श्री विट्ठल आरती

śrī viṭṭhala āratī

Vitthal Aarti (Yuge Atthavis Vitevari Ubha — Sant Namdev)

समय
3–4 मिनट
श्लोक/चौपाई
6
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
आषाढ़ी व कार्तिकी एकादशी; नित्य संध्या
उद्देश्य:भक्ति (Devotion)मुक्ति (Liberation)शांति (Peace)
✓ संपूर्ण

पंढरपुर के विट्ठल (विठोबा, पांडुरंग) की सबसे प्रसिद्ध आरती संत नामदेव की मराठी रचना है — "युगे अठ्ठावीस विटेवरी उभा, वामांगी रखुमाई दिसे दिव्य शोभा"। इसका ध्रुवपद है "जय देव जय देव जय पांडुरंगा", और इसके पाँच पद हैं। अंतिम पद में छाप है — "केशवासी नामदेव भावे ओवाळिती"।

परिचय

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

स्रोत: "विठ्ठलाची आरती" — संत नामदेव की मराठी रचना; अंतिम पद में छाप "नामदेव"

एक नज़र में

मंत्र / पाठश्री विट्ठल आरती
IASTśrī viṭṭhala āratī
देवताश्री कृष्ण
मूल स्रोत"विठ्ठलाची आरती" — संत नामदेव की मराठी रचना; अंतिम पद में छाप "नामदेव"
शुभ दिनआषाढ़ी व कार्तिकी एकादशी; नित्य संध्या
पाठ समय3–4 मिनट
कठिनाईमध्यम

उद्भव / पृष्ठभूमि

यह आरती पंढरपुर का पूरा संसार रचती है — ईंट पर खड़े विठोबा, बाईं ओर रखुमाई, चरणों में बहती भीमा (चंद्रभागा), और आषाढ़ी-कार्तिकी की वारी में नाचते वैष्णव।

ईंट पर खड़े (पद 1). "युगे अठ्ठावीस विटेवरी उभा" — अट्ठाईस युगों से विट्ठल ईंट पर खड़े हैं; "पुंडलिकाचे भेटी परब्रह्म आले गा" — परब्रह्म भक्त पुंडलिक से मिलने आए, और चरणों में बहती भीमा जगत का उद्धार करती है।

रूप (पद 2–3). गले में तुलसी-माला, हाथ कमर पर, कमर पर पीतांबर, माथे पर कस्तूरी; गरुड़ और हनुमान सामने खड़े हैं; राई, रखुमाबाई और सब रानियाँ "राजा विठोबा सावळा" की आरती उतारती हैं।

पंढरी का उत्सव (पद 4). आरतियाँ उतारी जाती हैं और चंद्रभागा में छोड़ी जाती हैं; "दिंड्या पताका वैष्णव नाचती" — दिंडियाँ, पताकाएँ और नाचते वैष्णव; पंढरी की महिमा कितनी बखानी जाए!

आषाढ़ी-कार्तिकी (पद 5). "आषाढी कार्तिकी भक्तजन येती" — आषाढ़ी और कार्तिकी (एकादशी) पर भक्त आते हैं, चंद्रभागा में स्नान करते हैं, और दर्शन की एक झलक से ही उन्हें मुक्ति मिल जाती है।

आरती (लिरिक्स)

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युगे अठ्ठावीस विटेवरी उभा। वामांगी रखुमाई दिसे दिव्य शोभा। पुंडलिकाचे भेटी परब्रह्म आले गा। चरणी वाहे भीमा उद्धरी जगा॥

अट्ठाईस युगों से (विट्ठल) ईंट पर खड़े हैं; बाईं ओर रखुमाई (रुक्मिणी) हैं — दिव्य शोभा दिखती है; पुंडलिक से मिलने परब्रह्म आए, और उनके चरणों में बहती भीमा (नदी) जगत का उद्धार करती है।

जय देव जय देव जय पांडुरंगा। रखुमाईवल्लभा, राईच्या वल्लभा पावे जिवलगा॥

(ध्रुवपद) हे देव, हे पांडुरंग, आपकी जय हो! हे रखुमाई के प्रिय, हे राई के प्रिय, हे प्राणप्रिय, कृपा करो।

तुळसीमाळा गळा कर ठेवुनी कटी। कासे पीतांबर कस्तुरी लल्लाटी। देव सुरवर नित्य येती भेटी। गरुड हनुमंत पुढे उभे रहाती॥

गले में तुलसी की माला, हाथ कमर पर रखे हुए; कमर पर पीतांबर, माथे पर कस्तूरी; श्रेष्ठ देवता नित्य मिलने आते हैं, और गरुड़ और हनुमान सामने खड़े रहते हैं।

