FAQ
गणेश चतुर्थी — सामान्य प्रश्न
गणेश चतुर्थी चतुर्थी तिथि, शुक्ल पक्ष, भाद्रपद को मनाया जाता है। सटीक तिथि हर वर्ष पंचांग के अनुसार बदलती है — इसी संग्रह का पंचांग पृष्ठ देखें।
गणेश चतुर्थी विघ्नहर्ता श्रीगणेश के अवतरण का पर्व है, जो भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को आता है — प्रायः अगस्त-सितंबर में। गणेश पुराण के अनुसार उनका प्राकट्य इसी तिथि को मध्याह्न काल में हुआ था।
गणेश चतुर्थी मुख्यतः श्री गणेश की आराधना का पर्व माना जाता है। इसी पृष्ठ पर उनसे जुड़े आरती, चालीसा व मंत्र भी दिए गए हैं।
परंपरा में इस दिन गणपति स्थापना — परंपरा में मिट्टी की प्रतिमा श्रेष्ठ मानी जाती है, मध्याह्न काल में मुख्य पूजन — यही इस व्रत का निर्णायक समय है, षोडशोपचार गणपति पूजन तथा सिंदूर अर्पण, इक्कीस दूर्वा-दल का अर्पण — दूर्वा गणेश जी को सर्वाधिक प्रिय का विधान बताया जाता है। ये परंपरागत मान्यताएँ हैं; क्षेत्र और परिवार के अनुसार विधि में अंतर मिलता है।
हाँ। गणेश चतुर्थी से जुड़ी व्रत कथा इसी संग्रह में उपलब्ध है और इस पृष्ठ से जुड़ी हुई है। कथा हिन्दी, IAST व रोमन तीनों लिपियों में पढ़ी जा सकती है।
अनुशंसित पाठ
गणेश चतुर्थी के लिए अनुशंसित आरती, चालीसा, मंत्र व स्तोत्र
आराध्य देव
