श्री लक्ष्मी आरती

śrī lakṣmī āratī

Lakshmi Aarti (Om Jai Lakshmi Mata)

समय
3–4 मिनट
श्लोक/चौपाई
8
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
दीपावली, धनतेरस, शुक्रवार
उद्देश्य:समृद्धि (Prosperity)धन-प्राप्ति (Wealth)गृह-सुख (Harmony at home)
✓ संपूर्ण

"ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता" माँ लक्ष्मी की प्रसिद्ध आरती है, जो दीपावली के लक्ष्मी-पूजन में गाई जाती है। इसके सात पद और एक फलश्रुति हैं। आरती का केंद्रीय भाव यह है कि घर का हर वैभव लक्ष्मी से आता है — "तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता; खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता"।

परिचय

माँ लक्ष्मी धन, समृद्धि और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी हैं — भगवान विष्णु की शक्ति।

स्रोत: "ॐ जय लक्ष्मी माता" — परंपरागत आरती

एक नज़र में

मंत्र / पाठश्री लक्ष्मी आरती
IASTśrī lakṣmī āratī
देवतामाँ लक्ष्मी
मूल स्रोत"ॐ जय लक्ष्मी माता" — परंपरागत आरती
शुभ दिनदीपावली, धनतेरस, शुक्रवार
पाठ समय3–4 मिनट
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

यह आरती लक्ष्मी को केवल धन की देवी नहीं, पूरे गृहस्थ-जीवन की आधार मानती है।

सब रूप एक (पद 1–3). विष्णु और विधाता (ब्रह्मा) दिन-रात उनकी सेवा करते हैं; उमा, रमा और ब्रह्माणी — तीनों वही हैं; और वे "दुर्गा रुप निरंजनी" भी हैं। सूर्य-चंद्रमा उनका ध्यान करते हैं और नारद उनके गुण गाते हैं।

घर में लक्ष्मी (पद 5–6). "जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता; सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता" — लक्ष्मी का वास केवल धन नहीं, सद्गुण और निश्चिंतता लाता है। और पद 6 कहता है कि यज्ञ, वस्त्र और खान-पान का वैभव — सब उन्हीं से है।

समुद्र-मंथन (पद 7). "शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता; रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता" — लक्ष्मी क्षीर-सागर से जन्मी हैं, और मंथन से निकले चौदह रत्नों में वे स्वयं एक हैं; उनके बिना वे रत्न किसी को नहीं मिलते।

फलश्रुति. जो यह आरती गाता है, उसके हृदय में आनंद समाता है और पाप उतर जाता है।

आरती (लिरिक्स)

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ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥

हे लक्ष्मी माता, हे मैया, आपकी जय हो! हरि-विष्णु और विधाता (ब्रह्मा) दिन-रात आपकी सेवा करते हैं।

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता। सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥

उमा, रमा और ब्रह्माणी — आप ही जगत की माता हैं; सूर्य और चंद्रमा आपका ध्यान करते हैं और नारद ऋषि आपका गुण गाते हैं।

दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता। जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥

आप निर्मल दुर्गा-रूप हैं और सुख-संपत्ति देने वाली हैं; जो कोई आपका ध्यान करता है, वह ऋद्धि-सिद्धि और धन पाता है।

तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता। कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥

आप पाताल में भी निवास करती हैं, आप ही शुभ देने वाली हैं; आप कर्मों का प्रभाव प्रकट करने वाली और संसार-सागर से पार उतारने वाली हैं।

जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता। सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥

जिस घर में आप रहती हैं, वहाँ सब सद्गुण आ जाते हैं; सब कुछ संभव हो जाता है और मन नहीं घबराता।

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता। खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥

आपके बिना यज्ञ नहीं होते, कोई वस्त्र नहीं पाता; खान-पान का सारा वैभव आप ही से आता है।

शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता। रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥

