FAQ
श्री हनुमान — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पवनपुत्र हनुमान भक्ति, बल और निर्भयता के प्रतीक हैं — श्रीराम के परम भक्त और संकटमोचन। श्री हनुमान माता अंजना और पवनदेव के पुत्र हैं और भगवान शिव के रुद्रावतार माने जाते हैं। वे श्रीराम के अनन्य भक्त, बुद्धिमानों में अग्रगण्य तथा अष्ट सिद्धियों व नौ निधियों के दाता हैं।
परंपरा के अनुसार श्री हनुमान का वाहन — है। उनकी शक्ति/संगिनी — मानी जाती हैं।
श्री हनुमान का बीज मंत्र "ॐ हं हनुमते नमः" है। रोमन में इसे "Om Ham Hanumate Namah" लिखा जाता है। मंत्र-जप श्रद्धा व नियमितता पर आधारित परंपरा है।
परंपरा में श्री हनुमान की आराधना के लिए मंगलवार व शनिवार विशेष माना जाता है। इस दिन व्रत, मंत्र-जप और संबंधित पाठ का विधान बताया जाता है।
श्री हनुमान को बजरंगबली, पवनपुत्र, महावीर, अंजनिपुत्र आदि नामों से भी जाना जाता है। हर नाम उनके किसी एक स्वरूप या गुण की ओर संकेत करता है।
गदाधारी, सिंदूरी वर्ण, एक हाथ में गदा व दूसरे में संजीवनी पर्वत; हृदय में श्रीराम-सीता का वास। परंपरा में उन्हें शक्ति, भक्ति, रक्षा, साहस का अधिष्ठाता माना जाता है।
इस पृष्ठ पर श्री हनुमान से जुड़े 7 भक्ति पाठ उपलब्ध हैं — आरती, चालीसा, मंत्र व स्तोत्र सहित। हर पाठ हिन्दी, IAST और रोमन तीनों लिपियों में पढ़ा जा सकता है।
