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लिपि:
॥ श्री ॥
वक्रतुण्ड महाकाय
मंत्र · श्री गणेश
पाठ
1
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
अर्थ (हिन्दी)
- हे वक्र (टेढ़ी) सूँड व विशाल काया वाले, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी देव गणेश! आप मेरे समस्त कार्यों को सदा निर्विघ्न (बाधारहित) बनाएँ।
लाभ
- समस्त कार्यों में आने वाली बाधाएँ दूर होती हैं।
- नए कार्य का आरंभ मंगलमय व सफल होता है।
- मन में आत्मविश्वास व सकारात्मकता बढ़ती है।
कब करें पाठ
किसी भी कार्य के आरंभ में · बुधवार व चतुर्थी को · प्रातः पूजा में
स्रोत
पारंपरिक गणेश प्रार्थना श्लोक
