समय
2 मिनट
श्लोक/चौपाई
3
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
शनिवार; एकादशी; ब्रह्मोत्सव
उद्देश्य:समृद्धि (Prosperity)मनोकामना (Wish fulfilment)भक्ति (Devotion)
✓ संपूर्ण
भगवान व्यंकटेश (तिरुपति बालाजी) की प्रचलित आरती मराठी में है — "जय देव जय देव जय व्यंकटेशा, केवळ करुणासिंधू पुरवीसी आशा"। इसमें ध्रुवपद और दो पद हैं। आरती बालाजी को "शेषाचल अवतार" — शेषाचल पर्वत पर अवतरित — और "कमळारमणा" (लक्ष्मी-पति) कहती है, और उनके धाम को "निजवैकुंठ" मानकर ध्यान करती है।
FAQ
श्री व्यंकटेश (बालाजी) आरती — सामान्य प्रश्न
भगवान व्यंकटेश (तिरुपति बालाजी) की प्रचलित आरती मराठी में है — "जय देव जय देव जय व्यंकटेशा, केवळ करुणासिंधू पुरवीसी आशा"। संत साहित्य और हिंदूनिधि — दोनों इसे छापते हैं। हिन्दी में ऐसी कोई आरती हमें दो मिलती-जुलती प्रतियों में नहीं मिली।
तिरुमला की पहाड़ियाँ शेषाचल कहलाती हैं। आरती कहती है कि तारने वाले देव वहीं अवतरित हुए — "शेषाचल अवतार तारक तूं देवा"।
दो प्रकाशित प्रतियों से — संत साहित्य (आधार) और हिंदूनिधि। ध्रुवपद और दोनों पद दोनों में हैं।
पर्व
