समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
गुरुवार व एकादशी
उद्देश्य:भक्ति (Devotion)आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual Growth)मोक्ष (Liberation)
✓ संपूर्ण मूल मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय एक मूल मंत्र है — श्रीमद्भागवत परंपरा (द्वादशाक्षरी मंत्र)। मैं भगवान वासुदेव (श्रीकृष्ण/विष्णु) को नमस्कार करता हूँ। परंपरा में इसे मुख्यतः भक्ति, आध्यात्मिक उन्नति, मोक्ष के भाव से जपा जाता है, प्रायः 108 बार अर्थात एक माला।
FAQ
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय — सामान्य प्रश्न
यह भगवान वासुदेव अर्थात् श्रीकृष्ण/विष्णु का द्वादशाक्षरी (बारह अक्षरों वाला) मंत्र है।
इसके जप से भक्ति, मन की शुद्धि व शांति बढ़ती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
परंपरा में इस मंत्र का जप 108 बार — अर्थात एक माला — करने का विधान कहा जाता है, और इसके लिए तुलसी माला का प्रयोग बताया जाता है। जप का सुझाया गया समय प्रातः, संध्या व एकादशी है। संख्या से अधिक महत्व नियमितता तथा शुद्ध उच्चारण का माना गया है।
मंत्र के पदों का अर्थ इस प्रकार है — ॐ — प्रणव — परब्रह्म का प्रतीक; नमो — नमस्कार; भगवते — भगवान को (ऐश्वर्ययुक्त को); वासुदेवाय — वासुदेव — श्रीकृष्ण/विष्णु को। पूरे मंत्र का भाव यह है: मैं भगवान वासुदेव (श्रीकृष्ण/विष्णु) को नमस्कार करता हूँ। यह द्वादशाक्षरी (बारह अक्षर) महामंत्र भगवान के प्रति पूर्ण शरणागति का प्रतीक है।
यह मूल मंत्र है, सामान्य नाम-जप नहीं। परंपरा में इस श्रेणी के मंत्रों के लिए गुरु-दीक्षा को श्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि इनमें उच्चारण, संख्या तथा नियम का विशेष विधान बताया जाता है। जिन्हें दीक्षा प्राप्त न हो, उनके लिए परंपरा इष्ट के नाम-जप, स्तुति व आरती का मार्ग सुझाती है — वह सर्वथा खुला कहा गया है।
"ॐ" दीर्घ, फिर "न-मो", "भ-ग-व-ते", तत्पश्चात "वा-सु-दे-वा-य"। "भगवते" व "वासुदेवाय" में दीर्घ स्वरों (वा, दे, वा) का स्पष्ट उच्चारण करें। परंपरा में मंत्र-जप में शुद्ध उच्चारण का विशेष महत्व कहा जाता है, इसलिए आरंभ में धीरे-धीरे व स्पष्ट बोलकर अभ्यास करें और गति बाद में बढ़ाएँ।
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