समय
3–4 मिनट
श्लोक/चौपाई
8
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
दीपावली, धनतेरस, शुक्रवार
उद्देश्य:समृद्धि (Prosperity)धन-प्राप्ति (Wealth)गृह-सुख (Harmony at home)
✓ संपूर्ण
"ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता" माँ लक्ष्मी की प्रसिद्ध आरती है, जो दीपावली के लक्ष्मी-पूजन में गाई जाती है। इसके सात पद और एक फलश्रुति हैं। आरती का केंद्रीय भाव यह है कि घर का हर वैभव लक्ष्मी से आता है — "तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता; खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता"।
FAQ
श्री लक्ष्मी आरती — सामान्य प्रश्न
सात पद और एक फलश्रुति ("महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता")। तीनों प्रकाशित प्रतियों में ये सब हैं।
समुद्र-मंथन से निकले चौदह रत्न। लक्ष्मी स्वयं क्षीर-सागर से प्रकट हुई थीं — आरती उन्हें "क्षीरोदधि-जाता" कहती है — और पद 7 कहता है कि उनके बिना ये रत्न किसी को नहीं मिलते।
दीपावली के लक्ष्मी-पूजन में विशेष रूप से, धनतेरस पर, और शुक्रवार को। लक्ष्मी-पूजन में पहले गणेश जी की आरती और फिर यह आरती गाई जाती है।
तीन प्रकाशित प्रतियों से — द्रिक पंचांग (आधार), भक्तिभारत और भजन गंगा। सातों पद और फलश्रुति तीनों में हैं; भक्तिभारत जहाँ अकेला अलग पढ़ता है ("हर विष्णु", "जो कोई नर गाता"), वहाँ आधार का पाठ रखा गया।
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पर्व
