श्री जगन्नाथ आरती

śrī jagannātha āratī

Jagannath Aarti

समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
✓ संपूर्ण

परिचय

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

स्रोत: पारंपरिक जगन्नाथ आरती

उद्भव / पृष्ठभूमि

भगवान जगन्नाथ श्रीकृष्ण/विष्णु का स्वरूप हैं, जो भाई बलभद्र व बहन सुभद्रा सहित पुरी (ओडिशा) में विराजमान हैं। यह आरती जगन्नाथ पूजन तथा रथ यात्रा पर गाई जाती है, जिससे भक्ति, सुख-शांति व मनोकामना-पूर्ति होती है।

आरती (लिरिक्स)

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जय जगदीश जगन्नाथ, जय जय जगन्नाथा। बलभद्र सुभद्रा संग, पुरी-धाम विराजा॥

हे जगदीश जगन्नाथ, आपकी जय हो! आप भाई बलभद्र व बहन सुभद्रा के संग पुरी धाम में विराजमान हैं।

नील-माधव रूप मनोहर, बड़े-बड़े नैना। दारु-विग्रह अद्भुत, मधुर तुम्हारी बैना॥

नील-माधव का मनोहर रूप, बड़े-बड़े नेत्र वाले; दारु (काष्ठ) की अद्भुत मूर्ति वाले — आपकी वाणी अति मधुर है।

रथ पर होकर सवार, नगर भ्रमण करते। भक्तन को दर्शन देकर, सब दुख हर लेते॥

रथ पर सवार होकर आप नगर का भ्रमण करते हैं; भक्तों को दर्शन देकर उनके समस्त दुःख हर लेते हैं।

जगत के नाथ कहाओ, सबके हो रखवारे। शरण पड़े की रक्षा, करते प्रभु प्यारे॥

आप जगत के नाथ कहलाते हैं और सबके रक्षक हैं; हे प्यारे प्रभु, आप शरण में आए हुए जनों की रक्षा करते हैं।

जगन्नाथ जी की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। भक्ति-मुक्ति वह पावे, सब सुख घर आवे॥

जो भक्त श्रद्धा से जगन्नाथ जी की यह आरती गाता है, वह भक्ति व मुक्ति पाता है और उसके घर में सब सुख आते हैं।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे जगदीश जगन्नाथ, आपकी जय हो! आप भाई बलभद्र व बहन सुभद्रा के संग पुरी धाम में विराजमान हैं।
  2. नील-माधव का मनोहर रूप, बड़े-बड़े नेत्र वाले; दारु (काष्ठ) की अद्भुत मूर्ति वाले — आपकी वाणी अति मधुर है।
  3. रथ पर सवार होकर आप नगर का भ्रमण करते हैं; भक्तों को दर्शन देकर उनके समस्त दुःख हर लेते हैं।
  4. आप जगत के नाथ कहलाते हैं और सबके रक्षक हैं; हे प्यारे प्रभु, आप शरण में आए हुए जनों की रक्षा करते हैं।
  5. जो भक्त श्रद्धा से जगन्नाथ जी की यह आरती गाता है, वह भक्ति व मुक्ति पाता है और उसके घर में सब सुख आते हैं।

लाभ

  • भक्ति, सुख-शांति व मन की प्रसन्नता बढ़ती है।
  • भय व संकट दूर होकर रक्षा मिलती है।
  • मनोकामना पूर्ण होकर मोक्ष-मार्ग प्रशस्त होता है।

कब करें पाठ

रथ यात्रा (आषाढ़ शुक्ल द्वितीया) परएकादशी व नित्य संध्या मेंगुरुवार को

पाठ विधि

भगवान जगन्नाथ के समक्ष तुलसी, पुष्प व भोग अर्पित करें, दीप जलाकर "जय जगन्नाथ" का स्मरण करते हुए आरती गाएँ। रथ यात्रा पर इसका विशेष महत्व है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरापारंपरिक हिन्दू आरती संग्रह
रचयितापारंपरिक
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री कृष्ण

Lord Krishna

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

देवता वर्गप्रेम · धर्म · भक्ति · ज्ञान
मुख्य मंत्रॐ क्लीं कृष्णाय नमः
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श्री जगन्नाथ आरती — सामान्य प्रश्न

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