हनुमान जयंती

Hanuman Jayanti

मार्च–अप्रैल

महत्व

हनुमान जयंती पवनपुत्र श्री हनुमान के अवतरण का पर्व है।

यहाँ एक बात दर्ज करने योग्य है: यह पर्व भारत के विभिन्न भागों में अलग-अलग तिथियों पर मनाया जाता है। उत्तर भारत के अधिकांश क्षेत्रों में यह चैत्र मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है, जबकि दक्षिण की कुछ परंपराएँ इसे अन्य मास में मानती हैं — तमिल परंपरा में यह मार्गशीर्ष में पड़ता है। इस पृष्ठ की तिथि उत्तर भारत की प्रचलित परंपरा के अनुसार है।

परंपरा उन्हें शिव का रुद्रावतार मानती है। इस दिन सिंदूर व चमेली के तेल का अर्पण तथा अखंड चालीसा-पाठ की विशेष परंपरा है।

पूजन विधि व परंपरा

  • हनुमान चालीसा का अखंड पाठ
  • सिंदूर तथा चमेली के तेल का अर्पण
  • सुंदरकांड का पाठ
  • बूँदी, गुड़-चना व लड्डू का भोग
  • बजरंग बाण तथा हनुमान अष्टक का पाठ
  • मंदिर में ध्वजा अर्पण
  • ब्रह्ममुहूर्त में पूजन व दर्शन

तिथि / पंचांग

तिथिपूर्णिमा
पक्षशुक्ल
माहचैत्र
समय (लगभग)मार्च–अप्रैल
आराध्यश्री हनुमान
स्रोतhi.wikipedia.org/wiki/हनुमान_जयंती — भारत के विभिन्न भागों में अलग-अलग तिथियाँ; उत्तर भारत में चैत्र पूर्णिमा
आज का पंचांग

हनुमान जयंती — सामान्य प्रश्न

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