आप शुभ गुणों का सुंदर मंदिर हैं, क्षीर-सागर से जन्मी हैं; (समुद्र-मंथन के) चौदह रत्न आपके बिना कोई नहीं पाता।

महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता। उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥

(फलश्रुति) जो कोई महालक्ष्मी जी की यह आरती गाता है, उसके हृदय में आनंद समा जाता है और पाप उतर जाता है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे लक्ष्मी माता, हे मैया, आपकी जय हो! हरि-विष्णु और विधाता (ब्रह्मा) दिन-रात आपकी सेवा करते हैं।
  2. उमा, रमा और ब्रह्माणी — आप ही जगत की माता हैं; सूर्य और चंद्रमा आपका ध्यान करते हैं और नारद ऋषि आपका गुण गाते हैं।
  3. आप निर्मल दुर्गा-रूप हैं और सुख-संपत्ति देने वाली हैं; जो कोई आपका ध्यान करता है, वह ऋद्धि-सिद्धि और धन पाता है।
  4. आप पाताल में भी निवास करती हैं, आप ही शुभ देने वाली हैं; आप कर्मों का प्रभाव प्रकट करने वाली और संसार-सागर से पार उतारने वाली हैं।
  5. जिस घर में आप रहती हैं, वहाँ सब सद्गुण आ जाते हैं; सब कुछ संभव हो जाता है और मन नहीं घबराता।
  6. आपके बिना यज्ञ नहीं होते, कोई वस्त्र नहीं पाता; खान-पान का सारा वैभव आप ही से आता है।
  7. आप शुभ गुणों का सुंदर मंदिर हैं, क्षीर-सागर से जन्मी हैं; (समुद्र-मंथन के) चौदह रत्न आपके बिना कोई नहीं पाता।
  8. (फलश्रुति) जो कोई महालक्ष्मी जी की यह आरती गाता है, उसके हृदय में आनंद समा जाता है और पाप उतर जाता है।

लाभ

  • दीपावली के लक्ष्मी-पूजन का समापन — यही आरती गाई जाती है।
  • गृहस्थी के वैभव का भाव — "खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता" (6)।
  • मन की निश्चिंतता — "सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता" (5)।
  • फलश्रुति: हृदय में आनंद और पापों से मुक्ति।

कब करें पाठ

दीपावली के लक्ष्मी-पूजन मेंधनतेरस परशुक्रवार कोसंध्या पूजा में

पाठ विधि

माँ लक्ष्मी और गणेश जी के समक्ष घी का दीपक जलाएँ; कमल या लाल पुष्प, अक्षत और मिठाई अर्पित करें। लक्ष्मी-पूजन में पहले गणेश जी की आरती, फिर यह आरती गाई जाती है। टेक "ॐ जय लक्ष्मी माता" हर पद के बाद दोहराएँ।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराdrikpanchang.com — आरती श्री लक्ष्मी जी (आधार-पाठ) · bhaktibharat.com — आरती माँ लक्ष्मीजी - ॐ जय लक्ष्मी माता · bhajanganga.com — ॐ जय लक्ष्मी माता आरती
रचयिताअज्ञात (किसी प्रति में छाप नहीं)
अंतिम अद्यतनसितंबर 2026

यह भी देखें

देव परिचय

माँ लक्ष्मी

Goddess Lakshmi

माँ लक्ष्मी धन, समृद्धि और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी हैं — भगवान विष्णु की शक्ति।

देवता वर्गधन · समृद्धि · ऐश्वर्य · सौभाग्य
वाहनउल्लू
संबंधित वारशुक्रवार
मुख्य मंत्रॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
माँ लक्ष्मी के पाठ
सभी पाठ देखें

श्री लक्ष्मी आरती — सामान्य प्रश्न

माँ लक्ष्मी भक्ति संग्रह

आरती, चालीसा, मंत्र, स्तोत्र, अष्टकम, सहस्रनाम और अन्य भक्ति पाठ