पाशांकुशा एकादशी

Pashankusha Ekadashi

तिथि व्रत (एकादशी)

⚠ अंश

परिचय व महत्व

पाशांकुशा एकादशी आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। इसे पापांकुशा एकादशी भी कहते हैं — अर्थात पापों पर अंकुश लगाने वाली। मान्यता है कि इस दिन विष्णु-पूजन से भक्त समस्त पापों से मुक्त होकर यमलोक की यातनाओं से बच जाता है।

व्रत कथा

व्रत का माहात्म्य

शास्त्रों के अनुसार पाशांकुशा एकादशी का व्रत समस्त पापों का नाश करता है और भक्त को आरोग्य, समृद्धि व सुख प्रदान करता है। इस दिन भगवान विष्णु का पूजन, रात्रि-जागरण तथा भूमि, गौ, अन्न, जल व वस्त्र का दान विशेष फलदायी बताया गया है।

कहा गया है कि इस व्रत का पुण्य सहस्र अश्वमेध व सैकड़ों राजसूय यज्ञों से भी अधिक है, और यह माता, पिता व पत्नी — तीनों कुलों की पीढ़ियों को विष्णुलोक की गति प्रदान करता है।

फल

सीमित सामर्थ्य वाले भक्त भी अपनी शक्ति अनुसार दान व पूजन कर इस व्रत का पूर्ण फल पा सकते हैं।

व्रत के प्रभाव से भक्त इस लोक में सुख भोगकर अंत में स्वर्ग व विष्णुलोक को प्राप्त होता है।

लाभ

  • समस्त पापों का नाश व यम-यातना से मुक्ति
  • आरोग्य, समृद्धि व सुख
  • तीनों कुलों की पीढ़ियों का उद्धार; अंत में विष्णुलोक

व्रत जानकारी

व्रत प्रकारतिथि व्रत (एकादशी)
संबंधित पर्वएकादशी
तिथिएकादशी
आराध्यश्री विष्णु
आज का पंचांग एकादशी विवरण

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति⚠ अंश
मूल परंपराएकादशी माहात्म्य (कृष्ण-अर्जुन संवाद)
स्रोतपाशांकुशा (पापांकुशा) एकादशी माहात्म्य (एकादशी माहात्म्य परंपरा)
अंतिम अद्यतनजून 2026

संपादकीय टिप्पणी: यह व्रत कथा का सारगर्भित रूप है, प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित। विस्तृत विधि व तिथि हेतु पंचांग तथा किसी विद्वान/पुरोहित से परामर्श लें।