श्री तुलसी माता आरती

śrī tulasī mātā āratī

Tulsi Mata Aarti (Jai Jai Tulsi Mata)

समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
✓ संपूर्ण

परिचय

भगवान विष्णु त्रिदेवों में सृष्टि के पालनकर्ता हैं — धर्म की रक्षा हेतु अवतार लेने वाले जगदीश।

स्रोत: पारंपरिक तुलसी माता आरती

उद्भव / पृष्ठभूमि

तुलसी माता को विष्णुप्रिया तथा परम पवित्र देवी-स्वरूप पौधा माना जाता है। यह आरती संध्या को तुलसी के समक्ष दीप जलाकर तथा कार्तिक मास व तुलसी विवाह पर गाई जाती है, जिससे घर में पवित्रता, आरोग्य व विष्णु-कृपा आती है।

आरती (लिरिक्स)

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जय जय तुलसी माता, मैया जय जय तुलसी माता। सब जग की सुख-दाता, वर-दायिनी माता॥

हे तुलसी माता, आपकी जय हो! आप समस्त जगत को सुख देने वाली तथा वरदान देने वाली माता हैं।

हरि के शीश विराजत, हरि को प्राण-प्यारी। पतित-पावनी तुलसी, विष्णु-वल्लभ न्यारी॥

आप हरि (विष्णु) के शीश पर विराजती हैं और उन्हें प्राणों से प्यारी हैं; पतितों को पावन करने वाली तुलसी विष्णु को अति प्रिय व अद्वितीय हैं।

दल तेरा अति पावन, पूजत सब नर-नारी। रोग-शोक हर लेती, तू है भव-तारी॥

आपका दल (पत्ता) अति पवित्र है, सभी नर-नारी आपको पूजते हैं; आप रोग-शोक हर लेती हैं और भवसागर से तारने वाली हैं।

घर-आँगन में तुलसी, मंगल नित करती। नकारात्मकता हरती, शुभता घर भरती॥

घर-आँगन में स्थित तुलसी नित्य मंगल करती हैं; वे नकारात्मकता हर लेती हैं और घर को शुभता से भर देती हैं।

तुलसी माँ की आरती, जो जन नित गावे। आरोग्य सुख-सम्पति, हरि-कृपा पावे॥

जो भक्त नित्य तुलसी माँ की यह आरती गाता है, वह आरोग्य, सुख-सम्पत्ति तथा हरि (विष्णु) की कृपा प्राप्त करता है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे तुलसी माता, आपकी जय हो! आप समस्त जगत को सुख देने वाली तथा वरदान देने वाली माता हैं।
  2. आप हरि (विष्णु) के शीश पर विराजती हैं और उन्हें प्राणों से प्यारी हैं; पतितों को पावन करने वाली तुलसी विष्णु को अति प्रिय व अद्वितीय हैं।
  3. आपका दल (पत्ता) अति पवित्र है, सभी नर-नारी आपको पूजते हैं; आप रोग-शोक हर लेती हैं और भवसागर से तारने वाली हैं।
  4. घर-आँगन में स्थित तुलसी नित्य मंगल करती हैं; वे नकारात्मकता हर लेती हैं और घर को शुभता से भर देती हैं।
  5. जो भक्त नित्य तुलसी माँ की यह आरती गाता है, वह आरोग्य, सुख-सम्पत्ति तथा हरि (विष्णु) की कृपा प्राप्त करता है।

लाभ

  • घर में पवित्रता, सुख-शांति व सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
  • आरोग्य व रोग-नाश में सहायता मिलती है।
  • विष्णु-कृपा व आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

कब करें पाठ

नित्य संध्या को (तुलसी के समक्ष दीप जलाकर)कार्तिक मास मेंतुलसी विवाह (देवउठनी एकादशी) पर

पाठ विधि

संध्या को तुलसी के पौधे के समक्ष घी का दीपक जलाएँ, जल अर्पित करें और आरती गाएँ। कार्तिक मास व तुलसी विवाह पर इसका विशेष महत्व है। ध्यान रहे — एकादशी व रविवार को तुलसी-पत्र नहीं तोड़े जाते।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरापारंपरिक हिन्दू आरती संग्रह
रचयितापारंपरिक
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री विष्णु

Lord Vishnu

भगवान विष्णु त्रिदेवों में सृष्टि के पालनकर्ता हैं — धर्म की रक्षा हेतु अवतार लेने वाले जगदीश।

देवता वर्गपालन · रक्षा · धर्म-संस्थापना
वाहनगरुड़
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