FAQ
गोवर्धन पूजा — सामान्य प्रश्न
गोवर्धन पूजा प्रतिपदा तिथि, शुक्ल पक्ष, कार्तिक को मनाया जाता है। सटीक तिथि हर वर्ष पंचांग के अनुसार बदलती है — इसी संग्रह का पंचांग पृष्ठ देखें।
गोवर्धन पूजा कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को, दीपावली के ठीक अगले दिन मनाई जाती है। यह उस दिन की स्मृति है जब श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत अपनी कनिष्ठ अंगुली पर उठा लिया था।
गोवर्धन पूजा मुख्यतः श्री कृष्ण की आराधना का पर्व माना जाता है। इसी पृष्ठ पर उनसे जुड़े आरती, चालीसा व मंत्र भी दिए गए हैं।
परंपरा में इस दिन गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाकर पूजन, अन्नकूट — छप्पन भोग अर्पित करना, गौ-पूजन, गोवर्धन परिक्रमा (ब्रज में) का विधान बताया जाता है। ये परंपरागत मान्यताएँ हैं; क्षेत्र और परिवार के अनुसार विधि में अंतर मिलता है।
अनुशंसित पाठ
गोवर्धन पूजा के लिए अनुशंसित आरती, चालीसा, मंत्र व स्तोत्र
आराध्य देव
