समय
40 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
नित्य (विशेषकर एकादशी)
उद्देश्य:भक्ति (Devotion)शांति (Peace)मोक्ष (Liberation)
✓ संपूर्ण महामंत्र
हरे कृष्ण महामंत्र — कलिसन्तरण उपनिषद् (वैष्णव महामंत्र)। हे भगवान की शक्ति (हरा/राधा)! हे कृष्ण! हे राम! मुझे अपनी भक्ति-सेवा में लगाइए। परंपरा में इसे मुख्यतः भक्ति, शांति, मोक्ष के भाव से जपा जाता है, प्रायः 108 बार अर्थात एक माला।
FAQ
हरे कृष्ण महामंत्र — सामान्य प्रश्न
इसमें सोलह नाम (हरे, कृष्ण व राम) होते हैं, इसलिए इसे षोडश-नाम महामंत्र भी कहा जाता है।
यह कलिसन्तरण उपनिषद् में वर्णित है और कलियुग में भगवद्-प्राप्ति का सरल साधन माना जाता है।
परंपरा में इस मंत्र का जप 108 बार — अर्थात एक माला — करने का विधान कहा जाता है, और इसके लिए तुलसी माला का प्रयोग बताया जाता है। जप का सुझाया गया समय प्रातः, संध्या व नित्य है। संख्या से अधिक महत्व नियमितता तथा शुद्ध उच्चारण का माना गया है।
मंत्र के पदों का अर्थ इस प्रकार है — हरे — भगवान की आह्लादिनी शक्ति (हरि/राधा) का संबोधन; कृष्ण — सर्व-आकर्षक भगवान कृष्ण; राम — आनन्द-स्वरूप भगवान राम। पूरे मंत्र का भाव यह है: हे भगवान की शक्ति (हरा/राधा)! हे कृष्ण! हे राम! मुझे अपनी भक्ति-सेवा में लगाइए। यह सोलह नामों वाला महामंत्र कलियुग में भगवद्-प्राप्ति का सरल साधन माना जाता है।
परंपरा में नाम-जप के लिए दीक्षा अनिवार्य नहीं मानी जाती — इसे किसी भी आयु व किसी भी वर्ग का व्यक्ति श्रद्धापूर्वक जप सकता है। यही नाम-मार्ग की विशेषता कही जाती है कि इसमें पात्रता की शर्त भाव है, विधि नहीं।
"ह-रे", "कृष्-ण", "रा-म" को मधुर व सम लय में बोलें। पूरे महामंत्र को कीर्तन की भाँति भाव-विभोर होकर दोहराएँ। परंपरा में मंत्र-जप में शुद्ध उच्चारण का विशेष महत्व कहा जाता है, इसलिए आरंभ में धीरे-धीरे व स्पष्ट बोलकर अभ्यास करें और गति बाद में बढ़ाएँ।
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