समय
3–4 मिनट
श्लोक/चौपाई
8
कठिनाई
सरल (Beginner)
शुभ दिन
प्रतिदिन; प्रत्येक एकादशी; फाल्गुन शुक्ल एकादशी-द्वादशी (लक्खी मेला)
उद्देश्य:शरणागत रक्षा (Refuge)मनोकामना पूर्ति (Fulfilment of Wishes)संकट मोचन (Relief from Crisis)
✓ संपूर्ण (8/8 श्लोक)
श्री खाटू श्याम आरती "ॐ जय श्री श्याम हरे" आठ पदों की आरती है, जो खाटू धाम में प्रतिदिन गाई जाती है। इसमें रत्नजड़ित सिंहासन, केसरिया बागा तथा मोदक-खीर-चूरमा के भोग का वर्णन है। मंदिर में यह दिन में पाँच बार होती है।
FAQ
श्री खाटू श्याम आरती — सामान्य प्रश्न
खाटू श्याम महाभारत के वीर बर्बरीक हैं — घटोत्कच के पुत्र तथा भीम के पौत्र। उन्होंने श्रीकृष्ण के माँगने पर अपना शीश दान कर दिया था, और प्रसन्न होकर कृष्ण ने वरदान दिया कि कलियुग में वे उन्हीं के नाम "श्याम" से पूजे जाएँगे। ध्यान दें — वे स्वयं श्रीकृष्ण नहीं हैं; कृष्ण ने उन्हें अपना *नाम* दिया, अपनी पहचान नहीं।
पूर्ण वाचना में आठ पद हैं — "ॐ जय श्री श्याम हरे" की टेक से आरंभ होकर "निज भक्तों के तुमने, पूरण काज करे" पर समाप्त। किंतु एक संक्षिप्त पाँच-पद वाली वाचना भी ख़ूब प्रचलित है (नीचे देखें)। पाठ 3–4 मिनट का है।
हाँ — और दोनों प्रचलित हैं। पूर्ण वाचना आठ पदों की है (जो यहाँ दी गई है)। एक संक्षिप्त पाँच-पद वाली वाचना भी है, जिसमें दो अंतर हैं: (1) "सिर पर चंवर ढुरे" के स्थान पर "सिर पर सुन्दर पाग"; और (2) एक अतिरिक्त पद — *"हारे का सहारा, श्याम तुम्हारा नाम। लखदातार दयालु, पूरण करो काम।"* वह पद पूर्ण वाचना में नहीं है, पर खाटू परंपरा में अत्यंत प्रचलित है। इसीलिए उसे छिपाया नहीं, यहाँ दर्ज किया गया है।
इसका अर्थ है कि श्याम बाबा हारे हुए व निराश जनों का सहारा बनते हैं। इसका मूल कथा में है — बर्बरीक ने अपनी माता को वचन दिया था कि वे युद्ध में सदा हारने वाले पक्ष की ओर से लड़ेंगे। वही प्रतिज्ञा आज उनकी पहचान बन गई है। खाटू श्याम अष्टक की चौपाई 15 भी यही कहती है — "भक्त पत राखत", भक्तों की लाज रखने वाले।
आरती स्वयं बता देती है — चौथा पद कहता है *"मोदक खीर चूरमा, सुवरण थाल भरे"*। अर्थात मोदक, खीर तथा चूरमा; इनमें चूरमा खाटू में सबसे प्रचलित है। साथ ही पंजीरी व मिश्री भी अर्पित की जाती है। अर्पण में केसरिया या लाल वस्त्र, पुष्प-माला, मोरछड़ी तथा इत्र विशेष माने जाते हैं।
दिन में पाँच बार — मंगला, श्रृंगार, राज-भोग, संध्या तथा शयन आरती। इनका समय गर्मी और सर्दी में अलग-अलग रहता है (जैसे मंगला आरती गर्मियों में लगभग 4:30 बजे प्रातः और सर्दियों में लगभग 5:30 बजे)। घर पर सामान्यतः प्रातः व संध्या — दो बार की जाती है।
प्रतिदिन प्रातः व संध्या; और विशेष रूप से प्रत्येक एकादशी को, जो खाटू परंपरा का मुख्य दिन है। वर्ष का सबसे बड़ा अवसर फाल्गुन शुक्ल एकादशी-द्वादशी है, जब खाटू में लक्खी मेला भरता है — इसकी पुष्टि श्याम पुष्पांजलि की पंक्ति *"फाल्गुन शुक्ला द्वादशी उत्सव भारी होए"* से भी होती है।
नहीं — और यह भ्रम आम है। जन्माष्टमी श्रीकृष्ण का पर्व है। खाटू श्याम बर्बरीक हैं, कृष्ण नहीं — इसलिए उनका दिन एकादशी है, और सबसे बड़ा अवसर फाल्गुन शुक्ल एकादशी-द्वादशी का लक्खी मेला। (इस पृष्ठ पर पहले ग़लती से जन्माष्टमी दर्ज थी; इस सत्र में उसे सुधारा गया है।)
यह खाटू श्याम का ही एक प्रचलित सम्बोधन है, जो इसी आरती के सातवें पद में आता है — *"श्री श्याम बिहारी जी की आरती, जो कोई नर गावे"*। "बिहारी" कृष्ण का भी सम्बोधन है, और चूँकि खाटू श्याम को कृष्ण का दिया हुआ नाम प्राप्त है, यह सम्बोधन उन पर भी लागू होता है।
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पर्व
