जो तेज, आरोग्य व आत्मविश्वास प्रदान करते हैं तथा कुंडली में सूर्य को बल देते हैं।

मंत्र के प्रत्येक पद का अपना अर्थ है: ह्रां ह्रीं ह्रौं सः — सूर्य के बीजाक्षर; सूर्याय — सूर्य देव को; नमः — नमस्कार। इन्हीं पदों के मेल से पूरे मंत्र का भाव बनता है, इसलिए जप करते समय इनका स्मरण रखना उपयोगी कहा जाता है।

यह बीज मंत्र है — अर्थात इसका केंद्र बीजाक्षर है, जिसका अर्थ शब्दकोश से नहीं, ध्वनि व परंपरा से लिया जाता है। इसी कारण बीज मंत्रों में उच्चारण-शुद्धि पर सबसे अधिक बल दिया जाता है, और परंपरा इनके लिए गुरु-दीक्षा को श्रेष्ठ मानती है।

परंपरा में इसका जप 108 बार — एक माला — कहा जाता है, और इसके लिए रुद्राक्ष माला बताई जाती है। इसके लिए रविवार विशेष कहे जाते हैं। परंपरा में यह भी कहा जाता है कि संख्या से अधिक महत्व नियमितता का है।

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मंत्र

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ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः॥

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उच्चारण (Pronunciation)

ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः॥

oṃ hrāṃ hrīṃ hrauṃ saḥ sūryāya namaḥ ||

Om Hraam Hreem Hraum Sah Suryaya Namah.

उच्चारण मार्गदर्शन: "ह्रां", "ह्रीं", "ह्रौं" को अनुस्वार सहित नासिक्य ध्वनि में स्पष्ट बोलें, "सः" का विसर्ग स्पष्ट रखें, फिर "सूर्याय नमः"।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

ह्रां ह्रीं ह्रौं सःसूर्य के बीजाक्षर
सूर्यायसूर्य देव को
नमःनमस्कार

अर्थ (हिन्दी)

  1. सूर्य देव को नमस्कार। "ह्रां ह्रीं ह्रौं सः" सूर्य के बीजाक्षर हैं जो तेज, आरोग्य व आत्मविश्वास प्रदान करते हैं तथा कुंडली में सूर्य को बल देते हैं।

लाभ

  • आरोग्य, तेज व जीवनशक्ति में वृद्धि होती है।
  • आत्मविश्वास व नेतृत्व-क्षमता बढ़ती है।
  • कुंडली में सूर्य की स्थिति बलवान होती है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: रुद्राक्ष माला

उत्तम समय: प्रातः सूर्योदय व रविवार

जप का उत्तम समय

रविवार कोप्रातः सूर्योदय के समयसूर्य को अर्घ्य देते समय

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

प्रातः सूर्योदय के समय जल का अर्घ्य देकर रुद्राक्ष या माणिक्य माला से 108 बार जप करें। रविवार को जप विशेष फलदायी होता है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराbhaktisandesh.com — नवग्रह बीज मंत्र · astrotalk.com — बीज मंत्र · gurukripa.org.in — सूर्य बीज मंत्र
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री सूर्य देव

Lord Surya (Sun)

सूर्य देव प्रत्यक्ष देव हैं — तेज, आरोग्य व ऊर्जा के स्रोत; गायत्री मंत्र के अधिष्ठाता सविता।

देवता वर्गतेज · आरोग्य · ऊर्जा · यश
वाहनसप्त-अश्व रथ
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मुख्य मंत्रॐ सूर्याय नमः
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