श्री बद्रीनाथ चालीसा
śrī badrīnātha cālīsā
Badrinath Chalisa (Badrinath, Uttarakhand)
परिचय
भगवान विष्णु त्रिदेवों में सृष्टि के पालनकर्ता हैं — धर्म की रक्षा हेतु अवतार लेने वाले जगदीश।
स्रोत: बद्रीनाथ धाम, चमोली (उत्तराखंड)
संपूर्ण चालीसा
गणपति-गुरु-पद वंदना, सुमिर हृदय हरि-नाम। बद्रीनाथ चालीसा कहूँ, करहु भक्त सुखधाम॥
गणपति व गुरु के चरणों की वंदना कर, हृदय में हरि-नाम का स्मरण कर मैं बद्रीनाथ चालीसा कहता हूँ; हे प्रभु, भक्तों को सुख-धाम दीजिए।
जय बद्रीनाथ हरि नारायण। भक्तन के तुम कष्ट-निवारण॥
हे बद्रीनाथ हरि नारायण, आपकी जय हो; आप भक्तों के कष्ट दूर करने वाले हैं।
विष्णु-स्वरूप बद्री-विशाला। हिमगिरि-वासी परम कृपाला॥
आप विष्णु-स्वरूप बद्री-विशाल हैं; हिमालय-वासी व परम कृपालु हैं।
अलकनंदा-तट छवि सुहाये। नर-नारायण संग बस जाये॥
अलकनंदा नदी के तट पर आपकी छवि सुहावनी है; नर-नारायण पर्वत के संग आप बसते हैं।
शालिग्राम-शिला प्रभु प्यारी। ध्यान-मुद्रा छवि अति न्यारी॥
शालिग्राम-शिला से बनी आपकी मूर्ति प्यारी है; ध्यान-मुद्रा में आपकी छवि अति अनुपम है।
बेर-वृक्ष तले तप कीना। लक्ष्मी-छाया-वर तुम दीना॥
बेर (बद्री) वृक्ष के तले आपने तप किया; लक्ष्मी ने छाया दी जिससे यह "बद्री" कहलाया।
जो जन तुमको नित ही ध्यावै। भय-संकट से मुक्ति पावै॥
जो जन नित्य आपका ध्यान करता है, वह भय व संकट से मुक्ति पाता है।
चार-धाम में प्रमुख कहाये। बद्री-दरस जो जन पाये॥
आप चार-धाम में प्रमुख कहलाते हैं; जो जन बद्री-दर्शन पाता है, वह धन्य हो जाता है।
तप्त-कुण्ड में स्नान सुहाता। पाप-ताप सब दूर भगाता॥
तप्त-कुण्ड में स्नान सुहावना है, जो समस्त पाप-ताप दूर भगाता है।
जो नर श्रद्धा से तुम्हें ध्यावै। रोग-शोक भय निकट न आवै॥
जो मनुष्य श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसके निकट रोग, शोक व भय नहीं आते।
एकादशी व्रत जो जन धारे। सकल मनोरथ प्रभु ते सारे॥
जो एकादशी का व्रत धारण करता है, प्रभु उसके समस्त मनोरथ पूर्ण करते हैं।
दीन-दुखी की सुनत पुकारा। पल में करते बेड़ा पारा॥
आप दीन-दुखियों की पुकार सुनते ही पल भर में उनका बेड़ा पार कर देते हैं।
जो जन तुमको शीश नवावै। भय-संकट से मुक्ति पावै॥
जो जन आपको शीश नवाता है, वह भय व संकट से मुक्ति पाता है।
तुलसी-चरणामृत जो लेते। हरि-कृपा वे सब घर भरते॥
जो तुलसी व चरणामृत ग्रहण करते हैं, वे हरि-कृपा से घर भरते हैं।
रोग-दोष सब दूर भगाते। सुख-समृद्धि घर में लाते॥
आप समस्त रोग-दोष दूर भगाते हैं और घर में सुख-समृद्धि लाते हैं।
जो नर निशदिन ध्यान लगावै। बद्री-कृपा सहज वह पावै॥
जो मनुष्य दिन-रात ध्यान लगाता है, वह सहज ही बद्री-कृपा प्राप्त करता है।
