विजया एकादशी

Vijaya Ekadashi

तिथि व्रत (एकादशी)

⚠ अंश

परिचय व महत्व

विजया एकादशी फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है (अमांत गणना में माघ कृष्ण)। "विजया" अर्थात विजय दिलाने वाली — मान्यता है कि यह व्रत कठिन कार्यों व संघर्षों में सफलता व विजय प्रदान करता है।

व्रत कथा

भगवान राम व समुद्र-पार की चुनौती

जब भगवान श्रीराम सीता जी की खोज में लंका की ओर बढ़े, तो विशाल समुद्र पार करना व रावण से युद्ध जीतना बड़ी चुनौती थी। इस विषय में उन्होंने ऋषि वकदाल्भ्य (वकदालभ्य) से मार्गदर्शन माँगा।

ऋषि ने कहा — "फाल्गुन कृष्ण की विजया एकादशी का व्रत करने से आप निश्चय ही समुद्र पार कर लेंगे और युद्ध में भी विजयी होंगे।"

विजय की प्राप्ति

भगवान राम ने वानर-सेना सहित विधिपूर्वक विजया एकादशी का व्रत किया — दशमी को स्वर्ण/रजत/ताम्र या मिट्टी का कलश स्थापित कर, एकादशी को विष्णु-पूजन व रात्रि-जागरण किया।

इस व्रत के प्रभाव से समुद्र पार हुआ और रावण पर विजय प्राप्त हुई। तभी से यह व्रत विजय व सफलता का प्रतीक माना जाता है।

लाभ

  • कठिन कार्यों व संघर्षों में विजय
  • समस्त पापों का नाश
  • इस लोक व परलोक में सफलता

व्रत जानकारी

व्रत प्रकारतिथि व्रत (एकादशी)
संबंधित पर्वएकादशी
तिथिएकादशी
आराध्यश्री विष्णु
आज का पंचांग एकादशी विवरण

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति⚠ अंश
मूल परंपराएकादशी माहात्म्य (कृष्ण-अर्जुन / ब्रह्मा-नारद संवाद)
स्रोतविजया एकादशी माहात्म्य — भगवान राम व ऋषि वकदाल्भ्य प्रसंग · एकादशी माहात्म्य परंपरा
अंतिम अद्यतनजून 2026

संपादकीय टिप्पणी: यह व्रत कथा का सारगर्भित रूप है, प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित। विस्तृत विधि व तिथि हेतु पंचांग तथा किसी विद्वान/पुरोहित से परामर्श लें।