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लिपि:
॥ श्री ॥

गायत्री मंत्र

मंत्र · श्री सूर्य देव

पाठ

1

ॐ भूर्भुवः स्वः। तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्॥

अर्थ (हिन्दी)

  1. हम उस सविता (सूर्य) देव के श्रेष्ठ, वरण करने योग्य दिव्य तेज का ध्यान करते हैं, जो भूः, भुवः और स्वः — तीनों लोकों में व्याप्त है; वह देव हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करे।

लाभ

  • बुद्धि, विवेक और एकाग्रता में वृद्धि होती है।
  • मन शांत होता है और आध्यात्मिक उन्नति होती है।
  • नकारात्मक विचारों का नाश होकर सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

कब करें पाठ

प्रातः सूर्योदय के समय · मध्याह्न · संध्या सूर्यास्त के समय

स्रोत

रचयिता: ऋषि विश्वामित्र. ऋग्वेद 3.62.10 · पारंपरिक संध्या-वंदन परंपरा

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