हनुमान गायत्री मंत्र

hanumāna gāyatrī mantra

Hanuman Gayatri Mantra

समय
40 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
मंगलवार व शनिवार
उद्देश्य:रक्षा (Protection)साहस (Courage)भय नाश (Fearlessness)
✓ संपूर्ण गायत्री मंत्र

हनुमान गायत्री मंत्र — पारंपरिक हनुमान गायत्री (गायत्री छंद)। हम अंजनीपुत्र को जानते हैं और वायुपुत्र का ध्यान करते हैं; वे हनुमान हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें। परंपरा में इसे मुख्यतः रक्षा, साहस, भय नाश के भाव से जपा जाता है, प्रायः 108 बार अर्थात एक माला।

परिचय

पवनपुत्र हनुमान भक्ति, बल और निर्भयता के प्रतीक हैं — श्रीराम के परम भक्त और संकटमोचन।

स्रोत: पारंपरिक हनुमान गायत्री (गायत्री छंद)

एक नज़र में

मंत्र / पाठहनुमान गायत्री मंत्र
IASThanumāna gāyatrī mantra
प्रकारगायत्री मंत्र
देवताश्री हनुमान
मूल स्रोतपारंपरिक हनुमान गायत्री (गायत्री छंद)
जप संख्या108
मालारुद्राक्ष माला
शुभ दिनमंगलवार व शनिवार
पाठ समय40 सेकंड
कठिनाईमध्यम

उद्भव / पृष्ठभूमि

हनुमान गायत्री मंत्र पारंपरिक हनुमान गायत्री (गायत्री छंद) के रूप में जाना जाता है। हम अंजनीपुत्र को जानते हैं और वायुपुत्र का ध्यान करते हैं; वे हनुमान हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें।

मंत्र के प्रत्येक पद का अपना अर्थ है: आञ्जनेयाय — अंजनी-पुत्र (हनुमान) को; विद्महे — हम जानते हैं; वायुपुत्राय — वायु-पुत्र को; धीमहि — हम ध्यान करते हैं; तन्नो हनुमान् प्रचोदयात् — वे हनुमान हमें प्रेरित करें। इन्हीं पदों के मेल से पूरे मंत्र का भाव बनता है, इसलिए जप करते समय इनका स्मरण रखना उपयोगी कहा जाता है।

यह गायत्री छंद में रचा मंत्र है। गायत्री-वर्ग के मंत्रों में स्वर तथा छंद का विशेष विधान होता है, इसलिए परंपरा में इन्हें शुद्ध उच्चारण सहित सीखने पर बल दिया जाता है।

परंपरा में इसका जप 108 बार — एक माला — कहा जाता है, और इसके लिए रुद्राक्ष माला बताई जाती है। इसके लिए मंगलवार व शनिवार विशेष कहे जाते हैं। परंपरा में यह भी कहा जाता है कि संख्या से अधिक महत्व नियमितता का है।

मंत्र

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ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि। तन्नो हनुमान् प्रचोदयात्॥

लिपि बदलने के लिए ऊपर देवनागरी / IAST / Roman चुनें।

उच्चारण (Pronunciation)

ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि। तन्नो हनुमान् प्रचोदयात्॥

oṃ āñjaneyāya vidmahe vāyuputrāya dhīmahi | tanno hanumān pracodayāt ||

Om Anjaneyaya Vidmahe Vayuputraya Dhimahi, Tanno Hanuman Prachodayat.

उच्चारण मार्गदर्शन: "आञ्-ज-ने-याय", "विद्-म-हे", "वायु-पुत्राय", "धी-म-हि" स्पष्ट बोलें। "धीमहि" में "धी" दीर्घ; "प्रचोदयात्" का "त्" हल्का हलन्त।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

आञ्जनेयायअंजनी-पुत्र (हनुमान) को
विद्महेहम जानते हैं
वायुपुत्रायवायु-पुत्र को
धीमहिहम ध्यान करते हैं
तन्नो हनुमान् प्रचोदयात्वे हनुमान हमें प्रेरित करें

अर्थ (हिन्दी)

  1. हम अंजनीपुत्र को जानते हैं और वायुपुत्र का ध्यान करते हैं; वे हनुमान हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें।

लाभ

  • भय व संकट से रक्षा होती है।
  • साहस, बल व आत्मविश्वास बढ़ता है।
  • शनि व मंगल दोष में राहत मिलती है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: रुद्राक्ष माला

उत्तम समय: प्रातः, संध्या व मंगलवार-शनिवार

जप का उत्तम समय

मंगलवार व शनिवार कोप्रातः व संध्याभय या संकट के समय

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

हनुमान जी के समक्ष सिंदूर व चमेली के तेल का दीपक अर्पित कर रुद्राक्ष माला से 108 बार जप करें। मंगलवार-शनिवार को जप विशेष फलदायी होता है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराhindi.webdunia.com — हर देवी-देवता का गायत्री मंत्र
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री हनुमान

Lord Hanuman

पवनपुत्र हनुमान भक्ति, बल और निर्भयता के प्रतीक हैं — श्रीराम के परम भक्त और संकटमोचन।

देवता वर्गशक्ति · भक्ति · रक्षा · साहस · संकटमोचन
संबंधित वारमंगलवार
मुख्य मंत्रॐ हं हनुमते नमः
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हनुमान गायत्री मंत्र — सामान्य प्रश्न

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