श्री विष्णु आरती

śrī viṣṇu āratī

Vishnu Aarti (Om Jai Jagdish Hare)

समय
4–5 मिनट
श्लोक/चौपाई
7
✓ संपूर्ण

परिचय

भगवान विष्णु त्रिदेवों में सृष्टि के पालनकर्ता हैं — धर्म की रक्षा हेतु अवतार लेने वाले जगदीश।

स्रोत: पारंपरिक (रचयिता: पं. श्रद्धाराम फिल्लौरी)

आरती (लिरिक्स)

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ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

हे जगत के स्वामी श्रीहरि, आपकी जय हो! जो भक्तजनों के संकट क्षणभर में दूर कर देते हैं।

जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का। सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥

जो आपका ध्यान करता है उसे फल मिलता है और मन का दुख नष्ट होता है; घर में सुख-सम्पत्ति आती है और शरीर के कष्ट मिट जाते हैं।

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी। तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी॥

आप ही मेरे माता-पिता हैं, तो मैं और किसकी शरण लूँ; आपके बिना कोई दूसरा नहीं जिससे मैं आशा करूँ।

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥

आप पूर्ण परमात्मा और अंतर्यामी (सबके मन को जानने वाले) हैं; आप ही पारब्रह्म परमेश्वर और सबके स्वामी हैं।

दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे। अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥

हे दीनों के बंधु, दुख हरने वाले, आप ही मेरे ठाकुर हैं; अपना (आशीर्वाद का) हाथ उठाइए, मैं आपके द्वार पर पड़ा हूँ।

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा। श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥

हे देव, मेरे विषय-विकारों को मिटाइए और पापों को हरिए; मुझमें श्रद्धा-भक्ति बढ़ाइए और संतों की सेवा का भाव दीजिए।

तन मन धन सब है तेरा, स्वामी सब कुछ तेरा। तेरा तुझको अर्पण, क्या लागे मेरा॥

हे स्वामी, तन-मन-धन सब आपका ही है; आपका ही सब कुछ आपको अर्पण करता हूँ — इसमें मेरा क्या है?

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे जगत के स्वामी श्रीहरि, आपकी जय हो! जो भक्तजनों के संकट क्षणभर में दूर कर देते हैं।
  2. जो आपका ध्यान करता है उसे फल मिलता है और मन का दुख नष्ट होता है; घर में सुख-सम्पत्ति आती है और शरीर के कष्ट मिट जाते हैं।
  3. आप ही मेरे माता-पिता हैं, तो मैं और किसकी शरण लूँ; आपके बिना कोई दूसरा नहीं जिससे मैं आशा करूँ।
  4. आप पूर्ण परमात्मा और अंतर्यामी (सबके मन को जानने वाले) हैं; आप ही पारब्रह्म परमेश्वर और सबके स्वामी हैं।
  5. हे दीनों के बंधु, दुख हरने वाले, आप ही मेरे ठाकुर हैं; अपना (आशीर्वाद का) हाथ उठाइए, मैं आपके द्वार पर पड़ा हूँ।
  6. हे देव, मेरे विषय-विकारों को मिटाइए और पापों को हरिए; मुझमें श्रद्धा-भक्ति बढ़ाइए और संतों की सेवा का भाव दीजिए।
  7. हे स्वामी, तन-मन-धन सब आपका ही है; आपका ही सब कुछ आपको अर्पण करता हूँ — इसमें मेरा क्या है?

लाभ

  • जीवन के संकट और कष्ट दूर होते हैं।
  • घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
  • मन में श्रद्धा, भक्ति और संतोष का भाव बढ़ता है।

कब करें पाठ

एकादशी व गुरुवार कोप्रातः व संध्या पूजा मेंसत्यनारायण व्रत में

पाठ विधि

भगवान विष्णु के समक्ष तुलसीदल, पीले पुष्प व पंचामृत अर्पित करें। "ॐ जय जगदीश हरे" आरती समस्त देव-पूजन के समापन पर सार्वभौमिक रूप से गाई जाती है। आरती के पश्चात पंचामृत-प्रसाद वितरित करें।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरापं. श्रद्धाराम फिल्लौरी रचित आरती · पारंपरिक हिन्दू आरती संग्रह
रचयिताश्रद्धाराम फिल्लौरी
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री विष्णु

Lord Vishnu

भगवान विष्णु त्रिदेवों में सृष्टि के पालनकर्ता हैं — धर्म की रक्षा हेतु अवतार लेने वाले जगदीश।

देवता वर्गपालन · रक्षा · धर्म-संस्थापना
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