गोवर्धन पूजा

Govardhan Puja (Annakut)

अक्टूबर–नवंबर (दीपावली के अगले दिन)

महत्व

गोवर्धन पूजा कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को, दीपावली के ठीक अगले दिन मनाई जाती है। यह उस दिन की स्मृति है जब श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत अपनी कनिष्ठ अंगुली पर उठा लिया था।

इस पर्व का दूसरा नाम अन्नकूट है — अर्थात अन्न का पर्वत। भगवान के निमित्त अनेक प्रकार के व्यंजन बनाकर पर्वत के आकार में सजाए जाते हैं, जिन्हें छप्पन भोग कहा जाता है। घर-आँगन में गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाकर उसकी पूजा होती है, और उसी के साथ गौ-पूजन भी।

भाव यह है कि पूजा उसकी होनी चाहिए जिससे वास्तव में जीवन चलता है — पर्वत, गौ, अन्न और भूमि।

पूजन विधि व परंपरा

  • गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाकर पूजन
  • अन्नकूट — छप्पन भोग अर्पित करना
  • गौ-पूजन
  • गोवर्धन परिक्रमा (ब्रज में)
  • गोवर्धन आरती व चालीसा पाठ

तिथि / पंचांग

तिथिप्रतिपदा
पक्षशुक्ल
माहकार्तिक
समय (लगभग)अक्टूबर–नवंबर (दीपावली के अगले दिन)
आराध्यश्री कृष्ण
स्रोतhi.wikipedia.org/wiki/गोवर्धन_पूजा — कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा, दीपावली के अगले दिन; अन्नकूट व छप्पन भोग की परंपरा · गोवर्धन-धारण लीला — श्रीमद्भागवत की प्रचलित परंपरा
आज का पंचांग

गोवर्धन पूजा — सामान्य प्रश्न

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