सफला एकादशी

Saphala Ekadashi

तिथि व्रत (एकादशी)

⚠ अंश

परिचय व महत्व

सफला एकादशी पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। "सफला" अर्थात प्रयासों को सफल बनाने वाली। मान्यता है कि अनजाने में भी श्रद्धापूर्वक किया गया यह व्रत पापों का नाश कर जीवन सफल बनाता है।

व्रत कथा

लुम्पक का पतन व वनवास

चम्पावती नगर के राजा महिष्मान का पुत्र लुम्पक दुराचारी था — उसने धन को व्यसनों में उड़ाया और धर्म व साधु-संतों का अपमान किया। अंततः राजा ने उसे राज्य से निकाल दिया और वह वन में रहने लगा।

संयोगवश वह जिस दिन वन में भूखा-प्यासा रहा, वह एकादशी थी। कड़ाके की ठंड में दशमी की रात वह मूर्च्छित-सा पड़ा रहा।

अनजाने व्रत से उद्धार

सफला एकादशी के दिन उसने वन के गिरे हुए फल एकत्र कर श्रद्धापूर्वक पीपल-वृक्ष (भगवान विष्णु के प्रतीक) को अर्पित किए और रात्रि-जागरण किया। इस अनजाने व्रत के प्रभाव से उसके समस्त पाप नष्ट हो गए।

आकाश से दिव्य वाणी हुई कि उसके पाप क्षय हो गए हैं। लुम्पक सद्बुद्धि पाकर पिता के पास लौटा, राज्य पुनः प्राप्त किया, विष्णुभक्त बना और अंत में मोक्ष को प्राप्त हुआ।

लाभ

  • समस्त पापों का नाश व जीवन में सफलता
  • श्रद्धा से किए व्रत का पाँच हज़ार वर्ष की तपस्या तुल्य फल
  • सद्बुद्धि व अंत में मोक्ष

व्रत जानकारी

व्रत प्रकारतिथि व्रत (एकादशी)
संबंधित पर्वएकादशी
तिथिएकादशी
आराध्यश्री विष्णु
आज का पंचांग एकादशी विवरण

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति⚠ अंश
मूल परंपराएकादशी माहात्म्य (कृष्ण-अर्जुन संवाद)
स्रोतसफला एकादशी माहात्म्य — राजकुमार लुम्पक प्रसंग · एकादशी माहात्म्य परंपरा
अंतिम अद्यतनजून 2026

संपादकीय टिप्पणी: यह व्रत कथा का सारगर्भित रूप है, प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित। विस्तृत विधि व तिथि हेतु पंचांग तथा किसी विद्वान/पुरोहित से परामर्श लें।