श्री सूर्य देव आरती

śrī sūrya deva āratī

Surya Dev Aarti (Om Jai Surya Bhagwan)

समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
✓ संपूर्ण

परिचय

सूर्य देव प्रत्यक्ष देव हैं — तेज, आरोग्य व ऊर्जा के स्रोत; गायत्री मंत्र के अधिष्ठाता सविता।

स्रोत: पारंपरिक सूर्यदेव आरती

उद्भव / पृष्ठभूमि

भगवान सूर्य प्रत्यक्ष देव, आरोग्य व जीवनशक्ति के स्रोत हैं। यह आरती प्रातः सूर्योदय के समय अर्घ्य देने के पश्चात गाई जाती है, जिससे आरोग्य, तेज, यश व आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है।

आरती (लिरिक्स)

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ॐ जय सूर्य भगवान, जय हे दिवाकर भगवान। जगत के पालनकर्ता, तुम हो दीनदयाल॥

हे सूर्य भगवान, दिवाकर! आपकी जय हो। आप जगत के पालनकर्ता तथा दीनों पर दया करने वाले हैं।

सप्त अश्व रथ साजे, महा तेज प्रचण्ड। रूप तुम्हारा निरखत, हरषत सब ब्रह्माण्ड॥

सात अश्वों वाले रथ पर सुशोभित, महान प्रचण्ड तेज वाले; आपका रूप देखकर समस्त ब्रह्माण्ड हर्षित होता है।

देव दनुज नर मुनिगण, करते सब गुणगान। रोग-शोक हर लेते, देते जीवन-दान॥

देव, दानव, मनुष्य व मुनिगण सभी आपका गुणगान करते हैं; आप रोग-शोक हर लेते हैं तथा जीवन-दान देते हैं।

तुम हो त्रिभुवन स्वामी, तेज पुंज भगवान। आरोग्य धन देते, हरते सब अज्ञान॥

आप तीनों लोकों के स्वामी व तेज के पुंज हैं; आरोग्य रूपी धन देते हैं तथा समस्त अज्ञान का नाश करते हैं।

सूर्यदेव की आरती, जो जन नित्य गावे। मन इच्छित फल पावे, रोग दूर भगावे॥

जो भक्त सूर्यदेव की यह आरती नित्य गाता है, वह मन-इच्छित फल पाता है तथा उसके रोग दूर हो जाते हैं।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे सूर्य भगवान, दिवाकर! आपकी जय हो। आप जगत के पालनकर्ता तथा दीनों पर दया करने वाले हैं।
  2. सात अश्वों वाले रथ पर सुशोभित, महान प्रचण्ड तेज वाले; आपका रूप देखकर समस्त ब्रह्माण्ड हर्षित होता है।
  3. देव, दानव, मनुष्य व मुनिगण सभी आपका गुणगान करते हैं; आप रोग-शोक हर लेते हैं तथा जीवन-दान देते हैं।
  4. आप तीनों लोकों के स्वामी व तेज के पुंज हैं; आरोग्य रूपी धन देते हैं तथा समस्त अज्ञान का नाश करते हैं।
  5. जो भक्त सूर्यदेव की यह आरती नित्य गाता है, वह मन-इच्छित फल पाता है तथा उसके रोग दूर हो जाते हैं।

लाभ

  • आरोग्य, तेज व जीवनशक्ति में वृद्धि होती है।
  • आत्मविश्वास, यश व नेतृत्व-क्षमता बढ़ती है।
  • कुंडली में सूर्य की स्थिति बलवान होती है।

कब करें पाठ

प्रातः सूर्योदय के समयरविवार कोमकर संक्रांति व रथ सप्तमी परअर्घ्य देने के पश्चात

पाठ विधि

प्रातः स्नान कर सूर्य को जल का अर्घ्य दें, फिर पूर्व दिशा की ओर मुख कर लाल पुष्प व अक्षत अर्पित करते हुए "ॐ सूर्याय नमः" का स्मरण कर आरती गाएँ।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरापारंपरिक हिन्दू आरती संग्रह
रचयितापारंपरिक
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री सूर्य देव

Lord Surya (Sun)

सूर्य देव प्रत्यक्ष देव हैं — तेज, आरोग्य व ऊर्जा के स्रोत; गायत्री मंत्र के अधिष्ठाता सविता।

देवता वर्गतेज · आरोग्य · ऊर्जा · यश
वाहनसप्त-अश्व रथ
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मुख्य मंत्रॐ सूर्याय नमः
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