मंगल-कारी विघ्न-विनाशन। भय-हारी तुम सुख-साधन॥
आप मंगलकारी व विघ्नों के विनाशक हैं; भय हरकर सुख देने वाले हैं।
नारद-कृत पूजा तुम पाते। युग-युग से जग को सुख देते॥
आप नारद द्वारा की गई पूजा पाते हैं और युग-युग से जगत को सुख देते हैं।
जो श्रद्धा से तुम्हें ध्यावै। ता के सब बिगड़े बन जावै॥
जो श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसके सब बिगड़े कार्य बन जाते हैं।
जो यह बद्री चालीसा गावै। भय-संकट सब दूर नसावै॥
जो यह बद्रीनाथ चालीसा गाता है, उसके भय व संकट सब दूर नष्ट हो जाते हैं।
नित प्रति पाठ करे जो कोई। ता पर कृपा बद्री की होई॥
जो कोई नित्य पाठ करता है, उस पर बद्रीनाथ की कृपा होती है।
मन-इच्छित फल सब जन पावैं। सुख-समृद्धि घर में लावैं॥
सब जन मन-इच्छित फल पाते हैं और घर में सुख-समृद्धि लाते हैं।
बद्री-कृपा जिन पर होई। ता को कष्ट सतावे न कोई॥
जिन पर बद्रीनाथ की कृपा होती है, उन्हें कोई कष्ट नहीं सताता।
भगवान विष्णु तुम जग-पालक। भव-सागर से तुम तारक॥
आप भगवान विष्णु जगत के पालक हैं; भव-सागर से तारने वाले हैं।
जो सत भाव करे यह सेवा। रीझत तुरत बद्री देवा॥
जो सच्चे भाव से यह सेवा करता है, उस पर बद्री देव तुरंत रीझ (प्रसन्न हो) जाते हैं।
संकट-मोचन नाम तुम्हारा। भक्त-हृदय में नित्य निवारा॥
आपका नाम संकट-मोचन है; आप भक्तों के हृदय में नित्य निवास कर कष्ट दूर करते हैं।
महिमा तुम्हरी अति अपारा। वेद-पुराण करत विस्तारा॥
आपकी महिमा अति अपार है, जिसका विस्तार वेद-पुराण करते हैं।
कलियुग में तुम सुलभ कहाये। जो जन शरण तुम्हारी आये॥
कलियुग में आप सुलभ कहलाते हैं; जो जन आपकी शरण में आता है, वह तर जाता है।
घर-घर ज्योति तुम्हारी जागै। नर-नारी सब तुमको पागै॥
घर-घर में आपकी ज्योति जगती है; नर-नारी सब आपमें अनुरक्त हो जाते हैं।
दुःख-संकट जो जन पीड़े। तुम्हें सुमिर कर सब दुख छीड़े॥
जो जन दुःख-संकट से पीड़ित हैं, वे आपका स्मरण कर समस्त दुःख दूर कर लेते हैं।
बद्री-स्तुति जो जन गावै। रोग-शोक सब दूर भगावै॥
जो जन बद्री-स्तुति गाता है, वह समस्त रोग-शोक दूर भगा देता है।
बद्री-धाम की महिमा भारी। भव-तारण तुम जग-हितकारी॥
बद्री-धाम की महिमा अति महान है; आप भव-तारण व जगत-हितकारी हैं।
मोक्ष-मार्ग जग को दिखलाते। शरणागत को पार लगाते॥
आप जगत को मोक्ष का मार्ग दिखलाते हैं और शरणागत को पार लगाते हैं।
जग-पालक तुम परम कल्याणी। भव-तारण तुम सुख-दानी॥
आप जगत के पालक व परम कल्याणकारी हैं; भव-तारण व सुख देने वाले हैं।
जो जन बद्री गुण गावै। पाप-ताप सब दूर भगावै॥
जो जन बद्रीनाथ के गुण गाता है, वह समस्त पाप-ताप दूर भगा देता है।
बद्री-वंदन जो जन गावै। इहलोक-परलोक सुख पावै॥
