एकादशी

Ekadashi

एकादशी

महत्व

एकादशी हिन्दू पंचांग की ग्यारहवीं तिथि है और प्रत्येक मास में दो बार आती है — एक शुक्ल पक्ष में तथा एक कृष्ण पक्ष में। इस प्रकार सामान्य वर्ष में चौबीस एकादशियाँ पड़ती हैं।

यह तिथि भगवान विष्णु की आराधना को समर्पित है। परंपरा में इस दिन अन्न का त्याग कर उपवास रखा जाता है, तुलसी अर्पित की जाती है और रात्रि-जागरण किया जाता है; व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी को होता है।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि प्रत्येक एकादशी का अपना नाम, अपनी कथा और अपना फल है — इसी संग्रह में सभी छब्बीस एकादशियों की कथाएँ अलग-अलग दी गई हैं।

पूजन विधि व परंपरा

  • उपवास — निर्जल अथवा फलाहार
  • विष्णु पूजन व तुलसी-दल अर्पण
  • विष्णु सहस्रनाम तथा आरती का पाठ
  • रात्रि जागरण व कीर्तन
  • "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का जप
  • द्वादशी को विधिवत पारण
  • अन्न, वस्त्र व जल का दान

तिथि / पंचांग

तिथिएकादशी
पक्षशुक्ल व कृष्ण
माहप्रत्येक माह
आराध्यश्री विष्णु, श्री खाटू श्याम
स्रोतhi.wikipedia.org/wiki/एकादशी_तिथि — पंचांग की ग्यारहवीं तिथि; मास में दो बार (शुक्ल व कृष्ण पक्ष)
आज का पंचांग

एकादशी — सामान्य प्रश्न

संबंधित देवी-देवता