श्री विट्ठल आरती

śrī viṭṭhala āratī

Vitthal Aarti (Panduranga Vithoba, Pandharpur)

समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
✓ संपूर्ण

परिचय

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

स्रोत: विट्ठल-रुक्मिणी मंदिर, पंढरपुर (महाराष्ट्र)

उद्भव / पृष्ठभूमि

भगवान विट्ठल (पांडुरंग/विठोबा) श्रीकृष्ण-विष्णु का स्वरूप हैं, जो कमर पर हाथ रखे ईंट (विटा) पर खड़े रूप में पंढरपुर (महाराष्ट्र) में विराजमान हैं। यह वारकरी सम्प्रदाय का प्रमुख तीर्थ है, जहाँ आषाढ़ी एकादशी की "वारी" (पदयात्रा) विश्व-प्रसिद्ध है।

आरती (लिरिक्स)

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जय जय विट्ठल पांडुरंगा, रुक्मिणी-वल्लभ रंगा। पंढरी में विराजे, भक्त-वत्सल संगा॥

हे विट्ठल पांडुरंग, हे रुक्मिणी-वल्लभ, आपकी जय हो! पंढरपुर में विराजमान आप भक्त-वत्सल (भक्तों पर वात्सल्य रखने वाले) हैं।

कर कटि पर धरे हो, विटे पर असवारी। श्याम-वरण तन सोहे, छवि अति प्यारी॥

आप दोनों हाथ कमर पर रखे ईंट (विटा) पर खड़े हैं; श्याम वर्ण का तन सुशोभित है और आपकी छवि अति प्यारी है।

पुण्डलिक के भक्तिवश, धरा रूप विठोबा। "विठ्ठल-विठ्ठल" गूँजे, हरि नाम मनोहर शोभा॥

भक्त पुण्डलिक की भक्ति के वश होकर आपने विठोबा रूप धारण किया; "विठ्ठल-विठ्ठल" का मनोहर हरि-नाम सर्वत्र गूँजता है।

वारकरी जन गाते, अभंग-नाम-धारा। भक्तन के दुख हरते, करते भव-पारा॥

वारकरी भक्त अभंग व नाम की धारा गाते हैं; आप भक्तों के दुःख हरते हैं और उन्हें भवसागर से पार करते हैं।

विट्ठल जी की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। नाम-भक्ति रस पावे, हरि-कृपा पावे॥

जो भक्त श्रद्धा से विट्ठल जी की यह आरती गाता है, वह नाम-भक्ति का रस तथा हरि (कृष्ण) की कृपा प्राप्त करता है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे विट्ठल पांडुरंग, हे रुक्मिणी-वल्लभ, आपकी जय हो! पंढरपुर में विराजमान आप भक्त-वत्सल (भक्तों पर वात्सल्य रखने वाले) हैं।
  2. आप दोनों हाथ कमर पर रखे ईंट (विटा) पर खड़े हैं; श्याम वर्ण का तन सुशोभित है और आपकी छवि अति प्यारी है।
  3. भक्त पुण्डलिक की भक्ति के वश होकर आपने विठोबा रूप धारण किया; "विठ्ठल-विठ्ठल" का मनोहर हरि-नाम सर्वत्र गूँजता है।
  4. वारकरी भक्त अभंग व नाम की धारा गाते हैं; आप भक्तों के दुःख हरते हैं और उन्हें भवसागर से पार करते हैं।
  5. जो भक्त श्रद्धा से विट्ठल जी की यह आरती गाता है, वह नाम-भक्ति का रस तथा हरि (कृष्ण) की कृपा प्राप्त करता है।

लाभ

  • भक्ति, नाम-स्मरण व मन की प्रसन्नता बढ़ती है।
  • भय व संकट दूर होकर सुख-शांति आती है।
  • श्रीकृष्ण/विष्णु की कृपा व आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

कब करें पाठ

आषाढ़ी व कार्तिकी एकादशी (वारी) परनित्य संध्या मेंगुरुवार व एकादशी को

पाठ विधि

भगवान विट्ठल के समक्ष तुलसी व पुष्प अर्पित करें, "विठ्ठल-विठ्ठल" व अभंग गाते हुए श्रद्धापूर्वक आरती करें। आषाढ़ी एकादशी (पंढरपुर वारी) पर इसका विशेष महत्व है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरापारंपरिक हिन्दू आरती संग्रह
रचयितापारंपरिक
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री कृष्ण

Lord Krishna

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

देवता वर्गप्रेम · धर्म · भक्ति · ज्ञान
मुख्य मंत्रॐ क्लीं कृष्णाय नमः
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श्री विट्ठल आरती — सामान्य प्रश्न

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