जो जन बद्री-वंदना गाता है, वह इस लोक व परलोक दोनों में सुख पाता है।
सुख-शान्ति-समृद्धि घर में आवै। भक्ति-श्रद्धा-संतोष बढ़ावै॥
घर में सुख, शांति व समृद्धि आती है और भक्ति, श्रद्धा व संतोष बढ़ता है।
भय-संकट सब दूर हटावै। बद्री जो जन नित ध्यावै॥
जो जन बद्रीनाथ का नित्य ध्यान करता है, वह भय व संकट सब दूर हटा देता है।
मोक्ष-मार्ग वह सहज वह पावै। बद्री-नाम जो जन गावै॥
जो जन बद्री-नाम गाता है, वह सहज ही मोक्ष-मार्ग पा लेता है।
हरि-कृपा-सुख घर में लावै। भक्ति-शान्ति सब बढ़ावै॥
घर में हरि-कृपा व सुख आता है और भक्ति व शांति बढ़ती है।
जय जय जय बद्री भयहारी। रक्षा करो प्रभु शरण हमारी॥
हे भय हरने वाले बद्रीनाथ, आपकी जय हो; हे प्रभु, शरण में आए हम सबकी रक्षा कीजिए।
बद्री चालीसा सरल यह, पढ़े प्रेम मन लाय। भय-संकट सब दूर हो, हरि-कृपा घर आय॥
जो प्रेमपूर्वक मन लगाकर यह सरल बद्रीनाथ चालीसा पढ़ता है, उसके भय-संकट दूर होते हैं और घर में हरि-कृपा आती है।
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अर्थ (हिन्दी)
- गणपति व गुरु के चरणों की वंदना कर, हृदय में हरि-नाम का स्मरण कर मैं बद्रीनाथ चालीसा कहता हूँ; हे प्रभु, भक्तों को सुख-धाम दीजिए।
- हे बद्रीनाथ हरि नारायण, आपकी जय हो; आप भक्तों के कष्ट दूर करने वाले हैं।
- आप विष्णु-स्वरूप बद्री-विशाल हैं; हिमालय-वासी व परम कृपालु हैं।
- अलकनंदा नदी के तट पर आपकी छवि सुहावनी है; नर-नारायण पर्वत के संग आप बसते हैं।
- शालिग्राम-शिला से बनी आपकी मूर्ति प्यारी है; ध्यान-मुद्रा में आपकी छवि अति अनुपम है।
- बेर (बद्री) वृक्ष के तले आपने तप किया; लक्ष्मी ने छाया दी जिससे यह "बद्री" कहलाया।
- जो जन नित्य आपका ध्यान करता है, वह भय व संकट से मुक्ति पाता है।
- आप चार-धाम में प्रमुख कहलाते हैं; जो जन बद्री-दर्शन पाता है, वह धन्य हो जाता है।
- तप्त-कुण्ड में स्नान सुहावना है, जो समस्त पाप-ताप दूर भगाता है।
- जो मनुष्य श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसके निकट रोग, शोक व भय नहीं आते।
- जो एकादशी का व्रत धारण करता है, प्रभु उसके समस्त मनोरथ पूर्ण करते हैं।
- आप दीन-दुखियों की पुकार सुनते ही पल भर में उनका बेड़ा पार कर देते हैं।
- जो जन आपको शीश नवाता है, वह भय व संकट से मुक्ति पाता है।
- जो तुलसी व चरणामृत ग्रहण करते हैं, वे हरि-कृपा से घर भरते हैं।
- आप समस्त रोग-दोष दूर भगाते हैं और घर में सुख-समृद्धि लाते हैं।
- जो मनुष्य दिन-रात ध्यान लगाता है, वह सहज ही बद्री-कृपा प्राप्त करता है।
- आप मंगलकारी व विघ्नों के विनाशक हैं; भय हरकर सुख देने वाले हैं।
- आप नारद द्वारा की गई पूजा पाते हैं और युग-युग से जगत को सुख देते हैं।
