समय
4–5 मिनट
श्लोक/चौपाई
13
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
मंगलवार व शनिवार; हनुमान जयंती
उद्देश्य:रक्षा (Protection)संकट-निवारण (Relief from troubles)बल (Strength)
✓ संपूर्ण
श्री हनुमान आरती "आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की" हनुमान जी की सबसे प्रचलित आरती है। इसमें तेरह पद हैं, जो लंका-दहन, संजीवनी लाने और अहिरावण-वध की कथा कहते हैं। अंतिम पद में छाप है — "तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई"।
FAQ
श्री हनुमान आरती — सामान्य प्रश्न
हनुमान जी की आरती मंगलवार और शनिवार को विशेष रूप से की जाती है, परंतु प्रतिदिन संध्या समय भी की जा सकती है।
हनुमान जी को गुड़-चना, बूँदी के लड्डू और सिंदूर अति प्रिय हैं।
तेरह — टेक सहित बारह पद और अंतिम पद "लंक विध्वंस किये रघुराई, तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई"। यह अंतिम पद भक्तिभारत की प्रति में है, द्रिक पंचांग की प्रति "बसि बैकुण्ठ परम पद पावै" पर समाप्त हो जाती है।
अंतिम पद में छाप है — "लंक विध्वंस किये रघुराई, तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई"। इसी छाप के कारण आरती तुलसीदास से जोड़ी जाती है।
दो प्रकाशित प्रतियों से — भक्तिभारत और द्रिक पंचांग। सब पद दोनों में हैं; अंतिम पद द्रिक में नहीं है।
और आरती
संबंधित आरती
पर्व
