श्री लक्ष्मी आरती

śrī lakṣmī āratī

Lakshmi Aarti (Om Jai Lakshmi Mata)

समय
3–4 मिनट
श्लोक/चौपाई
8
✓ संपूर्ण

परिचय

माँ लक्ष्मी धन, समृद्धि और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी हैं — भगवान विष्णु की शक्ति।

स्रोत: पारंपरिक

आरती (लिरिक्स)

PDF डाउनलोड

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥

हे लक्ष्मी माता, आपकी जय हो! आपकी दिन-रात शिव, विष्णु और ब्रह्मा भी सेवा करते हैं।

उमा रमा ब्रह्माणी, तुम ही जग माता। सूर्य चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥

उमा, रमा और ब्रह्माणी — आप ही समस्त जगत की माता हैं; सूर्य-चंद्र आपका ध्यान करते और नारद ऋषि आपका गुणगान करते हैं।

दुर्गा रूप निरंजनि, सुख सम्पत्ति दाता। जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥

आप दुर्गा रूपा, निरंजन और सुख-सम्पत्ति की दात्री हैं; जो भी आपका ध्यान करता है, उसे ऋद्धि-सिद्धि और धन प्राप्त होता है।

तुम पाताल निवासिनि, तुम ही शुभदाता। कर्म प्रभाव प्रकाशिनि, भवनिधि की त्राता॥

आप पाताल में भी निवास करती हैं और शुभ की दात्री हैं; कर्मों के प्रभाव को प्रकाशित करने वाली और भवसागर से तारने वाली माता।

जिस घर में तुम रहती, सब सद्गुण आता। सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥

जिस घर में आपका वास होता है, वहाँ सभी सद्गुण आते हैं; सब कुछ संभव हो जाता है और मन कभी घबराता नहीं।

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता। खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥

आपके बिना यज्ञ नहीं होते, कोई वस्त्र नहीं पाता; खान-पान का सारा वैभव आप ही से आता है।

शुभगुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि राजत। रत्न चतुर्दश निकसे, जग ललचावत॥

सद्गुणों की मंदिर सुंदर, क्षीर-सागर में विराजमान; चौदह रत्न निकले जिनसे, जगत ललचाता है।

श्री लक्ष्मी जी की आरती, जो कोई जन गावे। उर आनंद समावे, पाप उतर जावे॥

श्री लक्ष्मी जी की यह आरती जो भी भक्त गाता है; उसके हृदय में आनंद समाता है और पाप दूर होते हैं।

लिपि बदलने के लिए ऊपर देवनागरी / IAST / Roman चुनें।

अर्थ (हिन्दी)

  1. हे लक्ष्मी माता, आपकी जय हो! आपकी दिन-रात शिव, विष्णु और ब्रह्मा भी सेवा करते हैं।
  2. उमा, रमा और ब्रह्माणी — आप ही समस्त जगत की माता हैं; सूर्य-चंद्र आपका ध्यान करते और नारद ऋषि आपका गुणगान करते हैं।
  3. आप दुर्गा रूपा, निरंजन और सुख-सम्पत्ति की दात्री हैं; जो भी आपका ध्यान करता है, उसे ऋद्धि-सिद्धि और धन प्राप्त होता है।
  4. आप पाताल में भी निवास करती हैं और शुभ की दात्री हैं; कर्मों के प्रभाव को प्रकाशित करने वाली और भवसागर से तारने वाली माता।
  5. जिस घर में आपका वास होता है, वहाँ सभी सद्गुण आते हैं; सब कुछ संभव हो जाता है और मन कभी घबराता नहीं।
  6. आपके बिना यज्ञ नहीं होते, कोई वस्त्र नहीं पाता; खान-पान का सारा वैभव आप ही से आता है।
  7. सद्गुणों की मंदिर सुंदर, क्षीर-सागर में विराजमान; चौदह रत्न निकले जिनसे, जगत ललचाता है।
  8. श्री लक्ष्मी जी की यह आरती जो भी भक्त गाता है; उसके हृदय में आनंद समाता है और पाप दूर होते हैं।

लाभ

  • धन, समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
  • घर में सुख-शांति और सौभाग्य का वास होता है।
  • दरिद्रता और आर्थिक संकट दूर होते हैं।

कब करें पाठ

शुक्रवार कोदीपावली व धनतेरस परसंध्या पूजा में

पाठ विधि

माँ लक्ष्मी के समक्ष कमल पुष्प, कौड़ी, अक्षत व मिठाई अर्पित करें। घी का दीपक जलाएँ, साथ में गणेश जी की भी पूजा करें। दीपावली पर स्वच्छता और दीपों के साथ आरती का विशेष महत्व है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरापारंपरिक हिन्दू आरती संग्रह
रचयितापं. श्रद्धाराम फिल्लौरी
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

माँ लक्ष्मी

Goddess Lakshmi

माँ लक्ष्मी धन, समृद्धि और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी हैं — भगवान विष्णु की शक्ति।

देवता वर्गधन · समृद्धि · ऐश्वर्य · सौभाग्य
वाहनउल्लू
संबंधित वारशुक्रवार
मुख्य मंत्रॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
माँ लक्ष्मी के पाठ
सभी पाठ देखें

श्री लक्ष्मी आरती — सामान्य प्रश्न

संबंधित पर्व व व्रत

माँ लक्ष्मी भक्ति संग्रह

आरती, चालीसा, मंत्र, स्तोत्र, अष्टकम, सहस्रनाम और अन्य भक्ति पाठ