श्री गोवर्धन आरती

śrī govardhana āratī

Govardhan Aarti (Giriraj Govardhan)

समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
✓ संपूर्ण

परिचय

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

स्रोत: गिरिराज गोवर्धन पर्वत, गोवर्धन-मथुरा (उत्तर प्रदेश)

उद्भव / पृष्ठभूमि

गिरिराज गोवर्धन वह पवित्र पर्वत हैं जिन्हें श्रीकृष्ण ने इन्द्र के प्रकोप से ब्रजवासियों की रक्षा हेतु अपनी कनिष्ठा अंगुली पर सात दिन तक उठाए रखा। गोवर्धन की परिक्रमा (मथुरा-गोवर्धन) अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है। गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) दीपावली के अगले दिन मनाई जाती है।

आरती (लिरिक्स)

PDF डाउनलोड

जय जय गिरिराज गोवर्धन, ब्रज के रखवारे। कृष्ण-कर पर शोभे, तुम सबसे न्यारे॥

हे गिरिराज गोवर्धन, हे ब्रज के रक्षक, आपकी जय हो! श्रीकृष्ण के कर (हाथ) पर सुशोभित आप सबसे अद्वितीय हैं।

कनिष्ठा पर धारे गिरि, इन्द्र-मान भंजन। ब्रजवासी की रक्षा, कीन्ही मधुसूदन॥

कनिष्ठा अंगुली पर पर्वत धारण कर इन्द्र का मान भंग किया; मधुसूदन (कृष्ण) ने ब्रजवासियों की रक्षा की।

सात दिवस गिरि धारे, वर्षा से बचाया। गोवर्धन पूजा का, विधान जग बताया॥

सात दिनों तक पर्वत धारण कर (कृष्ण ने ब्रज को) वर्षा से बचाया; और जगत को गोवर्धन पूजा का विधान बताया।

अन्नकूट का भोग लगे, परिक्रमा प्यारी। जो जन तुमको पूजे, सुख-समृद्धि सारी॥

आपको अन्नकूट का भोग लगाया जाता है और परिक्रमा अति प्रिय है; जो आपको पूजता है, उसे समस्त सुख-समृद्धि मिलती है।

गोवर्धन की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। सुख-समृद्धि वह पावे, कृष्ण-कृपा पावे॥

जो भक्त श्रद्धा से गोवर्धन की यह आरती गाता है, वह सुख-समृद्धि तथा श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त करता है।

लिपि बदलने के लिए ऊपर देवनागरी / IAST / Roman चुनें।

अर्थ (हिन्दी)

  1. हे गिरिराज गोवर्धन, हे ब्रज के रक्षक, आपकी जय हो! श्रीकृष्ण के कर (हाथ) पर सुशोभित आप सबसे अद्वितीय हैं।
  2. कनिष्ठा अंगुली पर पर्वत धारण कर इन्द्र का मान भंग किया; मधुसूदन (कृष्ण) ने ब्रजवासियों की रक्षा की।
  3. सात दिनों तक पर्वत धारण कर (कृष्ण ने ब्रज को) वर्षा से बचाया; और जगत को गोवर्धन पूजा का विधान बताया।
  4. आपको अन्नकूट का भोग लगाया जाता है और परिक्रमा अति प्रिय है; जो आपको पूजता है, उसे समस्त सुख-समृद्धि मिलती है।
  5. जो भक्त श्रद्धा से गोवर्धन की यह आरती गाता है, वह सुख-समृद्धि तथा श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त करता है।

लाभ

  • सुख, समृद्धि व अन्न-धन की प्राप्ति होती है।
  • भय, बाधा व प्राकृतिक संकट से रक्षा होती है।
  • श्रीकृष्ण की कृपा व भक्ति में वृद्धि होती है।

कब करें पाठ

गोवर्धन पूजा/अन्नकूट (दीपावली के अगले दिन) परगोवर्धन परिक्रमा के समयनित्य संध्या में

पाठ विधि

गोवर्धन (गिरिराज) के समक्ष अथवा गोबर से गोवर्धन-प्रतिमा बनाकर अन्नकूट (छप्पन भोग) अर्पित करें, परिक्रमा कर श्रद्धापूर्वक आरती गाएँ। गोवर्धन पूजा पर इसका विशेष महत्व है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरापारंपरिक हिन्दू आरती संग्रह
रचयितापारंपरिक
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री कृष्ण

Lord Krishna

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

देवता वर्गप्रेम · धर्म · भक्ति · ज्ञान
मुख्य मंत्रॐ क्लीं कृष्णाय नमः
श्री कृष्ण के पाठ
सभी पाठ देखें

श्री गोवर्धन आरती — सामान्य प्रश्न

श्री कृष्ण भक्ति संग्रह

आरती, चालीसा, मंत्र, स्तोत्र, अष्टकम, सहस्रनाम और अन्य भक्ति पाठ