श्री हनुमान आरती

śrī hanumāna āratī

Hanuman Aarti (Aarti Kije Hanuman Lala Ki)

समय
4–5 मिनट
श्लोक/चौपाई
13
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
मंगलवार व शनिवार; हनुमान जयंती
उद्देश्य:रक्षा (Protection)संकट-निवारण (Relief from troubles)बल (Strength)
✓ संपूर्ण

श्री हनुमान आरती "आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की" हनुमान जी की सबसे प्रचलित आरती है। इसमें तेरह पद हैं, जो लंका-दहन, संजीवनी लाने और अहिरावण-वध की कथा कहते हैं। अंतिम पद में छाप है — "तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई"।

परिचय

पवनपुत्र हनुमान भक्ति, बल और निर्भयता के प्रतीक हैं — श्रीराम के परम भक्त और संकटमोचन।

स्रोत: परंपरागत आरती; अंतिम पद में छाप "तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई"

एक नज़र में

मंत्र / पाठश्री हनुमान आरती
IASTśrī hanumāna āratī
देवताश्री हनुमान
मूल स्रोतपरंपरागत आरती; अंतिम पद में छाप "तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई"
शुभ दिनमंगलवार व शनिवार; हनुमान जयंती
पाठ समय4–5 मिनट
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

हनुमान आरती दो-दो पंक्तियों के पदों में हनुमान जी की पूरी रामायण-यात्रा गाती है।

बल (पद 1–3). "जाके बल से गिरिवर कांपे, रोग-दोष जाके निकट न झांके" — जिनके बल से पर्वत काँपते हैं और रोग-दोष पास नहीं आते।

लंका (पद 4–6). "दे बीरा रघुनाथ पठाए, लंका जारि सिया सुधि लाए" — राम ने बीड़ा देकर भेजा; समुद्र जैसी खाई वाली लंका तक जाते देर नहीं लगी, और लंका जलाकर सीता की खबर लाए।

संजीवनी और पाताल (पद 7–9). "लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे, आनि संजीवन प्राण उबारे" — मूर्छित लक्ष्मण के प्राण बचाए; फिर पाताल में जाकर अहिरावण की भुजाएँ उखाड़ दीं। "बाएं भुजा असुर दल मारे, दाहिने भुजा संतजन तारे"।

आरती का दृश्य (पद 10–13). देवता, मनुष्य और मुनि आरती उतारते हैं; सोने की थाली में कपूर की लौ, और स्वयं अंजना माई आरती करती हैं। फलश्रुति — "जो हनुमान जी की आरती गावै, बसि बैकुण्ठ परम पद पावै"।

आरती (लिरिक्स)

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आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

आओ, प्रिय हनुमान जी की आरती करें — जो दुष्टों का दमन करने वाले और श्रीराम की शक्ति के अंश हैं।

जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग-दोष जाके निकट न झांके॥

जिनके बल से बड़े-बड़े पर्वत कांप उठते हैं; रोग और दोष जिनके निकट भी नहीं फटकते।

अंजनि पुत्र महा बलदाई। संतन के प्रभु सदा सहाई॥

माता अंजनि के पुत्र, महान बल के दाता; संतों और भक्तों के प्रभु, सदा सहायक।

दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारि सिया सुधि लाए॥

श्रीराम ने जिन्हें बीड़ा देकर भेजा; उन्होंने लंका को जलाकर माता सीता का समाचार लाए।

लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई॥

लंका का दुर्ग और समुद्र-सी खाई — पवनपुत्र ने उसे पार करने में तनिक भी देर नहीं लगाई।

लंका जारि असुर संहारे। सियाराम जी के काज संवारे॥

लंका जलाकर असुरों का संहार किया और सीता-राम जी के समस्त कार्य सिद्ध किए।

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आनि संजीवन प्राण उबारे॥

लक्ष्मण जी प्रातः मूर्छित पड़े; हनुमान जी संजीवनी लाकर उनके प्राण बचाए।

पैठि पाताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखारे॥

पाताल में घुसकर यमदूतों को परास्त किया और अहिरावण की भुजाएँ उखाड़ दीं।

बाएं भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे॥

बाईं भुजा से असुर-दल को संहारा और दाहिनी भुजा से संतजनों को भव-सागर से तारा।

सुर-नर-मुनि आरती उतारें। जय जय जय हनुमान उचारें॥

देव, मनुष्य और मुनि — सभी हनुमान जी की आरती उतारते हैं और "जय जय जय हनुमान" उचारते हैं।

कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई॥

स्वर्ण थाल में कपूर की लौ जलाकर; माता अंजना स्वयं अपने पुत्र की आरती उतारती हैं।

जो हनुमान जी की आरती गावै। बसि बैकुण्ठ परम पद पावै॥

जो हनुमान जी की यह आरती गाता है; वह वैकुण्ठ में बसकर परम पद प्राप्त करता है।

लंक विध्वंस किये रघुराई। तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई॥

श्रीराम (रघुराई) ने लंका का विध्वंस किया; तुलसीदास उन स्वामी हनुमान की कीर्ति का गान करते हैं।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. आओ, प्रिय हनुमान जी की आरती करें — जो दुष्टों का दमन करने वाले और श्रीराम की शक्ति के अंश हैं।
  2. जिनके बल से बड़े-बड़े पर्वत कांप उठते हैं; रोग और दोष जिनके निकट भी नहीं फटकते।
  3. माता अंजनि के पुत्र, महान बल के दाता; संतों और भक्तों के प्रभु, सदा सहायक।
  4. श्रीराम ने जिन्हें बीड़ा देकर भेजा; उन्होंने लंका को जलाकर माता सीता का समाचार लाए।
  5. लंका का दुर्ग और समुद्र-सी खाई — पवनपुत्र ने उसे पार करने में तनिक भी देर नहीं लगाई।
  6. लंका जलाकर असुरों का संहार किया और सीता-राम जी के समस्त कार्य सिद्ध किए।
  7. लक्ष्मण जी प्रातः मूर्छित पड़े; हनुमान जी संजीवनी लाकर उनके प्राण बचाए।
  8. पाताल में घुसकर यमदूतों को परास्त किया और अहिरावण की भुजाएँ उखाड़ दीं।
  9. बाईं भुजा से असुर-दल को संहारा और दाहिनी भुजा से संतजनों को भव-सागर से तारा।
  10. देव, मनुष्य और मुनि — सभी हनुमान जी की आरती उतारते हैं और "जय जय जय हनुमान" उचारते हैं।
  11. स्वर्ण थाल में कपूर की लौ जलाकर; माता अंजना स्वयं अपने पुत्र की आरती उतारती हैं।
  12. जो हनुमान जी की यह आरती गाता है; वह वैकुण्ठ में बसकर परम पद प्राप्त करता है।
  13. श्रीराम (रघुराई) ने लंका का विध्वंस किया; तुलसीदास उन स्वामी हनुमान की कीर्ति का गान करते हैं।

लाभ

  • रोग-दोष से रक्षा का भाव — "जाके बल से गिरिवर कांपे, रोग-दोष जाके निकट न झांके" (पद 2)।
  • संतों के सहायक — "अंजनि पुत्र महा बलदाई, संतन के प्रभु सदा सहाई" (पद 3)।
  • फलश्रुति: "जो हनुमान जी की आरती गावै, बसि बैकुण्ठ परम पद पावै" (पद 12)।

कब करें पाठ

मंगलवार व शनिवार कोसंध्या आरती मेंहनुमान जयंती परसंकट के समय

पाठ विधि

हनुमान जी के समक्ष चमेली के तेल का दीपक व सिंदूर अर्पित करें। गुड़-चने या बूँदी का भोग लगाएँ। आरती को श्रद्धा व निर्भयता के भाव से गाएँ और अंत में हनुमान चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराbhaktibharat.com — आरती कीजै हनुमान लला की · drikpanchang.com — आरती श्री हनुमानजी
रचयितातुलसीदास (अंतिम पद की छाप)
अंतिम अद्यतनसितंबर 2026

यह भी देखें

देव परिचय

श्री हनुमान

Lord Hanuman

पवनपुत्र हनुमान भक्ति, बल और निर्भयता के प्रतीक हैं — श्रीराम के परम भक्त और संकटमोचन।

देवता वर्गशक्ति · भक्ति · रक्षा · साहस · संकटमोचन
संबंधित वारमंगलवार
मुख्य मंत्रॐ हं हनुमते नमः
श्री हनुमान के पाठ
सभी पाठ देखें

श्री हनुमान आरती — सामान्य प्रश्न

संबंधित पर्व व व्रत

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