परमा एकादशी

Parama Ekadashi

तिथि व्रत (एकादशी) — अधिक मास

⚠ अंश

परिचय व महत्व

परमा एकादशी अधिक मास (मलमास/पुरुषोत्तम मास) के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। यह प्रत्येक वर्ष नहीं आती, अतः दुर्लभ व अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है। इसके साथ पाँच दिवसीय "पंचरात्रि व्रत" का भी विशेष माहात्म्य बताया गया है।

व्रत कथा

निर्धन ब्राह्मण सुमेधा

काम्पिल्य नगर में सुमेधा नामक धर्मनिष्ठ किंतु अत्यंत निर्धन ब्राह्मण अपनी पतिव्रता पत्नी के साथ रहता था। दरिद्रता के बावजूद पत्नी ने पति को धनार्जन हेतु परदेश जाने नहीं दिया और अतिथि-सेवा में कमी नहीं आने दी।

एक बार ऋषि कौण्डिन्य उनके यहाँ पधारे। दंपती की श्रद्धा देखकर उन्होंने उन्हें अधिक मास की परमा एकादशी तथा पंचरात्रि व्रत करने की प्रेरणा दी।

दरिद्रता का नाश

दंपती ने श्रद्धापूर्वक यह व्रत किया। ब्रह्मा जी की प्रेरणा से एक राजकुमार ने उन्हें समस्त सुविधाओं से युक्त घर तथा जीविका हेतु एक ग्राम प्रदान किया, जिससे उनकी दरिद्रता सदा के लिए दूर हो गई और अंत में वे स्वर्ग को प्राप्त हुए।

ऋषि कौण्डिन्य ने यह भी बताया कि इसी व्रत के प्रभाव से कुबेर को धनाधिपति का पद मिला और राजा हरिश्चंद्र को उनका परिवार व राज्य पुनः प्राप्त हुआ।

लाभ

  • दरिद्रता का नाश व समृद्धि
  • समस्त तीर्थ व यज्ञ तुल्य पुण्य
  • सुख-सौभाग्य; अंत में स्वर्ग

व्रत जानकारी

व्रत प्रकारतिथि व्रत (एकादशी) — अधिक मास
संबंधित पर्वएकादशी
तिथिएकादशी
आराध्यश्री विष्णु
आज का पंचांग एकादशी विवरण

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति⚠ अंश
मूल परंपराएकादशी माहात्म्य (कृष्ण-अर्जुन संवाद)
स्रोतपरमा एकादशी माहात्म्य — निर्धन ब्राह्मण सुमेधा व ऋषि कौण्डिन्य प्रसंग · एकादशी माहात्म्य परंपरा
अंतिम अद्यतनजून 2026

संपादकीय टिप्पणी: यह व्रत कथा का सारगर्भित रूप है, प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित। विस्तृत विधि व तिथि हेतु पंचांग तथा किसी विद्वान/पुरोहित से परामर्श लें।