पंचमुखी हनुमान मंत्र

paṃcamukhī hanumāna maṃtra

Panchamukhi Hanuman Mantra (five face-mantras of the Panchamukha Hanumat Kavacha)

समय
2 मिनट (पाँचों मंत्र एक बार)
जप संख्या
11
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
मंगलवार व शनिवार
उद्देश्य:रक्षा (Protection)भय नाश (Fearlessness)संकट मोचन (Relief from Crisis)
✓ संपूर्ण साधना मंत्र

पंचमुखी हनुमान मंत्र पञ्चमुख हनुमत्कवच के पाँच मुख-मंत्र हैं — हनुमान जी के पाँच मुखों में से हर एक का एक मंत्र: पूर्व में कपि, दक्षिण में नरसिंह, पश्चिम में गरुड़, उत्तर में वराह और ऊपर हयग्रीव। हर मंत्र "ॐ नमो भगवते पञ्चवदनाय" से शुरू होकर "स्वाहा" पर समाप्त होता है।

परिचय

पवनपुत्र हनुमान भक्ति, बल और निर्भयता के प्रतीक हैं — श्रीराम के परम भक्त और संकटमोचन।

स्रोत: पञ्चमुख हनुमत्कवच — सुदर्शन संहिता (कवच की पुष्पिका के अनुसार)

एक नज़र में

मंत्र / पाठपंचमुखी हनुमान मंत्र
IASTpaṃcamukhī hanumāna maṃtra
प्रकारसाधना मंत्र
देवताश्री हनुमान
मूल स्रोतपञ्चमुख हनुमत्कवच — सुदर्शन संहिता (कवच की पुष्पिका के अनुसार)
जप संख्या11
मालारुद्राक्ष माला (वैकल्पिक)
शुभ दिनमंगलवार व शनिवार
पाठ समय2 मिनट (पाँचों मंत्र एक बार)
कठिनाईमध्यम

उद्भव / पृष्ठभूमि

पंचमुखी हनुमान का रूप पाँच मुखों का है, और कवच हर मुख से अलग रक्षा माँगता है।

पाँच मुख, पाँच काम. पूर्व का कपि-मुख "सकलशत्रुसंहारकाय" — सब शत्रुओं का नाश; दक्षिण का नरसिंह-मुख "सकलभूतप्रमथनाय" — भूत-बाधा का नाश; पश्चिम का गरुड़-मुख "सकलविषहराय" — सब विष हरने वाला; उत्तर का वराह-मुख "सकलसम्पत्कराय" — संपत्ति देने वाला; और ऊपर का हयग्रीव-मुख "सकलजनवशङ्कराय" — सब लोगों को अनुकूल करने वाला।

स्रोत. ये मंत्र पञ्चमुख हनुमत्कवच से हैं; कवच की प्रकाशित प्रतियों की पुष्पिका इसे सुदर्शन संहिता का बताती है।

मंत्र

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ॐ नमो भगवते पञ्चवदनाय पूर्वकपिमुखाय सकलशत्रुसंहारकाय स्वाहा॥

ॐ नमो भगवते पञ्चवदनाय दक्षिणमुखाय करालवदनाय नरसिंहाय सकलभूतप्रमथनाय स्वाहा॥

ॐ नमो भगवते पञ्चवदनाय पश्चिममुखाय गरुडाननाय सकलविषहराय स्वाहा॥

ॐ नमो भगवते पञ्चवदनायोत्तरमुखायादिवराहाय सकलसम्पत्कराय स्वाहा॥

ॐ नमो भगवते पञ्चवदनायोर्ध्वमुखाय हयग्रीवाय सकलजनवशङ्कराय स्वाहा॥

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उच्चारण (Pronunciation)

ॐ नमो भगवते पञ्चवदनाय पूर्वकपिमुखाय सकलशत्रुसंहारकाय स्वाहा॥

oṃ namo bhagavate pañcavadanāya pūrvakapimukhāya sakalaśatrusaṃhārakāya svāhā||

Om namo bhagavate panchavadanaaya poorvakapimukhaaya Sakalashatrusanhaarakaaya svaahaa.

ॐ नमो भगवते पञ्चवदनाय दक्षिणमुखाय करालवदनाय नरसिंहाय सकलभूतप्रमथनाय स्वाहा॥

oṃ namo bhagavate pañcavadanāya dakṣiṇamukhāya karālavadanāya narasiṃhāya sakalabhūtapramathanāya svāhā||

Om namo bhagavate panchavadanaaya dakshinamukhaaya karaalavadanaaya narasinhaaya Sakalabhootapramathanaaya svaahaa.

ॐ नमो भगवते पञ्चवदनाय पश्चिममुखाय गरुडाननाय सकलविषहराय स्वाहा॥

oṃ namo bhagavate pañcavadanāya paścimamukhāya garuḍānanāya sakalaviṣaharāya svāhā||

Om namo bhagavate panchavadanaaya pashchimamukhaaya garudaananaaya Sakalavishaharaaya svaahaa.

