श्री कृष्ण आरती
śrī kṛṣṇa āratī
Krishna Aarti (Aarti Kunj Bihari Ki)
परिचय
श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।
स्रोत: पारंपरिक (रचयिता: श्री गोस्वामी तुलसीदास परंपरा)
आरती (लिरिक्स)
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
कुंजों में विहार करने वाले, गोवर्धन धारण करने वाले श्री कृष्ण (मुरारी) की आरती करते हैं।
गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला। श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला॥
गले में बैजंती माला धारण किए, मधुर मुरली बजाते बालकृष्ण; कानों में कुण्डल झलकते हैं — वे नंद के आनंद हैं, नंदलाल हैं।
गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली। लतन में ठाढ़े बनमाली, भ्रमर सी अलक कस्तूरी तिलक चंद्र सी झलक॥
आकाश के समान श्याम देहकांति, संग राधिका सखी सहित सुशोभित; लताओं के बीच खड़े वनमाली के भौंरे-से केश और कस्तूरी तिलक चंद्रमा-सा चमकता है।
कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं। गगन सों सुमन रासि बरसै, बजे मुरचंग मधुर मिरदंग॥
स्वर्णिम मोरमुकुट सुशोभित है, देवता भी जिनके दर्शन को तरसते हैं; आकाश से पुष्पवर्षा होती है और मधुर मृदंग व वाद्य बजते हैं।
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की, आरती कुंजबिहारी की॥
गोवर्धनधारी श्री कृष्ण मुरारी की — कुंजबिहारी की आरती करते हैं।
ब्रह्मादिक संकट में परे, रखते हरिनाम। गोकुल के नंदलाल हैं, राखो निज धाम॥
ब्रह्मादि देव भी संकट में पड़कर हरिनाम जपते हैं; गोकुल के नंदलाल हैं — हमें भी अपने धाम में स्थान दीजिए।
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की। कुंजबिहारी की श्री गिरिधर की, आरती भव-तारी की॥
कुंजबिहारी श्री कृष्ण मुरारी की आरती — गोवर्धनधारी की, भवसागर से तारने वाले की आरती।
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अर्थ (हिन्दी)
- कुंजों में विहार करने वाले, गोवर्धन धारण करने वाले श्री कृष्ण (मुरारी) की आरती करते हैं।
- गले में बैजंती माला धारण किए, मधुर मुरली बजाते बालकृष्ण; कानों में कुण्डल झलकते हैं — वे नंद के आनंद हैं, नंदलाल हैं।
- आकाश के समान श्याम देहकांति, संग राधिका सखी सहित सुशोभित; लताओं के बीच खड़े वनमाली के भौंरे-से केश और कस्तूरी तिलक चंद्रमा-सा चमकता है।
- स्वर्णिम मोरमुकुट सुशोभित है, देवता भी जिनके दर्शन को तरसते हैं; आकाश से पुष्पवर्षा होती है और मधुर मृदंग व वाद्य बजते हैं।
- गोवर्धनधारी श्री कृष्ण मुरारी की — कुंजबिहारी की आरती करते हैं।
- ब्रह्मादि देव भी संकट में पड़कर हरिनाम जपते हैं; गोकुल के नंदलाल हैं — हमें भी अपने धाम में स्थान दीजिए।
- कुंजबिहारी श्री कृष्ण मुरारी की आरती — गोवर्धनधारी की, भवसागर से तारने वाले की आरती।
लाभ
- मन में प्रेम, भक्ति और आनंद का संचार होता है।
- पारिवारिक प्रेम और संबंधों में मधुरता आती है।
- चिंता दूर होकर मन शांत व प्रसन्न होता है।
कब करें पाठ
पाठ विधि
श्री कृष्ण के समक्ष माखन-मिश्री व तुलसीदल अर्पित करें। मोरपंख व पीले वस्त्र से श्रृंगार करें। आरती को प्रेमभाव से गाएँ; जन्माष्टमी पर मध्यरात्रि में आरती का विशेष महत्व है।
प्रामाणिकता व स्रोत
देव परिचय
श्री कृष्ण
Lord Krishna
श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।
