समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
6
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
गोवर्धन पूजा (अन्नकूट); परिक्रमा के समय
उद्देश्य:समृद्धि (Prosperity)रक्षा (Protection)कृष्ण-भक्ति (Devotion to Krishna)
✓ संपूर्ण
"श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ" गोवर्धन पर्वत की ब्रजभाषा की प्रचलित आरती है, जो गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) पर गाई जाती है। इसमें टेक और पाँच पद हैं। आरती गोवर्धन की सात कोस की परिक्रमा और उसके पड़ाव चकलेश्वर का भी उल्लेख करती है।
FAQ
श्री गोवर्धन आरती — सामान्य प्रश्न
टेक ("श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज") और पाँच पद। द्रिक पंचांग और आरती-चालीसा — दोनों में ये सब पद हैं; हर पद "तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ" पर समाप्त होता है।
दूसरा पद कहता है — "तेरी सात कोस की परिकम्मा, चकलेश्वर है विश्राम": गोवर्धन की परिक्रमा सात कोस की है और उसमें चकलेश्वर पर विश्राम होता है।
ब्रजभाषा में — "तोपे" (तुम पर), "रहेओ" (रहा है), "परिकम्मा" (परिक्रमा) जैसे शब्द ब्रज के हैं। हर पद का हिन्दी अर्थ साथ दिया गया है।
दो प्रकाशित प्रतियों से — द्रिक पंचांग (आधार) और आरती-चालीसा। टेक और पाँचों पद दोनों में हैं।
पर्व
