समय
20 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
रविवार
उद्देश्य:स्वास्थ्य (Health)तेज (Vitality)आत्मविश्वास (Confidence)
✓ संपूर्ण नाम जाप
ॐ घृणिः सूर्याय नमः सूर्य देव का प्रचलित जप-मंत्र है — इसमें "घृणिः" का अर्थ है किरणों वाला, तेजस्वी; पूरा अर्थ है "तेजस्वी सूर्य देव को नमस्कार"। इसे स्वास्थ्य, तेज और आत्मविश्वास के भाव से जपा जाता है, प्रायः 108 बार, विशेषकर रविवार को सूर्योदय के समय।
FAQ
ॐ घृणिः सूर्याय नमः — सामान्य प्रश्न
रविवार व प्रातः सूर्योदय के समय सूर्य को अर्घ्य देते हुए इसका जप आरोग्य व तेज हेतु लाभकारी है।
"घृणि" सूर्य की दीप्ति अर्थात् किरण-तेज का सूचक है, जो ऊर्जा व आरोग्य प्रदान करता है।
परंपरा में इस मंत्र का जप 108 बार — अर्थात एक माला — करने का विधान कहा जाता है, और इसके लिए रुद्राक्ष या माणिक्य माला का प्रयोग बताया जाता है। जप का सुझाया गया समय प्रातः सूर्योदय व रविवार है। संख्या से अधिक महत्व नियमितता तथा शुद्ध उच्चारण का माना गया है।
मंत्र के पदों का अर्थ इस प्रकार है — ॐ — प्रणव — परब्रह्म का प्रतीक; घृणिः — सूर्य की दीप्ति/किरण-तेज; सूर्याय — सूर्य देव को; नमः — नमस्कार। पूरे मंत्र का भाव यह है: तेजोमय सूर्य देव को नमस्कार। "घृणि" सूर्य की दीप्ति (किरण-तेज) का सूचक है; यह आरोग्य, ऊर्जा व आत्मविश्वास प्रदान करता है।
परंपरा में नाम-जप के लिए दीक्षा अनिवार्य नहीं मानी जाती — इसे किसी भी आयु व किसी भी वर्ग का व्यक्ति श्रद्धापूर्वक जप सकता है। यही नाम-मार्ग की विशेषता कही जाती है कि इसमें पात्रता की शर्त भाव है, विधि नहीं।
"घृ-णिः" में ऋ व मूर्धन्य "ण" का उच्चारण रखें, विसर्ग स्पष्ट बोलें, फिर "सूर्याय नमः"। शांत व स्पष्ट स्वर रखें। परंपरा में मंत्र-जप में शुद्ध उच्चारण का विशेष महत्व कहा जाता है, इसलिए आरंभ में धीरे-धीरे व स्पष्ट बोलकर अभ्यास करें और गति बाद में बढ़ाएँ।
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