समय
40 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
मंगलवार व शनिवार
उद्देश्य:रक्षा (Protection)साहस (Courage)भय नाश (Fearlessness)
✓ संपूर्ण गायत्री मंत्र
हनुमान गायत्री मंत्र — पारंपरिक हनुमान गायत्री (गायत्री छंद)। हम अंजनीपुत्र को जानते हैं और वायुपुत्र का ध्यान करते हैं; वे हनुमान हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें। परंपरा में इसे मुख्यतः रक्षा, साहस, भय नाश के भाव से जपा जाता है, प्रायः 108 बार अर्थात एक माला।
FAQ
हनुमान गायत्री मंत्र — सामान्य प्रश्न
यह भय व संकट से रक्षा करता है, साहस व बल बढ़ाता है तथा शनि व मंगल दोष में राहत देता है।
मंगलवार व शनिवार को तथा नित्य प्रातः-संध्या में इसका जप विशेष लाभकारी है।
परंपरा में इस मंत्र का जप 108 बार — अर्थात एक माला — करने का विधान कहा जाता है, और इसके लिए रुद्राक्ष माला का प्रयोग बताया जाता है। जप का सुझाया गया समय प्रातः, संध्या व मंगलवार-शनिवार है। संख्या से अधिक महत्व नियमितता तथा शुद्ध उच्चारण का माना गया है।
मंत्र के पदों का अर्थ इस प्रकार है — आञ्जनेयाय — अंजनी-पुत्र (हनुमान) को; विद्महे — हम जानते हैं; वायुपुत्राय — वायु-पुत्र को; धीमहि — हम ध्यान करते हैं; तन्नो हनुमान् प्रचोदयात् — वे हनुमान हमें प्रेरित करें। पूरे मंत्र का भाव यह है: हम अंजनीपुत्र को जानते हैं और वायुपुत्र का ध्यान करते हैं; वे हनुमान हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें।
यह गायत्री मंत्र है, जिसमें स्वर तथा छंद का भी विधान होता है। परंपरा में ऐसे मंत्रों को गुरु के मुख से शुद्ध उच्चारण सहित सीखना श्रेष्ठ कहा जाता है। श्रद्धापूर्वक श्रवण तथा भावपूर्ण पाठ पर रोक नहीं बताई जाती।
"आञ्-ज-ने-याय", "विद्-म-हे", "वायु-पुत्राय", "धी-म-हि" स्पष्ट बोलें। "धीमहि" में "धी" दीर्घ; "प्रचोदयात्" का "त्" हल्का हलन्त। परंपरा में मंत्र-जप में शुद्ध उच्चारण का विशेष महत्व कहा जाता है, इसलिए आरंभ में धीरे-धीरे व स्पष्ट बोलकर अभ्यास करें और गति बाद में बढ़ाएँ।
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