ॐ नमो भगवते पञ्चवदनायोत्तरमुखायादिवराहाय सकलसम्पत्कराय स्वाहा॥

oṃ namo bhagavate pañcavadanāyottaramukhāyādivarāhāya sakalasampatkarāya svāhā||

Om namo bhagavate panchavadanaayottaramukhaayaadivaraahaaya Sakalasampatkaraaya svaahaa.

ॐ नमो भगवते पञ्चवदनायोर्ध्वमुखाय हयग्रीवाय सकलजनवशङ्कराय स्वाहा॥

oṃ namo bhagavate pañcavadanāyordhvamukhāya hayagrīvāya sakalajanavaśaṅkarāya svāhā||

Om namo bhagavate panchavadanaayordhvamukhaaya hayagreevaaya Sakalajanavashankaraaya svaahaa.

उच्चारण मार्गदर्शन: "पञ्चवदनाय" में "ञ्च" को साफ़ बोलें; "पञ्चवदनायोत्तरमुखायादिवराहाय" और "पञ्चवदनायोर्ध्वमुखाय" एक साथ जुड़े (संधि वाले) शब्द हैं — इन्हें बीच में तोड़े बिना धीरे बोलें। हर मंत्र के अंत में "स्वाहा" स्पष्ट रखें।

अर्थ (हिन्दी)

  1. (पूर्व मुख — कपि) पाँच मुख वाले भगवान के पूर्व के कपि-मुख को नमस्कार, जो सब शत्रुओं का संहार करते हैं — स्वाहा।
  2. (दक्षिण मुख — नरसिंह) पाँच मुख वाले भगवान के दक्षिण के भयंकर मुख वाले नरसिंह को नमस्कार, जो सब भूतों (बाधाओं) को मथ डालते हैं — स्वाहा।
  3. (पश्चिम मुख — गरुड़) पाँच मुख वाले भगवान के पश्चिम के गरुड़-मुख को नमस्कार, जो सब विष हर लेते हैं — स्वाहा।
  4. (उत्तर मुख — वराह) पाँच मुख वाले भगवान के उत्तर के आदिवराह-मुख को नमस्कार, जो सब संपत्ति देते हैं — स्वाहा।
  5. (ऊर्ध्व मुख — हयग्रीव) पाँच मुख वाले भगवान के ऊपर के हयग्रीव-मुख को नमस्कार, जो सब लोगों को अनुकूल कर देते हैं — स्वाहा।

लाभ

  • शत्रु-भय से रक्षा — "सकलशत्रुसंहारकाय" (मंत्र 1)।
  • भूत-बाधा और भय से रक्षा — "सकलभूतप्रमथनाय" (मंत्र 2)।
  • विष और रोग के भय से रक्षा — "सकलविषहराय" (मंत्र 3)।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 11 बार (एक माला)।

माला: रुद्राक्ष माला (वैकल्पिक)

उत्तम समय: संध्या, रात्रि व मंगलवार-शनिवार

जप का उत्तम समय

मंगलवार व शनिवार कोसंध्या व रात्रि मेंभय या संकट के समय

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

पंचमुखी हनुमान के चित्र के सामने दीपक जलाकर पाँचों मंत्र क्रम से — पूर्व, दक्षिण, पश्चिम, उत्तर और ऊर्ध्व — एक-एक बार या 11 बार बोलें। पूरा पञ्चमुख हनुमत्कवच न्यास और ध्यान के साथ पढ़ा जाता है; उसके लिए गुरु से विधि सीखना अच्छा है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरापञ्चमुख हनुमत्कवच (सुदर्शन संहिता — कवच की पुष्पिका के अनुसार) · templepurohit.com — पञ्चमुख हनुमत्कवचं (आधार-पाठ) · vedadhara.com — पंचमुखी हनुमान कवच · ramshalaka.in — पंचमुखी हनुमान कवच · ishtadev.com — पंचमुखी हनुमान कवच
अंतिम अद्यतनअक्टूबर 2026

यह भी देखें

देव परिचय

श्री हनुमान

Lord Hanuman

पवनपुत्र हनुमान भक्ति, बल और निर्भयता के प्रतीक हैं — श्रीराम के परम भक्त और संकटमोचन।

देवता वर्गशक्ति · भक्ति · रक्षा · साहस · संकटमोचन
संबंधित वारमंगलवार
मुख्य मंत्रॐ हं हनुमते नमः
श्री हनुमान के पाठ
सभी पाठ देखें

पंचमुखी हनुमान मंत्र — सामान्य प्रश्न

संबंधित पर्व व व्रत

श्री हनुमान भक्ति संग्रह

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