श्री द्वारकाधीश आरती

śrī dvārakādhīśa āratī

Dwarkadhish Aarti

समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
✓ संपूर्ण

परिचय

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

स्रोत: पारंपरिक द्वारकाधीश आरती

उद्भव / पृष्ठभूमि

श्री द्वारकाधीश भगवान श्रीकृष्ण का राजसी स्वरूप हैं, जो द्वारका (गुजरात) के अधिपति रूप में विराजमान हैं; द्वारका चार धामों में से एक है। यह आरती जन्माष्टमी, एकादशी व नित्य पूजा में गाई जाती है।

आरती (लिरिक्स)

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जय द्वारकाधीश हरे, प्रभु जय द्वारकाधीशा। द्वारकापुरी विराजे, त्रिभुवन के ईशा॥

हे द्वारकाधीश हरि, आपकी जय हो! द्वारकापुरी में विराजमान आप तीनों लोकों के ईश्वर हैं।

श्याम-वरण तन सुन्दर, पीताम्बर धारी। मुकुट-मोरपंख सोहे, छवि अति प्यारी॥

श्याम वर्ण का सुन्दर तन, पीताम्बर धारण किए; मुकुट व मोरपंख से सुशोभित — आपकी छवि अति प्यारी है।

गोमती-तट विराजे, चार-धाम कहलाए। भक्त दर्शन को आते, मन-वांछित पाए॥

गोमती नदी के तट पर विराजमान, आप चार धामों में गिने जाते हैं; भक्त दर्शन को आते हैं और मनोवांछित फल पाते हैं।

द्वारकानाथ दयालु, भक्तन सुख देते। भय-संकट सब हरते, जो तुमको सुमिरते॥

हे दयालु द्वारकानाथ, आप भक्तों को सुख देते हैं; जो आपका स्मरण करते हैं, उनके समस्त भय-संकट आप हर लेते हैं।

द्वारकाधीश की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। सुख-सम्पति वह पावे, हरि-कृपा पावे॥

जो भक्त श्रद्धा से द्वारकाधीश की यह आरती गाता है, वह सुख-सम्पत्ति तथा हरि (कृष्ण) की कृपा प्राप्त करता है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे द्वारकाधीश हरि, आपकी जय हो! द्वारकापुरी में विराजमान आप तीनों लोकों के ईश्वर हैं।
  2. श्याम वर्ण का सुन्दर तन, पीताम्बर धारण किए; मुकुट व मोरपंख से सुशोभित — आपकी छवि अति प्यारी है।
  3. गोमती नदी के तट पर विराजमान, आप चार धामों में गिने जाते हैं; भक्त दर्शन को आते हैं और मनोवांछित फल पाते हैं।
  4. हे दयालु द्वारकानाथ, आप भक्तों को सुख देते हैं; जो आपका स्मरण करते हैं, उनके समस्त भय-संकट आप हर लेते हैं।
  5. जो भक्त श्रद्धा से द्वारकाधीश की यह आरती गाता है, वह सुख-सम्पत्ति तथा हरि (कृष्ण) की कृपा प्राप्त करता है।

लाभ

  • भक्ति, सुख-शांति व मन की प्रसन्नता बढ़ती है।
  • भय व संकट दूर होकर रक्षा मिलती है।
  • मनोकामना पूर्ण होकर श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है।

कब करें पाठ

जन्माष्टमी परएकादशी व नित्य संध्या मेंगुरुवार को

पाठ विधि

भगवान द्वारकाधीश के समक्ष तुलसी, पुष्प व माखन-मिश्री का भोग अर्पित करें, दीप जलाकर "जय द्वारकाधीश" का स्मरण करते हुए आरती गाएँ और प्रसाद वितरण करें।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरापारंपरिक हिन्दू आरती संग्रह
रचयितापारंपरिक
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री कृष्ण

Lord Krishna

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

देवता वर्गप्रेम · धर्म · भक्ति · ज्ञान
मुख्य मंत्रॐ क्लीं कृष्णाय नमः
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श्री द्वारकाधीश आरती — सामान्य प्रश्न

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