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FAQ
एकादशी व्रत कथा — सामान्य प्रश्न
यह तिथि प्रत्येक माह दो बार आती है — एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। इस प्रकार सामान्य वर्ष में चौबीस तथा अधिक मास वाले वर्ष में छब्बीस एकादशियाँ पड़ती हैं।
पुराणों के अनुसार एकादशी स्वयं भगवान विष्णु की शक्ति से प्रकट हुई देवी हैं, जिन्होंने मुर नामक असुर का संहार किया। प्रसन्न होकर विष्णु ने वरदान दिया कि इस व्रत को करने वाले के समस्त पाप नष्ट होंगे।
व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी को, सूर्योदय के पश्चात निर्धारित काल में किया जाता है। पारण का सटीक समय प्रतिवर्ष पंचांग के अनुसार बदलता है।
एकादशी पर अन्न (विशेषकर चावल) वर्जित है। फलाहार, दूध व जल लिया जा सकता है; तामसिक भोजन त्यागें।
व्रत का पारण द्वादशी तिथि को निर्धारित समय पर, ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराकर किया जाता है।
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