- जो श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसके सब बिगड़े कार्य बन जाते हैं।
- जो यह बद्रीनाथ चालीसा गाता है, उसके भय व संकट सब दूर नष्ट हो जाते हैं।
- जो कोई नित्य पाठ करता है, उस पर बद्रीनाथ की कृपा होती है।
- सब जन मन-इच्छित फल पाते हैं और घर में सुख-समृद्धि लाते हैं।
- जिन पर बद्रीनाथ की कृपा होती है, उन्हें कोई कष्ट नहीं सताता।
- आप भगवान विष्णु जगत के पालक हैं; भव-सागर से तारने वाले हैं।
- जो सच्चे भाव से यह सेवा करता है, उस पर बद्री देव तुरंत रीझ (प्रसन्न हो) जाते हैं।
- आपका नाम संकट-मोचन है; आप भक्तों के हृदय में नित्य निवास कर कष्ट दूर करते हैं।
- आपकी महिमा अति अपार है, जिसका विस्तार वेद-पुराण करते हैं।
- कलियुग में आप सुलभ कहलाते हैं; जो जन आपकी शरण में आता है, वह तर जाता है।
- घर-घर में आपकी ज्योति जगती है; नर-नारी सब आपमें अनुरक्त हो जाते हैं।
- जो जन दुःख-संकट से पीड़ित हैं, वे आपका स्मरण कर समस्त दुःख दूर कर लेते हैं।
- जो जन बद्री-स्तुति गाता है, वह समस्त रोग-शोक दूर भगा देता है।
- बद्री-धाम की महिमा अति महान है; आप भव-तारण व जगत-हितकारी हैं।
- आप जगत को मोक्ष का मार्ग दिखलाते हैं और शरणागत को पार लगाते हैं।
- आप जगत के पालक व परम कल्याणकारी हैं; भव-तारण व सुख देने वाले हैं।
- जो जन बद्रीनाथ के गुण गाता है, वह समस्त पाप-ताप दूर भगा देता है।
- जो जन बद्री-वंदना गाता है, वह इस लोक व परलोक दोनों में सुख पाता है।
- घर में सुख, शांति व समृद्धि आती है और भक्ति, श्रद्धा व संतोष बढ़ता है।
- जो जन बद्रीनाथ का नित्य ध्यान करता है, वह भय व संकट सब दूर हटा देता है।
- जो जन बद्री-नाम गाता है, वह सहज ही मोक्ष-मार्ग पा लेता है।
- घर में हरि-कृपा व सुख आता है और भक्ति व शांति बढ़ती है।
- हे भय हरने वाले बद्रीनाथ, आपकी जय हो; हे प्रभु, शरण में आए हम सबकी रक्षा कीजिए।
- जो प्रेमपूर्वक मन लगाकर यह सरल बद्रीनाथ चालीसा पढ़ता है, उसके भय-संकट दूर होते हैं और घर में हरि-कृपा आती है।
लाभ
- पापों का नाश होकर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
- भय, रोग व संकट से रक्षा होती है।
- विष्णु-भक्ति, सुख-शांति व समृद्धि की प्राप्ति होती है।
- चार-धाम यात्रा व बद्री-दर्शन का संकल्प सिद्ध होता है।
कब करें पाठ
पाठ विधि
भगवान बद्रीनाथ (विष्णु) के समक्ष तुलसी, पुष्प व दीप अर्पित करें, "ॐ नमो नारायणाय" व "जय बद्रीविशाल" का स्मरण करते हुए चालीसा का पाठ करें। एकादशी व यात्रा के समय विशेष फलदायी।
प्रामाणिकता व स्रोत
देव परिचय
श्री विष्णु
Lord Vishnu
भगवान विष्णु त्रिदेवों में सृष्टि के पालनकर्ता हैं — धर्म की रक्षा हेतु अवतार लेने वाले जगदीश।
