उच्चारण मार्गदर्शन: "मनो-जवं", "मारुत-तुल्य-वेगं", "जितेन्द्रियं", "वातात्मजं", "श्री-राम-दूतं", "शरणं प्रपद्ये" को स्पष्ट रुककर व भक्तिभाव से पढ़ें।
शब्द-अर्थ (Word-by-Word)
मनोजवंमन के समान वेग वाले
मारुततुल्यवेगम्वायु के समान गतिमान
जितेन्द्रियंइन्द्रियों को जीतने वाले
वातात्मजंपवनपुत्र
श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्येश्रीराम के दूत की शरण ग्रहण करता हूँ
अर्थ (हिन्दी)
मन के समान वेग वाले, वायु के तुल्य गतिमान, जितेन्द्रिय, बुद्धिमानों में श्रेष्ठ, पवनपुत्र, वानर-सेना के मुखिया, श्रीराम के दूत हनुमान की मैं शरण ग्रहण करता हूँ।
लाभ
भय व संकट से रक्षा होती है।
मन एकाग्र होकर साहस व आत्मबल बढ़ता है।
हनुमान-भक्ति गहरी होती है।
अनुशंसित जप संख्या
जप संख्या: प्रतिदिन 11 बार (एक माला)।
माला: आवश्यक नहीं (ध्यान श्लोक)
उत्तम समय: प्रातः, संध्या व मंगलवार-शनिवार
जप का उत्तम समय
मंगलवार व शनिवार कोप्रातः व संध्याहनुमान चालीसा से पूर्व
जप विधि (चैंटिंग मेथड)
हनुमान जी का ध्यान करते हुए यह श्लोक श्रद्धापूर्वक पढ़ें; प्रायः हनुमान चालीसा/पूजा के आरंभ में इसका पाठ किया जाता है। मंगलवार-शनिवार को विशेष फलदायी।
प्रामाणिकता व स्रोत
स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरापारंपरिक हनुमान ध्यान श्लोक
अंतिम अद्यतनजून 2026
देव परिचय
श्री हनुमान
Lord Hanuman
पवनपुत्र हनुमान भक्ति, बल और निर्भयता के प्रतीक हैं — श्रीराम के परम भक्त और संकटमोचन।