समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
6
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
कार्तिक मास, देवउठनी एकादशी (तुलसी विवाह) व नित्य संध्या
उद्देश्य:आरोग्य (Health)भक्ति (Devotion)मन की शांति (Peace)
✓ संपूर्ण
तुलसी माता की सबसे प्रचलित आरती "जय जय तुलसी माता, मैया जय तुलसी माता" है। पाँच पदों की यह आरती तुलसी को जगत की सुखदाता, भव-त्राता और हरि की अति प्रिया कहती है। कार्तिक मास, तुलसी विवाह और नित्य संध्या-दीपदान के समय यही गाई जाती है।
FAQ
श्री तुलसी माता आरती — सामान्य प्रश्न
सबसे प्रचलित आरती "जय जय तुलसी माता, मैया जय तुलसी माता। सब जग की सुख दाता, सबकी वर माता॥" है। पाँच पदों की यह आरती घर की नित्य संध्या-पूजा और तुलसी विवाह — दोनों में गाई जाती है।
हाँ। "जय जय तुलसी माता" के अतिरिक्त "तुलसी महारानी नमो-नमो" वाली एक अलग आरती भी प्रचलित है। वह इस आरती का पाठ-भेद नहीं, दूसरी रचना है। इस पृष्ठ पर पहली वाली दी गई है।
नित्य संध्या को तुलसी के समक्ष दीप जलाते समय; कार्तिक मास में दीपदान के साथ; और देवउठनी एकादशी पर तुलसी विवाह में।
यह पंक्ति तुलसी के शास्त्रीय नाम गिनाती है — श्यामा (श्याम वर्ण वाली), सुरबल्ली (देवताओं की लता) और ग्राम्या (गाँव में बसने वाली)। ये नाम निघंटु-परंपरा में तुलसी के पर्याय के रूप में मिलते हैं।
क्योंकि विष्णु जी के मस्तक पर तुलसी-दल अर्पित किया जाता है, और परंपरा में उनका भोग तुलसी-दल के बिना पूर्ण नहीं माना जाता। इसी से तुलसी का एक नाम "विष्णुप्रिया" है।
भक्तिभारत और धर्मसार — दो स्वतंत्र प्रकाशित स्रोतों से मिलाकर। दोनों का पाठ शब्दशः एक निकला, एक भी अंतर नहीं।
पर्व