धन्य वेणूनाद अनुक्षेत्रपाळा। सुवर्णाची कमळे वनमाळा गळा। राई रखुमाबाई राणीया सकळा। ओवाळिती राजा विठोबा सावळा॥

हे इस क्षेत्र के पालक, आपकी बाँसुरी की ध्वनि धन्य है; सोने के कमल और गले में वनमाला है; राई, रखुमाबाई और सब रानियाँ साँवले राजा विठोबा की आरती उतारती हैं।

ओवाळू आरत्या कुर्वंड्या येती। चंद्रभागेमाजी सोडुनिया देती। दिंड्या पताका वैष्णव नाचती। पंढरीचा महिमा वर्णावा किती॥

हम आरतियाँ उतारते हैं, कुर्वंड्या आती हैं और उन्हें चंद्रभागा में छोड़ दिया जाता है; दिंडियाँ, पताकाएँ और वैष्णव नाचते हैं — पंढरी की महिमा कितनी वर्णन करें!

आषाढी कार्तिकी भक्तजन येती। चंद्रभागेमध्ये स्नान जे करिती। दर्शनहेळामात्रे तया होय मुक्ति। केशवासी नामदेव भावे ओवाळिती॥

आषाढ़ी और कार्तिकी (एकादशी) पर भक्तजन आते हैं और चंद्रभागा में स्नान करते हैं; दर्शन की एक झलक मात्र से उन्हें मुक्ति मिल जाती है — नामदेव भाव से केशव की आरती उतारते हैं।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. अट्ठाईस युगों से (विट्ठल) ईंट पर खड़े हैं; बाईं ओर रखुमाई (रुक्मिणी) हैं — दिव्य शोभा दिखती है; पुंडलिक से मिलने परब्रह्म आए, और उनके चरणों में बहती भीमा (नदी) जगत का उद्धार करती है।
  2. (ध्रुवपद) हे देव, हे पांडुरंग, आपकी जय हो! हे रखुमाई के प्रिय, हे राई के प्रिय, हे प्राणप्रिय, कृपा करो।
  3. गले में तुलसी की माला, हाथ कमर पर रखे हुए; कमर पर पीतांबर, माथे पर कस्तूरी; श्रेष्ठ देवता नित्य मिलने आते हैं, और गरुड़ और हनुमान सामने खड़े रहते हैं।
  4. हे इस क्षेत्र के पालक, आपकी बाँसुरी की ध्वनि धन्य है; सोने के कमल और गले में वनमाला है; राई, रखुमाबाई और सब रानियाँ साँवले राजा विठोबा की आरती उतारती हैं।
  5. हम आरतियाँ उतारते हैं, कुर्वंड्या आती हैं और उन्हें चंद्रभागा में छोड़ दिया जाता है; दिंडियाँ, पताकाएँ और वैष्णव नाचते हैं — पंढरी की महिमा कितनी वर्णन करें!
  6. आषाढ़ी और कार्तिकी (एकादशी) पर भक्तजन आते हैं और चंद्रभागा में स्नान करते हैं; दर्शन की एक झलक मात्र से उन्हें मुक्ति मिल जाती है — नामदेव भाव से केशव की आरती उतारते हैं।

लाभ

  • विट्ठल-भक्ति और वारकरी परंपरा का पाठ।
  • दर्शन की महिमा — "दर्शनहेळामात्रे तया होय मुक्ति"।
  • आषाढ़ी और कार्तिकी एकादशी पर गाई जाने वाली आरती।

कब करें पाठ

आषाढ़ी एकादशी और कार्तिकी एकादशी परनित्य संध्या आरती मेंवारी और भजन-संध्या में

पाठ विधि

विट्ठल-रुक्मिणी के चित्र के समक्ष घी का दीपक जलाकर आरती उतारें और तुलसी-माला अर्पित करें। ध्रुवपद "जय देव जय देव जय पांडुरंगा" पहले पद के बाद और फिर हर पद के बाद गाया जाता है। आरती मराठी में है; हर पद का हिन्दी अर्थ साथ दिया गया है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराshabdyatri.com — विठ्ठलाची आरती, संत नामदेव महाराज (आधार-पाठ) · marathimindset.com — विठ्ठलाची आरती - युगे अठ्ठावीस विटेवरी उभा
रचयितासंत नामदेव (अंतिम पद की छाप)
अंतिम अद्यतनसितंबर 2026

यह भी देखें

देव परिचय

श्री कृष्ण

Lord Krishna

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

देवता वर्गप्रेम · धर्म · भक्ति · ज्ञान
मुख्य मंत्रॐ क्लीं कृष्णाय नमः
सभी पाठ देखें

श्री विट्ठल आरती — सामान्य प्रश्न

श्री कृष्ण भक्ति संग्रह

आरती, चालीसा, मंत्र, स्तोत्र, अष्टकम, सहस्रनाम और अन्य भक्ति पाठ