FAQ
श्री कृष्ण — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता। श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार माने जाते हैं और उनका जीवन बाल-लीला से लेकर महाभारत के गीतोपदेश तक धर्म और प्रेम का संदेश देता है। उन्होंने अर्जुन को भगवद्गीता का अमर ज्ञान दिया।
परंपरा के अनुसार श्री कृष्ण का वाहन — है। उनकी शक्ति/संगिनी राधा-रुक्मिणी मानी जाती हैं।
श्री कृष्ण का बीज मंत्र "ॐ क्लीं कृष्णाय नमः" है। रोमन में इसे "Om Kleem Krishnaya Namah" लिखा जाता है। मंत्र-जप श्रद्धा व नियमितता पर आधारित परंपरा है।
श्री कृष्ण को गोविंद, मुरारी, बंशीधर, गोपाल आदि नामों से भी जाना जाता है। हर नाम उनके किसी एक स्वरूप या गुण की ओर संकेत करता है।
मोरपंख-मुकुटधारी, वंशी-वादक, पीतांबर वस्त्र; गोवर्धन व राधा के साथ अनेक स्वरूपों में। परंपरा में उन्हें प्रेम, धर्म, भक्ति, ज्ञान का अधिष्ठाता माना जाता है।
इस पृष्ठ पर श्री कृष्ण से जुड़े 22 भक्ति पाठ उपलब्ध हैं — आरती, चालीसा, मंत्र व स्तोत्र सहित। हर पाठ हिन्दी, IAST और रोमन तीनों लिपियों में पढ़ा जा सकता है।
