श्री बालाजी आरती

śrī bālājī āratī

Balaji Aarti (Venkatesh / Tirupati Balaji)

समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
✓ संपूर्ण

परिचय

भगवान विष्णु त्रिदेवों में सृष्टि के पालनकर्ता हैं — धर्म की रक्षा हेतु अवतार लेने वाले जगदीश।

स्रोत: पारंपरिक तिरुपति बालाजी (वेंकटेश) आरती

उद्भव / पृष्ठभूमि

श्री बालाजी (वेंकटेश/श्रीनिवास) भगवान विष्णु के स्वरूप हैं, जो तिरुपति-तिरुमला में विराजमान हैं। यह आरती बालाजी पूजन व शनिवार को गाई जाती है, जिससे ऋण-मुक्ति, मनोकामना-पूर्ति व समृद्धि प्राप्त होती है।

आरती (लिरिक्स)

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जय बालाजी देवा, प्रभु जय वेंकटेशा। भक्तन के दुख हरते, श्रीनिवास परमेशा॥

हे बालाजी देव, हे वेंकटेश, आपकी जय हो! हे श्रीनिवास परमेश्वर, आप भक्तों के दुःख हरने वाले हैं।

शेष-शैल विराजत, सप्तगिरि पर धामा। लक्ष्मी संग विराजे, सुन्दर अति अभिरामा॥

शेषशैल (सात पर्वतों) पर आपका धाम सुशोभित है; लक्ष्मी (पद्मावती) के संग आप अति सुन्दर व मनोहर रूप में विराजमान हैं।

कलियुग के तुम स्वामी, दर्शन सुख देते। ऋण-संकट सब हरते, मनवांछित देते॥

आप कलियुग के स्वामी हैं और दर्शन का सुख देते हैं; आप ऋण व संकट हर लेते हैं तथा मनोवांछित फल देते हैं।

गोविंदा गोविंदा, जयकारा गूँजे। शरण पड़े की रक्षा, बालाजी कीजे॥

"गोविंदा-गोविंदा" का जयकारा गूँजता है; हे बालाजी, शरण में आए हुए जनों की रक्षा कीजिए।

बालाजी की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। ऋण-संकट सब मिटते, सुख-सम्पति पावे॥

जो भक्त श्रद्धा से बालाजी की यह आरती गाता है, उसके ऋण व संकट मिट जाते हैं और वह सुख-सम्पत्ति प्राप्त करता है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे बालाजी देव, हे वेंकटेश, आपकी जय हो! हे श्रीनिवास परमेश्वर, आप भक्तों के दुःख हरने वाले हैं।
  2. शेषशैल (सात पर्वतों) पर आपका धाम सुशोभित है; लक्ष्मी (पद्मावती) के संग आप अति सुन्दर व मनोहर रूप में विराजमान हैं।
  3. आप कलियुग के स्वामी हैं और दर्शन का सुख देते हैं; आप ऋण व संकट हर लेते हैं तथा मनोवांछित फल देते हैं।
  4. "गोविंदा-गोविंदा" का जयकारा गूँजता है; हे बालाजी, शरण में आए हुए जनों की रक्षा कीजिए।
  5. जो भक्त श्रद्धा से बालाजी की यह आरती गाता है, उसके ऋण व संकट मिट जाते हैं और वह सुख-सम्पत्ति प्राप्त करता है।

लाभ

  • ऋण-मुक्ति व आर्थिक संकट से राहत मिलती है।
  • मनोकामना पूर्ण होकर समृद्धि आती है।
  • भक्ति, सुख-शांति व विष्णु-कृपा प्राप्त होती है।

कब करें पाठ

शनिवार कोएकादशी व वैकुण्ठ एकादशी परप्रातः व संध्या पूजा में

पाठ विधि

श्री बालाजी के समक्ष तुलसी व पुष्प अर्पित करें, दीप-धूप जलाकर "ॐ नमो वेंकटेशाय" तथा "गोविंदा-गोविंदा" का स्मरण करते हुए आरती गाएँ और प्रसाद वितरण करें।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरापारंपरिक हिन्दू आरती संग्रह
रचयितापारंपरिक
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री विष्णु

Lord Vishnu

भगवान विष्णु त्रिदेवों में सृष्टि के पालनकर्ता हैं — धर्म की रक्षा हेतु अवतार लेने वाले जगदीश।

देवता वर्गपालन · रक्षा · धर्म-संस्थापना
वाहनगरुड़
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मुख्य मंत्रॐ नमो भगवते वासुदेवाय
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