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लिपि:
॥ श्री ॥
श्री गोवर्धन आरती
आरती · श्री कृष्ण
पाठ
श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ॥
1
तोपे पान चढ़े तोपे फूल चढ़े, तोपे चढ़े दूध की धार। तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ॥
2
तेरी सात कोस की परिकम्मा, चकलेश्वर है विश्राम। तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ॥
3
तेरे गले में कण्ठा साज रहेओ, ठोड़ी पे हीरा लाल। तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ॥
4
तेरे कानन कुण्डल चमक रहेओ, तेरी झाँकी बनी विशाल। तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ॥
5
गिरिराज धरण प्रभु तेरी शरण, करो भक्त का बेड़ा पार। तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ॥
अर्थ (हिन्दी)
- (टेक) हे श्री गोवर्धन महाराज, तुम्हारे माथे पर मुकुट विराज रहा है।
- तुम पर पान चढ़ते हैं, फूल चढ़ते हैं, और दूध की धार चढ़ती है; तुम्हारे माथे पर मुकुट विराज रहा है।
- तुम्हारी परिक्रमा सात कोस की है, और चकलेश्वर पर विश्राम होता है; तुम्हारे माथे पर मुकुट विराज रहा है।
- तुम्हारे गले में कंठा सज रहा है, ठोड़ी पर हीरा-लाल है; तुम्हारे माथे पर मुकुट विराज रहा है।
- तुम्हारे कानों में कुंडल चमक रहे हैं, तुम्हारी झाँकी विशाल बनी है; तुम्हारे माथे पर मुकुट विराज रहा है।
- हे गिरिराज को धारण करने वाले प्रभु, मैं तुम्हारी शरण में हूँ — भक्त का बेड़ा पार करो; तुम्हारे माथे पर मुकुट विराज रहा है।
लाभ
- गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) का पाठ — आरती गोवर्धन पर दूध की धार और पान-फूल चढ़ाने की बात करती है।
- गोवर्धन परिक्रमा का स्मरण — "तेरी सात कोस की परिकम्मा"।
- शरणागति — "गिरिराज धरण प्रभु तेरी शरण, करो भक्त का बेड़ा पार"।
कब करें पाठ
गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) पर · गोवर्धन परिक्रमा के समय · कार्तिक मास में
स्रोत
रचयिता: अज्ञात (किसी प्रति में नाम नहीं). drikpanchang.com — आरती श्री गोवर्धन महाराज की (आधार-पाठ) · aartichalisa.com — गोवर्धन आरती
