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लिपि:
॥ श्री ॥

मनोजवं मारुततुल्यवेगम्

मंत्र · श्री हनुमान

पाठ

1

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥

अर्थ (हिन्दी)

  1. मन के समान वेग वाले, वायु के तुल्य गतिमान, जितेन्द्रिय, बुद्धिमानों में श्रेष्ठ, पवनपुत्र, वानर-सेना के मुखिया, श्रीराम के दूत हनुमान की मैं शरण ग्रहण करता हूँ।

लाभ

  • भय व संकट से रक्षा होती है।
  • मन एकाग्र होकर साहस व आत्मबल बढ़ता है।
  • हनुमान-भक्ति गहरी होती है।

कब करें पाठ

मंगलवार व शनिवार को · प्रातः व संध्या · हनुमान चालीसा से पूर्व

स्रोत

पारंपरिक हनुमान ध्यान श्लोक

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