श्री व्यंकटेश (बालाजी) आरती

śrī vyaṃkaṭeśa (bālājī) āratī

Balaji Aarti (Venkatesh — Jai Dev Jai Dev Jai Vyankatesha, Marathi)

समय
2 मिनट
श्लोक/चौपाई
3
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
शनिवार; एकादशी; ब्रह्मोत्सव
उद्देश्य:समृद्धि (Prosperity)मनोकामना (Wish fulfilment)भक्ति (Devotion)
✓ संपूर्ण

भगवान व्यंकटेश (तिरुपति बालाजी) की प्रचलित आरती मराठी में है — "जय देव जय देव जय व्यंकटेशा, केवळ करुणासिंधू पुरवीसी आशा"। इसमें ध्रुवपद और दो पद हैं। आरती बालाजी को "शेषाचल अवतार" — शेषाचल पर्वत पर अवतरित — और "कमळारमणा" (लक्ष्मी-पति) कहती है, और उनके धाम को "निजवैकुंठ" मानकर ध्यान करती है।

परिचय

भगवान विष्णु त्रिदेवों में सृष्टि के पालनकर्ता हैं — धर्म की रक्षा हेतु अवतार लेने वाले जगदीश।

स्रोत: "जय देव जय देव जय व्यंकटेशा" — भगवान व्यंकटेश (तिरुपति बालाजी) की मराठी आरती

एक नज़र में

मंत्र / पाठश्री व्यंकटेश (बालाजी) आरती
IASTśrī vyaṃkaṭeśa (bālājī) āratī
देवताश्री विष्णु
मूल स्रोत"जय देव जय देव जय व्यंकटेशा" — भगवान व्यंकटेश (तिरुपति बालाजी) की मराठी आरती
शुभ दिनशनिवार; एकादशी; ब्रह्मोत्सव
पाठ समय2 मिनट
कठिनाईमध्यम

उद्भव / पृष्ठभूमि

यह छोटी-सी मराठी आरती तिरुमला के बालाजी को वैकुंठ-वासी विष्णु के रूप में देखती है।

शेषाचल (पद 1). "शेषाचल अवतार तारक तूं देवा" — तिरुमला की पहाड़ियाँ शेषाचल कहलाती हैं; आरती कहती है कि तारने वाले देव वहीं अवतरित हुए, और देवता, मुनि और लोग भाव से उनकी सेवा करते हैं। वे कमळारमण (लक्ष्मी के पति) और अगणित गुणों के भंडार हैं।

करुणासिंधु (ध्रुवपद). "केवळ करुणासिंधू पुरवीसी आशा" — आप करुणा के सागर हैं, आशाएँ पूरी करते हैं।

निजवैकुंठ (पद 2). "हें निजवैकुंठ म्हणुनि ध्यातों मी तूतें" — इस धाम को ही वैकुंठ मानकर मैं आपका ध्यान करता हूँ; आपका स्वरूप देखकर अद्भुत सुख होता है, और ध्यान से मन दृढ़ होता है।

आरती (लिरिक्स)

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शेषाचल अवतार तारक तूं देवा। सुरवर मुनिवर भावें करिती जन सेवा। कमळारमणा अससी अगणित गुण ठेवा। कमळाक्षा मज रक्षुनि सत्वर वर द्यावा॥

हे देव, आप शेषाचल पर अवतरित तारने वाले हैं; श्रेष्ठ देवता, मुनि और लोग भाव से आपकी सेवा करते हैं; हे कमला (लक्ष्मी) के पति, आप अगणित गुणों का भंडार हैं; हे कमल-नयन, मेरी रक्षा करके शीघ्र वर दीजिए।

जय देव जय देव जय व्यंकटेशा। केवळ करुणासिंधू पुरवीसी आशा॥

(ध्रुवपद) हे देव, हे व्यंकटेश, आपकी जय हो! आप करुणा के सागर हैं, (भक्तों की) आशाएँ पूरी करते हैं।

हें निजवैकुंठ म्हणुनि ध्यातों मी तूतें। दाखविसी गुण कैसे सकळिक लोकाते। देखुनि तुझें स्वरूप सुख अद्भुत होतें। ध्यातों तुजला श्रीपति दृढ मानस होतें॥

इसी को (आपका) निज-वैकुंठ मानकर मैं आपका ध्यान करता हूँ; आप सब लोगों को कैसे-कैसे गुण दिखाते हैं! आपका स्वरूप देखकर अद्भुत सुख होता है; हे श्रीपति, आपका ध्यान करने से मन दृढ़ हो जाता है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे देव, आप शेषाचल पर अवतरित तारने वाले हैं; श्रेष्ठ देवता, मुनि और लोग भाव से आपकी सेवा करते हैं; हे कमला (लक्ष्मी) के पति, आप अगणित गुणों का भंडार हैं; हे कमल-नयन, मेरी रक्षा करके शीघ्र वर दीजिए।
  2. (ध्रुवपद) हे देव, हे व्यंकटेश, आपकी जय हो! आप करुणा के सागर हैं, (भक्तों की) आशाएँ पूरी करते हैं।
  3. इसी को (आपका) निज-वैकुंठ मानकर मैं आपका ध्यान करता हूँ; आप सब लोगों को कैसे-कैसे गुण दिखाते हैं! आपका स्वरूप देखकर अद्भुत सुख होता है; हे श्रीपति, आपका ध्यान करने से मन दृढ़ हो जाता है।

लाभ

  • बालाजी की करुणा पर भरोसा — "केवळ करुणासिंधू पुरवीसी आशा"।
  • मन की दृढ़ता — "ध्यातों तुजला श्रीपति दृढ मानस होतें"।

कब करें पाठ

शनिवार कोएकादशी परबालाजी-पूजन के बाद

पाठ विधि

भगवान व्यंकटेश (बालाजी) के चित्र के समक्ष घी का दीपक जलाएँ और तुलसीदल अर्पित करें। ध्रुवपद "जय देव जय देव जय व्यंकटेशा" पहले पद के बाद और अंत में गाया जाता है। आरती मराठी में है; हर पद का हिन्दी अर्थ साथ दिया गया है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराsantsahitya.in — श्री व्यंकटेश आरती (आधार-पाठ) · hindunidhi.com — श्री व्यंकटेश जी आरती
रचयिताअज्ञात (किसी प्रति में नाम नहीं)
अंतिम अद्यतनसितंबर 2026

यह भी देखें

देव परिचय

श्री विष्णु

Lord Vishnu

भगवान विष्णु त्रिदेवों में सृष्टि के पालनकर्ता हैं — धर्म की रक्षा हेतु अवतार लेने वाले जगदीश।

देवता वर्गपालन · रक्षा · धर्म-संस्थापना
वाहनगरुड़
संबंधित वारगुरुवार
मुख्य मंत्रॐ नमो भगवते वासुदेवाय
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श्री व्यंकटेश (बालाजी) आरती — सामान्य प्रश्न

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