वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
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उच्चारण (Pronunciation)
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
vakratuṇḍa mahākāya sūryakoṭisamaprabha |
nirvighnaṃ kuru me deva sarvakāryeṣu sarvadā ||
Vakratunda Mahakaya Surya-koti-samaprabha,
Nirvighnam Kuru Me Deva Sarva-karyeshu Sarvada.
उच्चारण मार्गदर्शन: "वक्र-तुण्ड", "महा-काय", "सूर्य-कोटि-सम-प्रभ" को स्पष्ट रुककर बोलें। "निर्विघ्नं" में अनुस्वार का नासिक्य उच्चारण रखें। श्लोक को सम व भक्तिभाव से पढ़ें।
शब्द-अर्थ (Word-by-Word)
वक्रतुण्डटेढ़ी सूँड वाले
महाकायविशाल शरीर वाले
सूर्यकोटिसमप्रभकरोड़ों सूर्यों के समान तेज वाले
निर्विघ्नं कुरुविघ्नरहित करें
सर्वकार्येषु सर्वदासमस्त कार्यों में सदैव
अर्थ (हिन्दी)
हे वक्र (टेढ़ी) सूँड व विशाल काया वाले, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी देव गणेश! आप मेरे समस्त कार्यों को सदा निर्विघ्न (बाधारहित) बनाएँ।
लाभ
समस्त कार्यों में आने वाली बाधाएँ दूर होती हैं।
नए कार्य का आरंभ मंगलमय व सफल होता है।
मन में आत्मविश्वास व सकारात्मकता बढ़ती है।
अनुशंसित जप संख्या
जप संख्या: प्रतिदिन 11 बार (एक माला)।
माला: आवश्यक नहीं (कार्य-आरंभ में पाठ)
उत्तम समय: कार्य आरंभ व प्रातः
जप का उत्तम समय
किसी भी कार्य के आरंभ मेंबुधवार व चतुर्थी कोप्रातः पूजा में
जप विधि (चैंटिंग मेथड)
किसी भी शुभ कार्य, पूजा या यात्रा के आरंभ में गणेश जी का स्मरण कर इस श्लोक का पाठ करें। नित्य प्रातः इसका पाठ शुभ फलदायी होता है।
प्रामाणिकता व स्रोत
स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरापारंपरिक गणेश प्रार्थना श्लोक
अंतिम अद्यतनजून 2026
देव परिचय
श्री गणेश
Lord Ganesha
विघ्नहर्ता श्री गणेश हर शुभ कार्य के प्रथम पूज्य देव हैं — बुद्धि, विवेक और समृद्धि के दाता।